डॉ दिलीप अग्निहोत्री
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सिंगापुर यात्रा मात्र छत्तीस घण्टे की थी। लेकिन यह द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर उपयोगी साबित हुई। यहां मोदी ने मेजबान सिंगापुर, ऑस्ट्रेलिया, जापान के प्रधानमंत्री, अमेरिका के उपराष्ट्रपति आदि से वार्ता की। इसमें अनेक द्विपक्षीय मसलों पर सहमति बनी, क्षेत्रीय स्तर पर आपसी कनेक्टिविटी, तकनीकी साथ ही हिन्द प्रशांत क्षेत्र में साझा रणनीति बनाने पर विचार किया गया। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आतंकवाद को खतरा माना गया। इसे आपसी सहयोग के मार्ग पर बाधक बताया गया। इसके विरुद्ध रणनीति बनाने का मंसूबा दिखाया गया।
उल्लेखनीय है कि पूर्वी एशिया सम्मेलन में यह सभी विचार नरेंद्र मोदी द्वारा ही व्यक्त किये गए। ये सभी देशों और मानवता को सुरक्षित रखने वाले विचार थे। इस सम्मलेन में दस आसियान सदस्य देश ब्रुनेई दारुसलाम, कंबोडिया, इंडोनेशिया, लाओस, मलेशिया, म्यांमार, सिंगापुर, थाईलैंड, फिलीपींस और वियतनाम शामिल है। इसके अलावा भारत, चीन, जापान, कोरिया गणराज्य, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, संयुक्त राज्य अमरीका और रूस को साझेदार के रूप में स्थान मिला है। इस प्रकार अठारह देशों के शासकों ने सिंगापुर में अनेक विषयों पर विचार विमर्श किया।

पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन दक्षिणी एशिया और पूर्वी एशिया के देशों का मंच है। प्रारम्भ में सोलह देश सम्मिलित थे। दो हजार ग्यारह के छठे सम्मेलन में संयुक्त राज्य अमेरिका और रूस भी सम्मिलित हो गए। सिंगापुर में मोदी ने पूर्वी एशिया सम्मेलन, आसियान भारत अनौपचारिक बैठक, क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक साझेदारी बैठक में भाग लिया।
मोदी ने कहा कि पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन और आसियान व्यवस्था में क्षेत्रीय शांति, समृद्धि तथा सुरक्षा में हमारे महत्व को रेखांकित किया।
शिखर सम्मेलन में सूचना एचं संचार प्रौद्योगिकी, स्मार्ट शहर, समुद्री सहयोग तथा सीमा पार के आतंकवाद पर चर्चा हुई। इस भारत-सिंगापुर हैकाथन के प्रतिभागियों की सचिव स्तरीय बैठक हुई। मोदी की यात्रा के दौरान क्वाड देशों भारत, अमेरिका, जापान तथा आस्ट्रेलिया के संयुक्त सचिव स्तर की तीसरी बैठक थी।
मोदी ने कहा ऐसे लोगों को औपचारिक वित्तीय बाजार में लाना ही होगा जिनके पास अब तक बैंक खाता नहीं है। विश्व में असंगठित क्षेत्र के एक अरब से अधिक ऐसे मजदूरों को बीमा एवं पेंशन की सुरक्षा के दायरे में लाना होगा। वित्त के अभाव में किसी उद्यम को बंद करने की नौबत नहीं आनी चाहिए। बैंकों व वित्तीय संस्थानों को जोखिम का प्रबंधन करने, धोखाधड़ी से निपटने और पारंपरिक पद्धतियों में बदलाव करने में अधिक सक्षम बनाना आवश्यक है। मोदी ने इस प्रदर्शनी फेस्टिवल में लगे अठारह भारतीय कंपनियों के पैवेलियन का भी भ्रमण किया।
मोदी ने आतंकवाद को विश्व की बड़ी समस्या बताया। आतंकवादी हमलों के सभी सुराग एक ही सूत्र और एक ही स्थान से उपजे होने की ओर इशारा करते हैं। वहां आतंकवादी चुनावी प्रक्रिया में शामिल होते है। भारत और आसियान के बीच व्यापारिक एवं आर्थिक संबंध हैं। चालू वर्ष में करीब इक्यासी अरब डॉलर से ज्यादा का व्यापार हुआ था, जो भारत के कुल व्यापार का साढ़े दस प्रतिशत है। भारत ग्यारह प्रतिशत से ज्यादा निर्यात आसियान देशों को करता है।
मोदी की यात्रा के दौरान क्वाड देशों भारत, अमेरिका, जापान तथा आस्ट्रेलिया के संयुक्त सचिव स्तर की तीसरी बैठक हुई। मोदी ने कहा ऐसे लोगों को औपचारिक वित्तीय बाजार में लाना ही होगा जिनके पास अब तक बैंक खाता नहीं है। विश्व में असंगठित क्षेत्र के एक अरब से अधिक ऐसे मजदूरों को बीमा एवं पेंशन की सुरक्षा के दायरे में लाना होगा। वित्त के अभाव में किसी उद्यम को बंद करने की नौबत नहीं आनी चाहिए। बैंकों व वित्तीय संस्थानों को जोखिम का प्रबंधन करने, धोखाधड़ी से निपटने और पारंपरिक पद्धतियों में बदलाव करने में अधिक सक्षम बनाना आवश्यक है। अमेरिकी उप राष्ट्रपति माइक पेंस से मोदी की वार्ता भी उपयोगी रही। इसमें आपसी रक्षा सहयोग और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र को खुला रखने पर चर्चा की गई।
भारत और अमेरिका हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर सहमत है। इसकी रणनीति बनाई जाएगी। इस क्षेत्र में चीन अपना प्रभाव बढ़ाने का प्रयास कर रहा है। इससे क्षेत्रीय सुरक्षा और संतुलन के लिए खतरा पैदा हुआ है। मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि अमेरिका अब भारत में रक्षा उपकरण और उद्योग स्थापित करे और यहीं पर इसे तैयार करे। वहीं आतंकवाद के मुद्दे पर भी चर्चा हुई। उप-राष्ट्रपति पेंस ने अमेरिका और भारत के बीच सहयोग को बेहतर बताया।
मोदी ने आॅस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरीसन के साथ द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने पर विचार विमर्श किया। पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन के मौके पर दोनों नेताओं के बीच अलग से हुई बैठक में व्यापार, रक्षा और सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने पर बातचीत हुई। मोदी ने प्रतिष्ठित फिनटेक फेस्टिवल में मुख्य व्याख्यान दिया। वह फिनटेक फेस्टिवल को संबोधित करने वाले विश्व के पहले नेता हैं। इसके अलावा अमेरिका के उप राष्ट्रपति माइक पेंस और सिंगापुर के प्रधानमंत्री ली सेन लूंग सहित अन्य वैश्विक से विचार विमर्श किया।
अमेरिका भी मोदी से वार्ता की तैयारी कर रहा था। व्हाइट हाउस ने पिछले सप्ताह कहा था कि सिंगापुर में बैठक के दौरान पेंस तथा मोदी भारत अमेरिका रक्षा सहयोग तथा द्विपक्षीय संबंधों पर चर्चा करेंगे। ईरान से तेल आयात पर पाबंदी के बाद मोदी-पेंस की बैठक हुई। वैसे इस पाबंदी से भारत, चीन, दक्षिण कोरिया, जापान, इटली, यूनान, ताइवान ओर तुर्की को छूट दी गयी है। इसके अलावा नरेंद्र मोदी ने सिंगापुर के उप-प्रधानमंत्री षणमुगरत्नम के साथ एपिक्स अर्थात एप्लिकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफेस एक्सचेंज की शुरुआत की।
एपिक्स हमारी कंपनियों को वैश्विक वित्तीय संस्थानों से जोड़ेगा। हैदराबाद, कोलंबो और लंदन के सॉफ्टवेयर विशेषज्ञों ने एपिक्स को तैयार किया है। इसे बोस्टन की कंपनी वर्चुसा ने छोटे बैंकों को दूर दराज के इलाकों में लोगों से बैंकिंग सम्पर्क स्थापित करने में आसानी के लिये तैयार किया है। एपिक्स तेईस देशों में बिना बैंक खाता वाले लोगों तक पहुंचाने में बैंकों की सहायता करेगा।
नरेंद्र मोदी ने सिंगापुर में सीमित समय का बेहतरीन उपयोग किया। अठारह देशों के नेताओं से मिलने के अलावा उन्होंने क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों की ओर ध्यान खींचा। यही कारण था कि नरेंद्र मोदी को सिंगापुर में सर्वाधिक अहमियत मिली








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