अध्ययन में कहा: मौसमी परेशानियों के चलते संभवत: सभ्यता का खात्मा हुआ
नई दिल्ली, 18 नवंबर 2018: इतिहास के रहस्यों में भी आये दिन कोई न कोई नया खुलासा होता रहता है शोधकर्ताओं ने कहा है कि सिंधु घाटी में करीब 2500 ईसा पूर्व हुए तापमान एवं मौसमी चक्र में बदलाव की शुरुआत के चलते हड़प्पावासियों को सिंधु के बाढ़ के मैदानों से काफी दूर फिर से बसने पर मजबूर होना पड़ा होगा। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार यह एक नए अध्ययन में ऐसा खुलासा हुआ है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार अमेरिका के वुड्स होल ओश्नोग्राफिक इंस्टीट्यूशन के शोधकर्ताओं ने कहा कि 4,000 साल से भी ज्यादा वक्त से पहले सिंधु नदी घाटी में हड़प्पा संस्कृति पनपी जो अब आधुनिक पाकिस्तान और उत्तर पश्चिम भारत में पड़ती है।
उन्होंने बताया कि हड़प्पा के लोगों ने परिष्कृत शहरों का निर्माण किया, मल-प्रवाह पद्धतियों? का आविष्कार किया जो प्राचीन रोम से पहले की तिथि के हैं और मेसोपोटामिया में बस्तियों के साथ लंबी दूरी के व्यापार में शामिल रहे। इसके बावजूद 1800 ईसा पूर्व तक इस उन्नत सभ्यता ने अपने-अपने शहर छोड़ दिए थे और हिमालय के निचले हिस्से में स्थित छोटे गांवों की तरफ जाने लगे थे।
क्लाइमेट ऑफ द पास्ट’ पत्रिका में हुआ प्रकाशित:
डब्ल्यूएचओआई के एक भूवैज्ञानिक लिवियु गियोसन ने कहा 2500 ईसा पूर्व में सिंधु घाटी के ऊपर तापमान और मौसमी चक्र में बदलाव की शुरुआत से मॉनसून की बारिश धीरे-धीरे कम होने लगी जिससे हड़प्पा शहरों के पास खेती मुश्किल या असंभव होने लगा। शोधकर्ताओं ने कहा कि इसी तरह की मौसमी परेशानियों के चलते संभवत: सभ्यता का खात्मा हुआ। यह अध्ययन ‘‘क्लाइमेट ऑफ द पास्ट’ पत्रिका में प्रकाशित हुआ है।







