आडंबरों से दूर, सात्विकता और सेवा का अनुपम उदाहरण
उन्नाव। सिकंदरपुर कर्ण स्थित श्री शक्ति धाम आश्रम, अमिलाह में प्रथम बड़े मंगल से विशाल भंडारा शुरू हो गया है, जो पूरे अवध क्षेत्र में आस्था और शुद्ध भक्ति का प्रतीक बन रहा है। जबकि आजकल धार्मिक आयोजन अक्सर दिखावे और प्रतिष्ठा का माध्यम बनते जा रहे हैं, वहां यह भंडारा वैदिक रीतियों, मंत्रोच्चार और निश्छल सेवा भाव के साथ आयोजित किया जा रहा है।
अन्न से नहीं, प्रसाद से होता है अंतः
करण शुद्धपरम पूज्य श्री श्री नारायण गिरि जी महाराज के संरक्षण में चल रहे इस आश्रम में तैयार प्रसाद सात्विकता और पवित्रता से ओत-प्रोत है। महाराज जी श्रीमद्भगवद्गीता के संदेश को याद दिलाते हुए कहते हैं कि अन्न से ही प्राणियों का पोषण होता है, लेकिन जब वह नि:स्वार्थ भाव और ईश्वरीय चेतना से बनाया जाए तो वह साक्षात प्रसाद बन जाता है।
ऐतिहासिक परंपरा को सहेजने का प्रयास
आश्रम अवध की प्राचीन बड़े मंगल भंडारा परंपरा को पुनर्जीवित कर रहा है, जो नवाब वाजिद अली शाह की हनुमान जी के प्रति गहरी श्रद्धा से जुड़ी हुई है। महाराज जी ने भक्तों से अपील की कि भंडारे को फैशन और दिखावे से बचाकर उसकी मूल पवित्रता और आध्यात्मिक उद्देश्य को बनाए रखें।
धर्म है आत्मिक समर्पण, न कि प्रदर्शन
श्री शक्ति धाम आश्रम का यह दिव्य आयोजन आधुनिक उपभोक्तावादी समाज को सही दिशा दिखा रहा है। यहां का भंडारा भूख मिटाने का साधन भर नहीं, बल्कि भक्तों के मन और विचारों को शुद्ध करने वाला अमृत है।
बता दें कि यह प्रयास सनातन संस्कृति की गरिमा को सहेजने और भक्ति के असली मर्म को जीवंत रखने का एक उज्ज्वल उदाहरण बन गया है।







