डॉ दिलीप अग्निहोत्री
विविधता में एकता भारतीय राष्ट्र की प्रमुख अवधारणा रही है। लेकिन इस भावना के कमजोर पड़ने का भारत को ऐतिहासिक खामियाजा भी भुगतना पड़ा। विदेशी आक्रांताओं ने इसी का फायदा उठाया था। सैकड़ों वर्षों तक देश को दासता का दंश झेलना पड़ा। अंग्रेज भारत से जाते जाते विभाजन की पटकथा लिख गए थे। सरदार पटेल ने यह चुनौती स्वीकार की, उनके प्रयासों से देश में एकता स्थापित हुई।फिर भी कई बार प्रांतीय आधार पर भेदभाव की घटनाएं परेशान करने वाली होती है। इस बार गुजरात के कुछ जिलों में उत्तर भारतीयों पर हमले किये गए। यह हमला कुछ लोगों पर ही नहीं सरदार बल्लभभाई पटेल के विचारों पर भी था। इस माहौल में गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रुपाणी की लखनऊ यात्रा का विशेष महत्व रहा। वह सरदार पटेल प्रतिमा अनावरण का आमंत्रण देने आए थे। लेकिन मुख्य बात यह थी कि वह सरदार पटेल के विचारों के अनुरूप एकता संवाद भी लाये थे, जिसके संबन्ध में योगी आदित्यनाथ का भी आग्रह था।
दोनों मुख्यमंत्रियों ने एकता संवाद के माध्यम से सन्देश दिया कि भेदभाव के राजनीतिक मंसूबो को सफल नहीं होने दिया जाएगा। रूपानी ऐसी घटनाओं के आरोपियों को सलाखों के पीछे करने के बाद ही लखनऊ आये थे। इसके पीछे सुनियोजित राजनीति के आरोप लग रहे है। रुपाणी ने इस यात्रा के माध्यम से भेदभाव की आशंकाओं को समाप्त किया है। उनकी सरकार दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई कर रही है।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एकता संवाद का स्वागत किया। कुछ समय पहले वह गुजरात की यात्रा पर गए थे। वहां के लोगों ने उनका खूब स्वागत किया था। योगी ने गुजरात के साथ सहयोग बढ़ाने का एक प्रस्ताव भी रखा।
स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के पास बनने वाले एक भारत श्रेष्ठ भारत कांप्लेक्स में यूपी भवन के लिए जमीन आवंटन का योगी आदित्यनाथ ने प्रस्ताव किया। विजय रूपाणी ने इसे स्वीकार कर लिया है। उन्होंने कहा, मुझे इस बात की खुशी है कि योगी जी ने यह मांग सबसे पहले की है। हमारी सरकार उत्तर प्रदेश को जमीन मुहैया कराएगी। इस प्रकार गुजरात में उत्तर प्रदेश सरकार को मिलने वाली यह जमीन दोनों प्रदेशों के भावनात्मक रिश्ते मजबूत करेगी।
रुपाणी ने कहा कि गुजरात में बसे गैर गुजरातियों के मुद्दे पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए। गुजरात में कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने उत्तर भारतीयों का विरोध किया और राहुल गांधी ट्वीट कर उल्टा चोर कोतवाल को डांटे वाली कहावत को चरितार्थ कर रहे हैं। रुपाणी ने कहा कि राहुल गांधी को इस मामले में कांग्रेसी विधायक और कार्यकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए। गुजरात सरकार ने तुरंत कड़े कदम उठाए। त्वरित कार्रवाई करते हुए पुलिस ने सात सौ से ज्यादा लोगों को तत्काल गिरफ्तार किया गया। इसमें अनेक लोग कांग्रेस के थे।
राज्य में रहने वाले सभी गैर गुजराती लोगों की सुरक्षा की जिम्मेदारी सरकार की है। सरकार के कदमों की वजह से राज्य में पिछले कई दिनों से शांति है और जनजीवन सामान्य है। रूपाणी ने अल्पेश ठाकोर का बिना नाम लिए हुए कहा, चार राज्यों में होने वाले चुनावों को देखते हुए कांग्रेस के एक विधायक ने सुनियोजित तरिके से यह साजिश की थी। स्टैचू ऑफ यूनिटी के लोकार्पण को देखते हुए एकता को खंडित करने का प्रयास उन्होंने किया, जिसे सरकार ने विफल किया है। आज स्थिति पूरी तरह से काबू में है।
कांग्रेस ने इस अवसर पर हास्यस्पद प्रस्तुति पेश की। रूपाणी के खिलाफ लखनऊ कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने काले झंडे और बलून दिखाकर विरोध किया। विजय रूपाणी वापस जाओ के नारे लगाए। जबकि गुजरात की उस घटना में कांग्रेस विधायक और उसकी जातिवादी सेना का नाम आया था। ऐसे में कांग्रेस खामोश रहती तो ठीक था। लेकिन कांग्रेस को यहां अपने प्रत्येक प्रदर्शन के लिए बाद में फजीहत उठानी पड़ती है।
जाहिर है कि कांग्रेस ने एकता संवाद की जगह विजय रूपाणी वापस जाओ के नारे बुलंद किये। मतलब गुजरात में कथित रूप से कांग्रेस के विधयक व उनके समर्थक बिहार व उत्तर प्रदेश के लोगों को वापस जाने को कह रहे थे, वही शब्द लखनऊ में कांग्रेस के कार्यकर्ता गुजरात के मुख्यमंत्री के लिए प्रयुक्त कर रहे थे। मतलब इनकी मानसिकता में कोई फर्क नहीं है। जबकि योगी आदित्यनाथ और विजय रुपाणी ने एकता संवाद का मार्ग चुना।







