Close Menu
Shagun News India
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Saturday, August 29
    Shagun News IndiaShagun News India
    Subscribe
    • होम
    • इंडिया
    • उत्तर प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • राजस्थान
    • खेल
    • मनोरंजन
    • ब्लॉग
    • साहित्य
    • पिक्चर गैलरी
    • करियर
    • बिजनेस
    • बचपन
    • वीडियो
    • NewsVoir
    Shagun News India
    Home»ब्लॉग»Current Issues

    चीन का बढ़ता एकाधिकार

    By December 10, 2018 Current Issues 1 Comment4 Mins Read
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp
    file photo
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp
    Post Views: 625

    पंकज चतुर्वेदी

    पिछले कुछ महीनों के दौरान कागज के दाम अचानक ही आसमान को छू रहे हैं, किताबों छापने में काम आने वाले मेपलीथों के 70 जीएसएम कागज के रिम की कीमत हर सप्ताह बढ़ रही है। इसका सीधा असर पुस्तकों पर पड़ रहा है। भारत में मुदण्रउद्योग दुनिया की सबसे तेज बढ़ रहे व्यापार में गिना जाता है। हो भी क्यों न-हमारे यहां साक्षरता दर बढ़ रही है, उच्च शिक्षा के लिए नामांकन आंचलिक क्षेत्र तक उत्साहजनक हैं। फिर दैनिक उपभोग के उत्पादों के बाजार में भी प्रगति है। इसलिए पैकेजिंग इंडस्ट्री में भी कागज की मांग बढ़ रही है।

    गंभीरता से देखें तो पाएंगे कि चीन एक सुनियोजित चाल के तहत दुनिया के कागज के कारोबार पर एकाधिकार करने की फिराक में है। जाहिर है कि इसका असर भारत में ज्ञान-दुनिया पर भी पड़ रहा है।
    भारत में 20.37 मिलियन टन कागज की मांग है, जो 2020 तक 25 मिलियन टन होने की संभावना है। मुदण्र में कागज की मांग की वृद्धि दर 4.2 प्रतिशत सालाना है, तो पैकेजिंग में 8.9 फीसद। लगभग 4500 करोड़ सालाना के कागज बाजार की मांग पूरी करने के लिए कहने को तो 600 कागज कारखाने हैं, लेकिन असल में मांग पूरी करने के काबिल बड़े कारखाने महज 12 ही हैं। वे भी एनसीईआरटी जैसे बड़े पेपर खपतकर्ता की मांग पूरी नहीं कर पाते।

    अनुमान है कि पाठ्य पुस्तकें छापने वाले एनसीईआरटी को हर साल 20 हजार मीट्रिक टन कागज की जरूरत होती है। कोई भी कारखाना यह जरूरत एकमुश्त पूरी नहीं कर पाता। असम में संचालित एकमात्र सरकारी कारखाने हिंदुस्तान पेपर लिमिटेड को सरकार ने पिछले साल ही बंद कर दिया। अब सारा दारोमदार निजी उत्पादकों पर है। जान लें कि दुनिया में सर्वाधिक कागज बनाने वाले तीन देश हैं-चीन, अमेरिका और जापान। तीनों दुनिया की सालाना मांग 400 मिलियन टन का लगभग आधा कागज उत्पादन करते हैं। चूंकि हमारे कारखाने छोटे हैं, और उनकी उत्पादन कीमत ज्यादा आती है, इसलिए गत एक दशक के दौरान चीन के कागज ने वैसे ही हमारे बाजार पर कब्जा कर रखा है।

    सभी जानते हैं कि भारत के कागज कारखाने पेड़ के तने और बांस से निर्मित पल्प या लुगदी की कच्ची सामग्री से कागज बनाते रहे हैं। जंगल कम होते जाने से पल्प का संकट खड़ा हुआ तो रिसाइकिल पेपर की बात सामने आई। विडंबना है कि हमारे कई कारखाने अपनी तकनीक को पुराने रद्दी पेपर से तैयार लुगदी से कागज बनाने में परिवर्तित नहीं कर पा रहे हैं। वहीं पल्प की कमी के चलते स्थानीय उत्पाद के कागज के दाम ज्यादा आ रहे हैं। यहां जानना जरूरी है कि क्रॉफ्ट पेपर, बोर्ड, पोस्टर जैसे उत्पाद पैकेजिंग उद्योग में काम आते हैं। चूंकि पैकेजिंग में प्लास्टिक के इस्तेमाल पर अब सख्ती हो रही है, इसलिए कागज की पैकेजिंग इंडस्ट्री दिन-दुगनी, रात चैगुनी प्रगति कर रही है। चूंकि इस तरह की पैकेजिंग में महंगे, खाने आदि के सामान पैक होते हैं, इसलिए इसमें कागज की क्वालिटी का ध्यान रखा जाता है।

    वहीं पुस्तक या अखबार छापने में अधिकांश इस्तेमाल मैपलिथो या पेपर प्रिंट के लिए रिसाइकिल से काम चल जाता है। क्रीम वाव, कॉपियर और आर्ट पेपर के लिए बेहतर कच्चे माल की जरूरत होती है। अब जंगल कटाई पर रोक और पेपर मिलों के लिए बांस की सीमित सप्लाई के चलते बेहतर कागज का पूरा बाजार चीन के हाथों में जा रहा है। पहले तो चीन पेपर पल्प के लिए पेड़ों और रद्दी कागज के रिसाइकिल का उत्पादन स्वयं कर रहा था, लेकिन अब उनके यहां भी जंगल कम होने का पर्यावरणीय संकट और कागज रिसाइकिल करने की बढ़ती मांग और उससे उपजे जल प्रदूषण का संकट गंभीर हो रहा है, इसलिए चीन ने सारी दुनिया से पल्प मनमाने दाम पर खरीदना शुरू कर दिया।

    भारत से भी बेकार कागज, उसका पल्प पर चीन की नजर है। इसी के चलते हमारे यहां कागज का संकट गहरा रहा है। भारत में भी महंगाई, अवमूल्यन और प्रतिकूल सांस्कृतिक-सामाजिक-बौद्धिक परिस्थितियों के बावजूद पुस्तक प्रकाशन क्रांतिकारी दौर से गुजर रहा है। पिछले पांच वर्षो से कागज की खपत लगभग 6 प्रतिशत वार्षिक की दर से बढ़ रही है। लेकिन बढ़ते पर्यावरणीय संकट के चलते इसके विकास में विराम की प्रबल संभावना है। जरूरत है कि पल्प के आयात पर पूरी तरह रोक लगे, रद्दी कागज के आयात पर शुल्क समाप्त हो और कागज के प्रत्येक कारखाने को अपने स्तर पर रिसाइकिल पल्प बनाने की आधुनिकतम मशीनें लगाने के लिए सहयोग मिले। चीन ने कागज उद्योग के माध्यम से हमारी पठन-अभिरुचि पर नियंतण्रकिया तो हमारी बौद्धिक संपदा के विस्तार पा रहे अभियान को नुकसान होगा।

    Keep Reading

    रक्षाबंधन: परंपरा, पहचान और बाजारवाद का संगम

    Trump Trapped in a Labyrinth: US President's Mounting Difficulties Amid the Maze of an Iran War

    चक्रव्यूह में फंसे ट्रंप: ईरान युद्ध की भूलभुलैया में अमेरिकी राष्ट्रपति की बढ़ती मुश्किलें

    Maa Khaira Bhavani had appeared in the form of a divine beam of light.

    ज्योति पुंज के रूप में प्रकट हुईं थीं माँ खैरा भवानी

    People grappling with the unending problem of adulteration.

    मिलावट की अंतहीन समस्या से झूझते लोग

    India's Golden Burst at the Commonwealth Games: Boxing Makes History, Neeraj Shines Again

    कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत का स्वर्णिम धमाका: मुक्केबाजी ने रचा इतिहास, नीरज ने फिर कमाल दिखाया

    India's Glorious Performance: Historic 'Golden Double' and Silver in Judo; Lovpreet Wins Silver in Weightlifting

    भारत का गौरवमयी प्रदर्शन: जूडो में ऐतिहासिक ‘गोल्डन डबल’ और सिल्वर, वेटलिफ्टिंग में लवप्रीत का सिल्वर

    1 Comment

    1. A Few Ideas To Help Sell Your house Faster on March 12, 2020 6:30 pm

      It’s really a cool and helpful piece of info.

      I’m satisfied that you shared this helpful info with us.
      Please stay us informed like this. Thank you for sharing.

      Reply
    Leave A Reply Cancel Reply

    Advertisment
    Google AD
    We Are Here –
    • Facebook
    • Twitter
    • YouTube
    • LinkedIn

    EMAIL SUBSCRIPTIONS

    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading
    About



    ShagunNewsIndia.com is your all in one News website offering the latest happenings in UP.

    Editors: Upendra Rai & Neetu Singh

    Contact us: editshagun@gmail.com

    Facebook X (Twitter) LinkedIn WhatsApp
    Popular Posts
    Soulful bhajan ‘Aan Baso Mere Man Darpan Mein’ released on Janmashtami.

    जन्माष्टमी पर रिलीज हुआ भावपूर्ण भजन ‘आन बसो मेरे मन दर्पण में’

    August 26, 2026
    Shopping just got even more stylish! Sara Ali Khan launches Shoppers Stop's new credit cards.

    शॉपिंग अब और भी स्टाइलिश! सारा अली खान ने लॉन्च किए शॉपर्स स्टॉप के नए क्रेडिट कार्ड

    August 26, 2026
    Azim Premji Foundation to provide scholarships to 20,000 female students in Delhi.

    अज़ीम प्रेमजी फ़ाउंडेशन दिल्ली में 20,000 छात्राओं को देगा स्कॉलरशिप

    August 26, 2026
    Women sanitation workers tied Rakhis to the Urban Development Minister.

    स्वच्छताकर्मी महिलाओं ने नगर विकास मंत्री को बांधी राखी

    August 26, 2026

    रक्षाबंधन: परंपरा, पहचान और बाजारवाद का संगम

    August 26, 2026

    Subscribe Newsletter

    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading
    Privacy Policy | About Us | Contact Us | Terms & Conditions | Disclaimer

    © 2026 ShagunNewsIndia.com | Designed & Developed by Krishna Maurya

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.

    Newsletter
    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading