संघर्ष समिति का बड़ा फैसला: 8 लाख आरक्षण समर्थक कार्मिकों को मिशन 2019 के तहत दी गयी जिम्मेदारी, आगामी 4 माह के अन्दर अपने 50 रिश्तेदार/नातेदार परिवारों को जागरूक करें कि जिन्हें आरक्षित सीट से आपने चुना था अपना सांसद/विधायक वह आरक्षण के कुठाराघात पर हैं चुप जिससे नहीं पास हो रहा है पदोन्नति में आरक्षण का लम्बित बिल
लखनऊ, 18 नवंबर 2018: आरक्षण बचाओं संघर्ष समिति उप्र की प्रान्तीय कार्य समिति संयोजक मण्डल की आज एक आवश्यक बैठक सम्पन्न हुई, जिसमें लोकसभा से लम्बित पदोन्नति बिल पास कराने व सुप्रीम कोर्ट द्वारा पारित आदेश को उत्तर प्रदेश में लागू कराकर पदोन्नतियों में आरक्षण की व्यवस्था बहाल किये जाने पर विचार विमर्श किया गया। आरक्षण समर्थकों ने केन्द्र की मोदी सरकार व उत्तर प्रदेश सरकार पर आरोप लगाते हुये कहा कि सरकार प्रदेश के लगभग 8 लाख दलित कार्मिकों को उनका हक नहीं देना चाहती है, इसलिये पदोन्नतियों में आरक्षण की व्यवस्था पर चुपचाप तमाशा देख रही है और दलित कार्मिकों का उत्पीड़न हो रहा है।
सांसद/विधायक मेरे संवैधानिक अधिकार पर चुप क्यों है?
संघर्ष समिति ने आज मिशन-2019 के तहत यह ऐलान किया है कि जिस लोक सभा/राज्य सभा में दलित समाज के लगभग 137 सांसद है और पिछले 5 वर्षो से ज्यादा समय से लोक सभा में पदोन्नति बिल लम्बित है और सब चुप है, इसलिये 8 लाख आरक्षण समर्थक कार्मिक कम से कम अपने 50 रिश्तेदार/नातेदार परिवारों को अपने ऊपर हो रहे अपमान के बारे में बतायें और उन्हें यह समझाये/जागरूक करें कि जो हमारे समाज के सांसद/विधायक है वह मेरे संवैधानिक अधिकार पर चुप क्यों है? इसलिये मिशन-2019 के तहत आप सभी आरक्षित सीटों पर आरक्षण समर्थक सांसद/विधायकों चुने जिससे बाबा साहब द्वारा बनायी संवैधानिक हितों की रक्षा हो सके।
आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति,उप्र के संयोजकों सर्वश्री अवधेश कुमार वर्मा, केबी राम, आरपी केन, अनिल कुमार, अजय कुमार,पीएम प्रभाकर, अन्जनी कुमार, रीना रजक, प्रेम चन्द्र, अशोक सोनकर, बनी सिंह, अंजली गौतम, अनीता, जितेन्द्र, राजेश पासवान, प्रभू शंकर, श्रीनिवास, अमित, योगेन्द्र कुमार, रामेन्द्र कुमार, अजय धानुक, सुनील कनौजिया, अरविन्द फरसोवाल ने कहा कि मिशन-2019 का यह अभियान 4 माह तक लगातार जारी रहेगा, जिसमें 8 लाख आरक्षण समर्थक कार्मिकों का यह लक्ष्य होगा कि वह 50 परिवारों तक पहुॅचे, जिससे लगभग 4 करोड़ लोगों के बीच में यह जागरूकता फैलायी जा सके कि जब तक हम सांसद, विधायक बाबा साहब द्वारा बनायी गयी संवैधानिक व्यवस्था की रक्षा के लिये सोच समझकर नहीं चुनेगें तब तक संवैधानिक अधिकार सुरक्षित नहीं होगा।
संघर्ष समिति के नेताओं ने अलग-अलग संयोजकों के नेतृत्व में 30 टीमों का गठन किया है, जो सभी जिलो में अपने कार्यरत व सेवानिवृत्त आरक्षण समर्थक कार्मिकों के सम्पर्क में रहकर पूरे अभियान की अनवरत समीक्षा करते रहेगें और प्रदेश स्तर पर प्रत्येक रविवार को प्रान्तीय संयोजक मण्डल द्वारा इसकी समीक्षा की जायेगी।






