उपभोक्ता परिषद पूरे मामले को प्रदेश के ऊर्जा मंत्री व नियामक आयोग में उठाकर पारदर्शी नीति बनाने की करेगा मांग
लखनऊ, 24 अक्टूबर 2018: उपभोक्ता परिषद ने बड़ा खुलासा करते हुए कहा कि राजधानी लखनऊ के लाखों विद्युत उपभोक्ताओं द्वारा ई सुविधा काउण्टर पर जमा किये जा रहे प्रत्येक दिन के करोड़ों रूपये के राजस्व पर प्राइवेट बैंक बड़ा फायदा कमा रहे हैं। उपभोक्ता परिषद ने कहा कि बिजली विभाग द्वारा ई सुविधा से जो अनुबन्ध किया गया है उसके मुताबिक ई सुविधा उपभोक्ताओं से वसूल की गयी धनराशि को जो नकद रूप में जमा होता है उसे एक दिन में और चेकों को 3 दिन में विभाग के खाते में अन्तरण कर देगी, लेकिन यहां बिल्कुल उल्टा हो रहा है।
उन्होंने कहा कि ई सुविधा ने जिस प्राइवेट बैंक में एकाउण्ट खुलवा रखा है उस बैंक में 10-10 दिन तक करोड़ों के जमा राजस्व को रोका जा रहा है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस आधुनिक युग में वाणिज्यिक संस्थान अपने करोड़ों रूपये को 1-1 दिन की एफडी कराकर लाखों कमा लेती हैं, वहीं लेसा में प्रत्येक दिन 10 से 15 करोड़ रूपया काउण्टर पर जमा होता है। यदि इतनी अधिक धनराशि को कोई भी प्राइवेट बैंक 10 दिन तक रोक लेगा तो वह वर्तमान आनलाइन/बिजनेस युग में वित्तीय प्रबन्धन के माध्यम से उससे कितना फायदा कमायेगा?
गौरतलब है कि विद्युत उपभोक्ता यदि एक दिन भी अपना बिजली का बिल जमा करने में करते हैं देरी तो उन पर लेट पेमेन्ट सरचार्ज लगाया जाता है और जब उनसे करोड़ों रूपया वसूल लिया जाता है तो उसका फायदा प्राइवेट बैंक कमा रही हैं। इससे सिद्ध होता है कि आर्थिक स्थिति से जूझ रहा बिजली विभाग कितना मस्त है और अधिकारी आये दिन अपनी मीटिंगों के माध्यम से राजस्व को बढ़ाने के लिये व्यस्त हैं।
प्राइवेट बैंक में रोका जाना जांच का विषय: अवधेश कुमार वर्मा
उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व विश्व ऊर्जा कौंसिल के स्थायी सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा जहां तक उपभोक्ता परिषद के संज्ञान में है तो 1 बिल जमा करने पर ई सुविधा लगभग 5 से 6 रूपये विभाग से लेता है। फिर उपभोक्ता द्वारा जमा किये गये राजस्व को अनुबन्ध की तय समय सीमा के मुताबिक विभाग को क्यों नहीं जमा करता? 1-2 दिन बैंकों की छुट्टी के दौरान अपवाद स्वरूप देरी हो जाये तो चलता है लेकिन यहां इतने लम्बे समय तक करोड़ों रूपया प्राइवेट बैंक में रोका जाना बड़ी जांच का विषय है और बिलिंग कार्य में लगाये गये उच्चाधिकारियों को इससे सबक लेकर आगे पारदर्शी नीति बनाना चाहिए। चूंकि पूरा मामला बिजली उपभोक्ताओं के राजस्व का है, ऐसे में जल्द ही उपभोक्ता परिषद इस गम्भीर मसले को प्रदेश के ऊर्जा मंत्री जी व उप्र विद्युत नियामक आयोग के समक्ष उठायेगा। क्योंकि कहीं न कही इन सब का खामियाजा प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ता है।
करोड़ों का हिसाब सही समय पर क्यों नहीं?
उपभोक्ता परिषद ने कहा कि बिजली विभाग को तो इस बात से सबक लेना चाहिए जहां ग्रिड फ्रीक्वेन्सी पर मिनट टू मिनट बिजली खरीद सस्ती और महंगी दरों पर होती रहती है, ऐसे में विभाग को अपने राजस्व के ज्यादातर भाग को बिजली खरीद पर खर्च करना होता है। फिर करोड़ों का हिसाब सही समय पर क्यों नहीं?







