स्टेट बैंक ऑफ इण्डिया की याचिका पर प्रयागराज पावर जरनेशन कम्पनी का मालिकाना हक टाटा पावर के स्वामित्व वाली कम्पनी को दिलाने के लिये आयोग में अन्तिम सुनवाई सम्पन्न आयोग ने फैसला किया सुरक्षित
बिजली दरों में कमी कराने को लेकर उपभोक्ता परिषद दिए जोरदार तर्क
लखनऊ, 25 मार्च 2019: हाई प्रोफाइल जेपी एसोसिएट के प्रयागराज पावर जनरेशन कम्पनी का मालिकाना हक टाटा पावर की पूर्ण स्वामित्व वाली कम्पनी रेनासेन्ट पावर बेन्चर प्रालि व अन्य को दिलाने को लेकर स्टेट बैंक ऑफ इण्डिया की ओर से विद्युत नियामक आयोग में दाखिल याचिका पर आज अन्तिम सुनवाई आयोग अध्यक्ष आरपी सिंह सदस्यगण एसके अग्रवाल व केके शर्मा की उपस्थिति में सुबह 11ः30 बजे शुरू होकर लगभग 2 घण्टे तक चली। जिसमें पावर कार्पोरेशन की तरफ से प्रदेश के महाधिवक्ता राघवेन्द्र सिंह स्टेट बैंक की तरफ से उच्चतम न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता रामजी श्रीनिवासन, रेनासेन्ट पावर की तरफ से उच्चतम न्यायालय के अधिवक्ता हेमन्त सहाय सहित दर्जनों अधिवक्ता व कम्पनियों के उच्चाधिकारी सहित पावर कार्पोरेशन के निदेशक कार्पोरेट प्लानिंग व अनेकों उच्चाधिकारी उपस्थित थे।
जोरदार बहस के बीच जहां सभी पक्षों के अधिवक्ताओं ने अपनी बात विस्तार पूर्वक रखी, वहीं प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं की तरफ से उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने स्वयं बिजली दरों में कमी करने के लिये मोर्चा सम्भाला। यह पहली बार था जब विद्युत नियामक आयोग ने उपभोक्ता हितों में दरों में कमी कराने के लिये काफी तल्ख सवाल दागे और लगातार यह मुद्दा उठा कि सीधे तौर पर टाटा पावर की स्वामित्व वाली कम्पनी दरों में कितना कमी कर रही है यह बताये।
बता दें कि जहां टाटा पावर के स्वामित्व वाली कम्पनी ने अनेकों तर्क देते हुए दरों में कमी करने से इंकार किया। वहीं पावर कार्पोरेशन भी कम्पनी के साथ खड़ा दिखा। नियामक आयोग ने रिनासेन्ट पावर कम्पनी को अन्तिम काउन्टर आफर आयोग में अविलम्ब देने को कहा और निर्णय सुरक्षित कर लिया। उम्मीद की जा रही है इसी सप्ताह के अन्त तक निर्णय आने की संभावना है।
प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं की तरफ से उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व विश्व ऊर्जा कौंसिल के स्थाई सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने आयोग के समक्ष आयोग के सामने यह मुद्दा उठाया कि चुंकि जय प्रकाश एसोसिएट द्वारा प्रयागराज पावर जनरेशन कम्पनी 1980 मेगावाट जो लगभग 14500 करोड़ में तैयार हुई थी की लेबलाइज टैरिफ रू0 3।02 प्रतियूनिट है और बिडिंग रूट के इस प्रोजेक्ट की दर को विद्युत नियामक आयोग ने विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा 63 के तहत टैरिफ एडाप्ट किया था। अब जब स्टेट बैंक आफ इण्डिया द्वारा पूरे प्रोजेक्ट को टाटा पावर के स्वामित्व वाली कम्पनी को लगभग रू0 6000 करोड़ में मालिकाना हक दिलाया जा रहा है और हेयर कट आफ नीति के तहत लगभग 5000 करोड़ को कम कर रहा है जो जनता का पैसा है। ऐसे में इस कमी का लाभ प्रदेश के उपभोक्ताओं को दिया जाना चाहिए। यहां पर बीडिंग रूट के तहत आयोग द्वारा अनुमोदित वित्तीय पैरामीटर में बदलाव हो रहा है इसलिये कमी करने में कोई विधिक अड़चन नहीं आयेगी।
रेनासेन्ट पावर सहित अन्य कम्पनियां जब प्रयागराज को अधिग्रहण कर रहीं हैं ऐसे में यह देखा जाना आवश्यक है कि प्रयागराज कम्पनी का पूरा बैंक का ऋण जो पहले 11086 करोड़ था जो वर्तमान में लगभग 10 हजार करोड़ के करीब है और प्रोजेक्ट पूरी तरह चलती हालत में है और अब मात्र 6000 करोड़ में टाटा पावर के स्वामित्व वाली कम्पनी को ट्रांसफर होना है। आज रात के आंकड़े बता रहे हैं कि प्रयागराज कम्पनी पूरी तरह चालू हालत में है और आज लगभग 800 मेगावाट बिजली कार्पोरेशन को दी है। ऐसे में जो भी हेयर कट आफ (कमी) स्टेट बैंक आफ इण्डिया कर रही है। उसका पूरा लाभ प्रदेश के उपभोक्ताओं को देने के लिये दरों में कमी की जाये और कम्पनी द्वारा जो अतिरिक्त खर्च किये जाने की बात की जा रही है, उसका एक कमेटी बनाकर प्रूडेन्स चेक करा लिया जाये। आयोग दरों के मामले एक उचित स्वतंत्र संस्था है वह दरों में कमी करने पर विचार करे।







