Close Menu
Shagun News India
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Monday, June 15
    Shagun News IndiaShagun News India
    Subscribe
    • होम
    • इंडिया
    • उत्तर प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • राजस्थान
    • खेल
    • मनोरंजन
    • ब्लॉग
    • साहित्य
    • पिक्चर गैलरी
    • करियर
    • बिजनेस
    • बचपन
    • वीडियो
    • NewsVoir
    Shagun News India
    Home»ब्लॉग»Current Issues

    किसानों के नाम पर विपक्ष का आडंबर

    By December 2, 2018Updated:December 2, 2018 Current Issues No Comments6 Mins Read
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp
    Post Views: 671
    डॉ दिलीप अग्निहोत्री
    इसमें संदेह नहीं कि देश में किसानों के सामने अनेक समस्याएं है। लागत के अनुरूप कृषि में मुनाफा नहीं है। लेकिन ऐसा भी नहीं कि ये समस्याएं पिछले चार वर्षों में ही पैदा हुई है। किसानों के नाम पर होने वाले प्रदर्शनों में विपक्ष इसी अंदाज में शामिल होता है। वह हाँथ बांध कर ऐसा अभिनय करते है जैसे उनके शासन में किसान बहुत खुशहाल थे। जबकि सत्ता में रहते हुए इन्होंने भी कृषि की समस्याओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया। अन्यथा समस्या इतनी जटिल नहीं होती। नरेंद्र मोदी सरकार ने किसानों की भलाई के लिए अनेक कदम उठाए है। लेकिन चार वर्ष में दशकों से चली आ रही कठिनाइयों का पूरी तरह निवारण संभव नहीं था।
    यह आश्चर्यजनक है कि किसानों के नाम पर एक दो दिन धरना प्रदर्शन होता है, फिर वहां विपक्ष के नेता हाँथ बांधे पहुंच जाते है, सरकार पर हमला बोलते है। अपने को किसान नेता के रूप में प्रदर्शित करते है, इसी के साथ धरना प्रदर्शन समाप्त हो जाता है। ऐसा लगता है जैसे इसी के लिए प्रदर्शन का आयोजन किया गया हो। यह भी रहस्य है कि किसानों को लाने उन्हें कई दिन तक रोकने का का खर्चा कौन वहन करता है।
    पिछले कुछ समय से किसान आंदोलन में किसी पटकथा के अनुरूप स्टंट भी होते है। कहीं टैंकरों से लेकर दूध सड़को पर फैलाया जाता है, कहीं आलू सब्जी सड़क पर बिखेरी जाती है। यहां भी कोई तो होता है जो टैंकरों की व्यवस्था करता है।
    लेकिन ऐसे प्रबंधक यह भूल जाते है कि भारत के कृषक और पशुपालक चाहे जितना परेशान हो, दूध सड़क पर नहीं फेंकेंगे। घर मे कुछ बूंद गिरता है तो माथे पर लगाकर क्षमा मांगते है।
    कोई अर्द्धनग्न होकर प्रदर्शन करता है, इसबार खोपड़ी, कंकाल लेकर भी लोग प्रदर्शन करने पहुंचे थे। यहाँ राम मंदिर के विरोध में बैनर लहराए गए, ऐसे प्रबंधकों को क्या पता कि भारतीय किसान श्री राम का नाम लेकर ही खेत में उतरता है।
    जाहिर है कि ये विशुद्ध किसान आंदोलन नहीं है, जिस प्रकार विपक्षी नेता यहां धमकते है, वह अपने में बहुत कुछ कह जाता है। जबकि किसानों की परेशानी के लिए ये नेता भी कम गुनाहगार नहीं है। चर्चा तो यह भी है कि इसके पीछे सैकड़ों एनजीओ की भी मिलीभगत होती है।
    कांग्रेस ने पचास वर्षों में एक बार सत्तर हजार करोड़ रुपया कर्ज क्या माफ कर दिया, उसे लगता है वह किसानों की सबसे बड़ी हमदर्द हो गई। राहुल गांधी को लगता है कि इससे किसानों की सभी समस्याओं का समाधान हो गया था। जबकि ऐसा कुछ नहीं हुआ। ऐसा लगता है कि कर्ज माफी के अलावा राहुल के पास कृषि संबन्धी कोई योजना नहीं है।
    किसानों के नाम पर एक मांग पत्र भी बनाया गया था। इसमें तेईस विषय थे। लेकिन राहुल गांधी सहित अन्य नेताओं के भाषणों में कर्ज माफ़ी तक ही सीमित रहे। किसी में कृषि संबन्धी विजन ही नहीं था। जबकि रिपोर्ट यह है कि यूपीए सरकार ने को कर्जमाफी की थी उससे कोई बदलाव नहीं हुआ। किसानों की परेशानी इससे समाप्त नहीं हो सकी।
    इसके अलावा स्वामीनाथन रिपोर्ट का राग अलापा गया। जबकि कांग्रेस की सरकार इसे आठ वर्ष तक दबाए रही थी। कांग्रेस को तो इसपर सवाल उठाने का अधिकार ही नहीं है। स्वामीनाथन की अध्यक्षता में नवंबर 2004 को राष्ट्रीय किसान आयोग बनाया गया था। कमेटी ने अक्टूबर 2006 में अपनी रिपोर्ट दे दी थी। 2014 तक कांग्रेस की सरकार रही, आज यही पार्टी पूंछ रही है कि स्वामीनाथन रिपोर्ट का क्या हुआ। इसमें तेज और संयुक्त विकास को लेकर जो सिफारिशें की गईं थी, उस पर तो मोदी सरकार ने अमल किया है।
    किसानों की रैली में नेताओं में भाषण में कोई गम्भीरता नहीं थी। राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा और कहा कि जब देश के पन्द्रह सबसे अमीरों के साढ़े तीन लाख करोड़ रुपये का कर्ज सरकार माफ कर सकती है, तो किसानों का कर्ज क्यों नहीं माफ किया जा सकता। राहुल के पास इस घिसी पिटी बात के अलावा कुछ नहीं है।
    पूंजीपतियों के कर्ज माफी पर राहुल और अरुण जेटली में से कोई एक झूठ बोल रहा है। जेटली कहते है कि किसी उद्योगपति का एक रुपया माफ नहीं किया गया। अरविंद केजरीवाल ने इस मंच से स्वामीनाथन रिपोर्ट का मुद्दा उठाया। यह निशाना कांग्रेस पर ही ज्यादा लगा। यह विपक्ष की कथित एकता थी। कहा गया कि यहां मौजूद राजनीतिक दलों के नेताओं की विचारधारा अलग हो सकती है, लेकिन किसानों और युवाओं के भविष्य पर सभी एकमत हैं। यह भी राजनीतिक पैंतरा मात्र था। जबकि मोदी सरकार किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए कई प्रकार की योजनाओं पर कार्य कर रही है। सिंचाई वाले क्षेत्र को बढ़ाया जा रहा है।
    किसान को उत्पादन लागत से कम से कम डेढ़ गुना मुनाफा का इंतजाम किया गया। यह उपाय दो हजार बाइस तक किसानों की आय दुगुना करने के सरकार के लक्ष्य को पूरा करने में सहायक होगा। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना लागू की गई। यह कम प्रीमियम पर किसानों के लिए उपलब्ध है। इस योजना से कुछ मामलो में कटाई के बाद के जोखिमों सहित फसल चक्र के सभी चरणों के लिए बीमा सुरक्षा प्रदान की जाएगी। सरकार तीन लाख रुपये तक के अल्प अवधि फसल ऋण पर तीन  प्रतिशत दर से ब्याज रियायत प्रदान करती है।
    वर्तमान में किसानों को सात  प्रतिशत प्रतिवर्ष की ब्याज दर से ऋण उपलब्ध है जिसे तुरन्त भुगतान करने पर चार  प्रतिशत तक कम कर दिया जाता है। राष्ट्रीय कृषि विपणन से राष्ट्रीय स्तर पर ई-विपणन मंच की शुरूआत हो सकेगी और ऐसा बुनियादी ढांचा तैयार होगा जिससे देश के करीब छह सौ  नियमित बाजारो ई-विपणन की सुविधा दी गई। अब तक तरह  राज्यों के करीब पांच सौ बाजारों को ई-एनएएम से जोड़ा गया है। यह नवाचार विपणन प्रक्रिया बेहतर मूल्य दिलाने, पारदर्शिता लाने और प्रतिस्पर्धा कायम करने में मदद करेगी, जिससे किसानों को अपने उत्पादो के लिए बेहतर पारिश्रमिक मिल सकेगा और एक राष्ट्र एक बाजार की दिशा में आगे बढ़ा जा सकेगा।
    सॉयल हेल्थ कार्स योजना के अंतर्गत किसान अपनी मिट्टी में उपलब्ध बड़े और छोटे पोषक तत्वों का पता लगा सकते हैं। इससे उर्वरकों का उचित प्रयोग करने और मिट्टी की उर्वरता सुधारने में मदद मिलेगी। नीम कोटिंग वाले यूरिया को बढ़ावा दिया गया है ताकि यूरिया के इस्तेमाल को नियंत्रित किया जा सके, फसल के लिए इसकी उपलब्धता बढ़ाई जा सके और उर्वरक की लागत कम की जा सके। घरेलू तौर पर निर्मित और आयातित यूरिया की संपूर्ण मात्रा अब नीम कोटिंग वाली है।
     जाहिर है कि मोदी सरकार कृषि क्षेत्र में सुधार की अनेक कारगर योजनाएं लागू की है। इनका दूरगामी प्रभाव होगा। आगामी करीब तीन वर्षों में किसानों की आमदनी दो गुनी हो सकेगी। जबकि कृषि की बदहाली के लिए जो सरकारे जिम्मेदार रही है, उसी के नेता किसानों के नाम पर आडंबर कर रहे है।

    Keep Reading

    Historic first flight from Noida International Airport (Jewar): Farmers who gave up their land became the first passengers.

    नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर) से ऐतिहासिक पहली उड़ान: जमीन देने वाले किसान बने पहले यात्री

    paper leak

    पेपर लीक : कब तक ली जाएगी युवाओं के धैर्य की परीक्षा?

    A weeping Great Nicobar and a smiling 'Ego'!

    रोता हुआ ग्रेट निकोबार और मुस्कुराता हुआ अहम्!

    US attack off the Oman coast and diplomatic surrender: Is India's strategic autonomy merely a facade?

    ओमान तट पर अमेरिकी हमला और कूटनीतिक आत्मसमर्पण: क्या भारत की रणनीतिक स्वायत्तता एक छलावा मात्र है?

    Many writers are caught in a labyrinth of duties!

    कर्त्तव्यों के चक्रव्यूह में घिरे हैं कई कलमकार!

    Do not play vote-bank politics at the cost of internal security.

    आंतरिक सुरक्षा की कीमत पर वोटों की राजनीति न करें

    Add A Comment
    Leave A Reply Cancel Reply

    Advertisment
    Google AD
    We Are Here –
    • Facebook
    • Twitter
    • YouTube
    • LinkedIn

    EMAIL SUBSCRIPTIONS

    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading
    About



    ShagunNewsIndia.com is your all in one News website offering the latest happenings in UP.

    Editors: Upendra Rai & Neetu Singh

    Contact us: editshagun@gmail.com

    Facebook X (Twitter) LinkedIn WhatsApp
    Popular Posts
    Historic first flight from Noida International Airport (Jewar): Farmers who gave up their land became the first passengers.

    नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर) से ऐतिहासिक पहली उड़ान: जमीन देने वाले किसान बने पहले यात्री

    June 15, 2026
    A Unique Campaign for Yoga Awareness: Vehicle Rally Held in Ashiana

    योग जागरुकता की अनोखी मुहिम, आशियाना में निकली वाहन रैली

    June 15, 2026
    Tragic incident in Shikohabad: Man shoots cancer-stricken wife, then kills himself.

    शिकोहाबाद में दर्दनाक घटना: कैंसर पीड़ित पत्नी को गोली मारी, फिर खुद को भी उड़ाया

    June 15, 2026
    The bitter truth about health insurance: No money during illness, just hassle.

    हेल्थ इंश्योरेंस का कड़वा सच: बीमारी में भी पैसा नहीं, बस परेशानी

    June 15, 2026
    paper leak

    पेपर लीक : कब तक ली जाएगी युवाओं के धैर्य की परीक्षा?

    June 15, 2026

    Subscribe Newsletter

    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading
    Privacy Policy | About Us | Contact Us | Terms & Conditions | Disclaimer

    © 2026 ShagunNewsIndia.com | Designed & Developed by Krishna Maurya

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.

    Newsletter
    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading