नयी बिजली दर की प्रक्रिया में बिजली कम्पनियों द्वारा आज प्रकाशित विज्ञापन में कार्पोरेशन ने दिखाया अपना हिडेन एजेण्डा?
लखनऊ, 15 नवंबर 2018: उपभोक्ता परिषद ने कहा कि नियामक आयोग आदेश के बाद वर्ष 2018-19 के लिये नयी बिजली के सम्बन्ध में पावर कार्पोरेशन की तरफ से सभी बिजली कम्पनियों के लिये आज जो विज्ञापन प्रकाशित कराया गया है, उसमें बड़ी चालाकी से पावर कार्पोरेशन ने अपना हिडेन एजेण्डा जाहिर कर दिया है।
उपभोक्ता परिषद ने कहा कि पहले तो पावर कार्पोरेशन ने आगामी लोकसभा चुनाव के चलते बड़ी चालाकी से बिजली दर व एआरआर को आयोग में दाखिल नहीं किया और जब आयोग ने सुओ मोटो कार्यवाही करते हुए बिजली कम्पनियों का आवश्यक डाटा प्रकाशित कराने का आदेश दिया तो उसमें बिजली कम्पनियों की तरफ से विज्ञापन में बड़ी चालाकी से यह लिख दिया गया है कि बिजली कम्पनियों के पास राजस्व की भरपायी के लिये कोई अतिरिक्त स्रोत नहीं है और आयोग को यदि यह प्रतीत होता है कि उपभोक्ताओं को टैरिफ शाॅक हो सकता है तो आयोग मल्टी ईयर टैरिफ के प्राविधानानुसार रेगुलेटरी एसेट के अनुमोदन पर विचार कर सकता है।
यानि कि सीधे तौर पर आने वाले समय में एक और बड़ा रेगुलेटरी सरचार्ज उपभोक्ताओं पर थोपा जायेगा। इस मुद्दे पर जल्द ही उपभोक्ता परिषद नियामक आयोग से करेगा बात। उपभोक्ता परिषद ने कहा पावर कार्पोरेशन की अक्षमता का खामियाजा जनता पर नहीं पड़ने दिया जायेगा। उपभोक्ता परिषद ऐसे साक्ष्य पेश करेगा जिससे बिजली दरों में कमी होना तय है।
उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि पावर कार्पोरेशन सही मायने में यदि पारदर्शी है और उसके द्वारा टैरिफ बढ़ोत्तरी का प्रस्ताव व एआरआर नहीं दाखिल किया गया तो उसे साफ यह कहना चाहिए कि हम अपने पैरा मीटरों की दक्षता में सुधार राजस्व में बढ़ोत्तरी बिजली चोरी में रोक लगाकर राजस्व की भरपायी करेंगे, लेकिन यहां तो गुपचुप तरीके से सुओ मोटो कार्यवाही में कार्पोरेशन ने विज्ञापनों में अपना हिडेन एजेण्डा दिखा दिया। यानि कि लोकसभा चुनाव समाप्त होने के बाद जब वर्ष 2019-20 का टैरिफ आयेगा तो वर्तमान में जो गैप रेगुलेटरी एसेट के रूप में तैयार होगा उसके बदले हम पर एक और रेगुलेटरी सरचार्ज थोपा जायेगा। यानि कि चोर दरवाजे से जनता पर अतिरिक्त भार।
उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने कहा कि इसके पूर्व भी कई बार सरकारों ने नो टैरिफ हाईक का प्रस्ताव दिया इसी प्रकार बिजली कम्पनियों को यह कहना चाहिए कि इस बार कोई टैरिफ बढोत्तरी नहीं होगी और यदि बिजली कम्पनियों की अक्षमता के चलते को राजस्व का गैप बनता है तो उप्र की सरकार उसके लिये अतिरिक्त सब्सिडी दे, जिससे सही मायने में जनता के साथ न्याय हो।







