वैसे देखा जाये तो किसी भी राजनीतिक दल के लिए सत्ता में आने के बाद अपने चुनाव पूर्व किए गए वादे निभाना अच्छी बात है। पार्टियों को जनता से किए हर वादे निभाने ही चाहिए। आमतौर पर देखा गया है कि राजनीति दल चुनाव के दौरान जनता से जितने वादे करते हैं, उनमें से ज्यादातर बाद में झूठ ही साबित होते हैं और जनता ठगी रह जाती है।
चिंता की बात तब होती है जब उनके द्वारा चुनाव जीतने के मकसद से जनता के एक वर्ग विशेष से कुछ ऐसे वादे भी कर लिए जाते हैं जो चुनाव जिताओ तो साबित होते हैं लेकिन बाद में उनका दुष्प्रभाव देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। राजनीतिक दलों का चुनाव के दौरान किसानों की कर्ज माफी का वादा भी कुछ इसी तरह का चुनाव जीतने का एक राजनीतिक हथियार बनता जा रहा है।
चुनावी वादा निभाने के इसी क्रम में मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस सरकारों ने सत्ता में आते ही अपने राज्य के किसानों के कर्ज माफ करने की घोषणा कर दी है। राजस्थान की कांग्रेस सरकार ने भी इस दिशा में काम शुरू कर दिया माना जा रहा है कि इन तीनों राज्यों में कांग्रेस की जीत में किसानों की कर्ज माफी के वादे ने अहम भूमिका निभाई थी अब तो यह भी सुनने में आ रहा है कि भारतीय जनता पार्टी शासित राज्य भी अब इस और में शामिल हो सकते हैं।
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी कह रहे हैं कि अब केंद्र सरकार को भी देशभर के किसानों का कर्ज माफ करने के लिए मजबूर कर देंगे। यह सही है कि किसानों का कर्ज माफ हो जाने से उन्हें थोड़ी राहत तो मिलती है लेकिन इसे उनके लिए ये फौरी तौर पर ही कही जाएगी। उनकी समस्याओं का स्थाई समाधान नहीं देखा जाए तो यह कर्ज माफी तो जाने कितनी बार होती रही है लेकिन फिर भी आज किसानों की हालत चिंताजनक बनी है।

बता दें कि केंद्र की मनमोहन सरकार ने भी किसानों के कर्ज माफ किए थे, पिछले 4 सालों में ही आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु,तेलंगाना. उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, पंजाब, राजस्थान और केरल ने अपने यहां किसानों के कर्ज माफ किए हैं लेकिन बैंकों से कर्ज लेने वाले किसानों की संख्या आधे से भी कम है। बैंकों से कर्ज लेने वाले किसान 46.2 फ़ीसदी ही हैं बाकी किसान अन्य स्रोतों से कर लेते हैं ।
वैसे भी राज्यों को केवल सहकारी बैंकों के कर्ज माफ करने का अधिकार होता है राष्ट्रीय कृत बैंकों के कर्ज माफ करने के लिए केंद्र से मदद और बजट प्रावधान जैसे उपायों की जरूरत होती है। इस तरह बाकी किसानों की कर्ज माफी आधार में ही रहती है यह कर्ज माफी राज्य और देश की अर्थव्यवस्था पर विपरीत प्रभाव डालती है। इसे अन्य योजनाएं भी प्रभावित होती हैं इसलिए आप कर्ज माफी की राजनीत से बचने की जरूरत है और ऐसी नीतियां बनाई जानी चाहिए ताकि किसान के कर्ज जाल में फंसे हीना और उसकी जिंदगी वाकई खुशहाल हो सके।







