बधाइया गीत:
कहाँ गयो राजा, घर चले आवो।
सासू जी मागिं रहीं चरुवा धराई,
न नेगु कम ल्याहैं इनका समझावो।
कहाँ गयो राजा, घर चले आवो।
जीजी जी मांगि रही़ पिपरी पिसाई।
न नेगु कम ल्याहैं इनका समझावो।
कहाँ गयो राजा, घर चले आवो।
नन्दी जी माँगि रहीं छठिया धराई।
न नेगु कम ल्याहैं इनका समझावो।
कहाँ गयो राजा, घर चले आवो।
देवरा जी माँगि रहें वंशी बजाई।
न नेगु कम ल्याहैं इनका समझावो।
कहाँ गयो राजा, घर चले आवो।
सखिया हैं माँगि रहीं सोहर गवाई।
न नेगु कम ल्या हैं इनका समझावो।
कहाँ गयो राजा, घर चले आवो।
हमरे घरै तो बिटिया है आयी
अब का देई इनका तुमही बतावो।
कहाँ गयो राजा, घर चले आवो।
राजा संदेश दिहिनि अपनी धना का,
जेतना लुटाय सको उतना लुटावो।
कहाँ गयो राजा, घर चले आवो।
– इन्द्रेश भदौरिया, रायबरेली







