अभी 1 अक्टूबर 2018 यानि सोमवार को ‘विश्व स्ट्रोक दिवस’ मनाया गया। इस दिवस पर वायु की ख़राब गुणवत्ता व पर्यावरण में आये तेजी से बदलाव को लेकर गंभीर चर्चा हुई, चिकित्सकों ने दुनिया को सावधान करते हुए कहा कि वायु की खराब गुणवत्ता में सांस लेने से स्ट्रोक हो सकता है। रक्त आपूर्ति में कमी के कारण दिमाग की कोशिकाएं मृत हो जाती हैं, उस चिकित्सा स्थिति को स्ट्रोक कहते हैं। स्ट्रोक ब्लोकेज या दिमाग में रक्त की आपूर्ति करने वाले नसों में रुकावट होने से स्ट्रोक पड़ता है। इसलिए बहुत सावधान रहने की जरुरत है।
हेल्थकेयर एट होम के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर गौरव ठकराल ने एक बयान में कहा, ‘भारत में जागरूकता की कमी उच्च डेली (अशक्कता समायोजित आयु वर्ष) का मुख्य कारण है। भारत में हर साल प्रति लाख व्यक्तियों पर 795.57 की मौत स्ट्रोक से होती है, जो बहुत ज्यादा है।’
उन्होंने कहा, ‘लोग वायु प्रदूषण के साथ स्ट्रोक के जुड़ाव को लेकर जागरूक नहीं हैं और अक्सर इससे बचने के लिए वह जरूरी कदम नहीं उठाते हैं। स्ट्रोक के बाद भी लोग पुनर्वास की महत्वता को नजरअंदाज करते हैं, जो पूरी तरीके से ठीक होने के लिए बहुत जरूरी है। जो लोग नियमित शारीरिक चिकित्सा के लिए अस्पताल नहीं जा सकते, उनके लिए होम हेल्थयेकर एक अच्छा समाधान है।’
लोगों को जागरूक होना चाहिए कि जब स्ट्रोक हो तो तुरंत हस्तक्षेप जल्दी स्वस्थ होने में सहायता कर सकता है। लेकिन इसके लिए शुरुआती संकेतों को पहचानना बहुत जरूरी है, जिसमें अनियमित हंसी, बाजू संवेदन शून्य हो जाता है।







