किशोरियों ने चुप्पी तोड़ी और खुलकर शेयर किये अनुभव
लखनऊ, 29 अक्टूबर 2018: जब मैं घर में सेनेट्री पैड खरीदने के लिए बोलती थी तो पापा बहुत नाराज होते थे लेकिन मां ने उन्हें समझाया, कई बार बहस भी हुई लेकिन अब वह मेरे मन मुताबिक पैड खरीदकर लाने लगे। यह कहना है लालपुर की शिवानी का। शिवानी मोहनलालगंज के लालपुर गांव में 25 अक्टूबर को मनाये जाने वाले लाडली दिवस में शामिल होने आईं थीं।
शर्म करने से बात नहीं बनेगी, जागरूक होने की जरुरत है: शिवानी
माहवारी का स्वच्छता से गहरा संबंध
शगुन न्यूज़ इंडिया डॉट कॉम की टीम गुरुवार को जब लालपुर गांव पहुंची तो आंगनबाड़ी संचालिका रूपा सिंह उन्हें स्वास्थ्य और स्वच्छता संबंधी टिप्स दे रहीं थीं। किशोरियों ने जानना चाहा कि माहवारी के दौरान क्या करें और क्या न करें। माहवारी का स्वच्छता से क्या संबंध है। इस विषय पर दो मिनट बोलने के लिए भी कहा गया।
समय से पहले ही पहुंची महिलायें व किशोरियां:
यहां लाडली दिवस के दिन महिलाओं और किशोरियों ने सुबह से ही अपनी उपस्थिति दर्ज करानी शुरू कर दी थी। गांव की किशोरियों ने समूह में कई व्यक्तिगत मुद्दों पर चर्चा भी की। वहीं संचालिका ने भी खुलकर जवाब दिया और नई-नई जानकारियों से भी अवगत कराया। उन्होंने किशोरियों और महिलाओं को साफ सफाई से सम्बंधित एक खास किस्म के मटके का भी प्रयोग बताया। उन्होंने बताया कि मटके में पैड और खून से सने कपड़े को नीम की सूखी पत्तियों के साथ जला देना चाहिए। इससे पैदा होने वाले बैक्टीरिया और संक्रमण से छुटकारा पाया जा सकता है।
माहवारी कोई छुवाछुत की बीमारी नहीं: माहवारी पर की परिचर्चा
लाडली दिवस पर आंगनबाड़ी संचालिका ने केंद्र पर आई सभी महिलाओं और किशोरियों को आयरन और फोलिक एसिड की टेबलेट भी वितरित कीं। वितरण के दौरान महिलाओं को आयरन और फोलिक एसिड की टेबलेट के लाभ के बारे में भी बताया गया। इसके बाद पोषाहार वितरित किया गया।
पुराने खट्टे मीठे अनुभव भी साझा किये:
चुप्पी तोड़ो अभियान के तहत निर्मला सिंह ने कहा कि आज के जमाने में तो काफी सुविधाएं हो गयी हैं। पहले तो इस विषय पर लोग कुछ भी बोलने से बचते थे। उन्होंने कहा कि मेला जाने के दौरान मुझको या मेरी सहेलियों को अक्सर खून आ जाता था और वहां कोई विकल्प भी नहीं होता था। ऐसे में बड़ी शर्मिंदगी उठानी पड़ती थी। उन्होंने कहा कि पहले के ज़माने में तो कोई रजाई, कोई गद्दा फाड़कर काम चलाते थे लेकिन फिर भी खून कहीं न कहीं लग ही जाता था।
विनीता सिंह ने कहा कि पहले तो महिलाएं उन दिनों में नहाती भी नहीं थी लेकिन अब आंगनबाड़ी के माध्यम से जानकारी मिलते रहने से लोगों में जागरूकता आई और अब उन दिनों भी रोज अच्छे से नहाती हैं। साथ ही खूब साफ़ सफाई रखती हैं।
पोषाहार के लिए लगाई लाइन:
माहवारी से सम्बंधित जानकारी पाने के बाद किशोरियां और महिलाएं अपने स्वास्थ को लेकर खूब सजग दिखीं। सभी ने शारीरिक कमजोरी को दूर करने के लिए आंगनबाड़ी केंद्र पर बंटने वाले स्वास्थ्यवर्धक पोषाहार को लाइन लगाकर प्राप्त किया। इस दौरान जो महिलाएं किसी कारणवश केंद्र पर उपस्थित नहीं हो पायी तो उनकी जगह उनके बच्चे या रिश्तेदारों को पोषाहार वितरित किया गया। इस दौरान आंगनबाड़ी केंद्र पर संचलिका रूमा सिंह, किशोरी शिवानी,स्नेहा पाल राखी वर्मा, पारुल वर्मा, नीरू वर्मा, दीपिका वर्मा, सपना, शिवानी, शालिनी, सोनम, मोहिनी, निर्मला सिंह, लालपुर से उपस्थित रहीं।

क्यों मनाते हैं लाडली दिवस:
पूरे देश में हर माह की 25 तारीख को आंगनवाड़ी केन्द्रों पर लाडली दिवस मनाया जाता है। इस दिन 11-18 वर्ष की किशोरियों को केंद्र पर बुलाया जाता है। उन्हें पोषाहार दिया जाता है। इसके साथ ही शारीरिक प्रजनन एवं स्वास्थ्य संबंधी जानकारी, पोषण संबंधी जानकारी, व्यक्तिगत स्वच्छता व आयरन की गोली का महत्व और कुपोषण सम्बन्धी जानकारी दी जाती है।







