डॉ दिलीप अग्निहोत्री
इसमें कोई संदेह नहीं कि सीमा पर सैनिक मोर्चा लेते है, एयर या सर्जिकल स्ट्राइक भी जवान ही करते है, वैज्ञानिक अनुसंधान, अविष्कार वैज्ञानिक करते है, लेकिन प्रजातांत्रिक देशों में यह सब राजनीतिक इच्छाशक्ति से ही संभव होता है। पैसठ के युद्ध में पाकिस्तान को सबक सिखाने का निर्णय तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने लिया था। इसके बाद सेना ने अपना पराक्रम दिखाया। उन्नीस सौ इकहत्तर के युद्ध में भी भारत विजयी रहा। प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी थी, उन्हें भारत रत्न मिला। प्रथम परमाणु परीक्षण के बाद प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और दूसरे पर परीक्षण के समय प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई पोखरण गए थे। यह यात्रा अपने वैज्ञानिकों का गौरव बढ़ाने और उन्हें सम्मान देने के लिए थी। अभी हुए ऐन्टी मिसाइल सेटलाइट परीक्षण को भी वैज्ञानिकों ने परमाणु परीक्षण की तरह महत्वपूर्ण माना है।इस उपलब्धि से भारत चार शीर्ष देशों की सूची में शामिल हुआ। ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का समाचार चैनलों के माध्यम से वैज्ञानिकों को बधाई देना सर्वथा उचित था। प्रधानमंत्री का पूरा संबोद्धन राष्ट्रीय गौरव और वैज्ञानिकों की प्रतिभा,मेहनत,सफलता के प्रति समर्पित था। यह देश के वैज्ञानिकों की बड़ी सफलता थी। तीन मिनट में मिसाइल ने लियो सेटेलाईट को मार गिराया। यह परमाणु परीक्षण की तरह ही ऐतिहासिक सामरिक सफलता है। अमेरिका, रूस और चीन के पास ही यह क्षमता है। भारत चौथी महाशक्ति बन कर उभरा है। प्रधानमंत्री मोदी ने साफ कर दिया कि भारत ने केवल रक्षा के लिए किया, हम अंतरिक्ष शांति के समर्थक, युद्ध के नहीं। परंपरा के अनुसार वर्तमान सरकार ने इस क्षमता को हासिल करने की अनुमति दी थी। वैज्ञानिकों ने यह कर दिखाया।

कांग्रेस प्रवक्ता ने इसका श्रेय इसरो, जवाहर लाल नेहरू और इंदिरा गांधी को दिया। उनके अनुसार भारतीय स्पेस कार्यक्रम की स्थापना उन्नीस सौ इकसठ में पंडित जवाहर लाल नेहरू ने की थी और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान की स्थापना श्रीमती इंदिरा गांधी के कार्यकाल में हुई थी। गौरतलब है कि कांग्रेस प्रवक्ता ने दस वर्ष के यूपीए सरकार की चर्चा की चर्चा नहीं की। कांग्रेस अध्यक्ष के लिए यह विषय मजाक और तंज का है। उन्होंने डीआरडीओ के कार्य की प्रशंसा की। यहां तक बात सही थी, लेकिन वह आगे बोले कि मैं प्रधानमंत्री को विश्व रंगमंच की बधाई देना चाहता हूं। राहुल का तंज प्रधानमंत्री के संबोद्धन पर था।
विपक्ष के इन हमलों का माकूल जबाब वित्त मंत्री अरुण जेटली ने दिया। हमारे वैज्ञानिक बहुत पहले से इस कार्य को करने की इच्छा कर रहे थे। उनके पास ऐसा कर दिखाने की क्षमता भी थी। लेकिन पूर्ववर्ती सरकार इसकी अनुमति नहीं दे रही थी। यह अनुमति वर्तमान सरकार ने दी। यह बात डीआरडीओ प्रमुख सतीश रेड्डी ने कही है। उनके अनुसार दो वर्ष पहले भारत सरकार ने इसकी अनुमति दी थी। डीआरडीओ प्रमुख के इस बयान को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
नीति आयोग के सदस्य व डीआरडीओ के पूर्व महानिदेशक वी के सारस्वत ने इसे अधिक स्पष्ट तरीके से कहा। उनका कहना है कि इस परीक्षण के संबन्ध में तत्कालीन सरकार के संबंधित मंत्रियों व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार से अनुमति हेतु कहा गया था। लेकिन यह मंजूरी नहीं मिली। जाहिर है कि भारत के वैज्ञानिक पहले भी सक्षम थे, लेकिन वह अनुमति मिलने के बाद ही कमाल दिखा सके। अब यह राष्ट्रीय गौरव का विषय है।







