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    वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने में सहायक बनते 21वीं सदी के संग्रहालय

    By May 17, 2019 Featured 6 Comments7 Mins Read
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    अन्तर्राष्ट्रीय संग्रहालय दिवस (18 मई)

    प्रदीप कुमार सिंह

    संग्रहालय में मानव और पर्यावरण की विरासतों के संरक्षण के लिए उनका संग्रह, शोध, प्रचार या प्रदर्शन किया जाता है जिसका उपयोग शिक्षा, अध्ययन और सार्थक ज्ञानारंजन के लिए होता है। संपूर्ण विश्व में प्रत्येक वर्ष 18 मई को ‘अन्तर्राष्ट्रीय संग्रहालय दिवस’ मनाया जाता हैं। अन्तर्राष्ट्रीय संग्रहालय दिवस 2019 का मुख्य विषय है – ‘‘सांस्कृतिक केन्द्र के रूप में संग्रहालय : परम्परा का भविष्य।’’ विश्व शान्ति की सबसे बड़ी संस्था संयुक्त राष्ट्र संघ ने मानव जाति के हित में संग्रहालयों की विशेषता और उनके महत्व को समझते हुए 18 मई 1983 को प्रतिवर्ष ‘अंतर्राष्ट्रीय संग्रहालय दिवस’ के रूप में मनाने का निर्णय लिया था। अंतर्राष्ट्रीय संग्रहालय परिषद् या इंटरनेशनल काउंसिल ऑफ म्यूजियम (आईसीओएम) संग्रहालयों का अत्यन्त ही समाजोपयोगी अंतर्राष्ट्रीय संगठन है, जो कि प्राकृतिक, सांस्कृतिक विरासत, वर्तमान, भविष्य, मूर्त और अमूर्त के प्रचार और संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है।

    विश्व की विभिन्न संस्कृतियों, सभ्यताओं एवं परम्पराओं और ज्ञान-विज्ञान को बढ़ावा देने के लिए आईसीओएम की प्रतिबद्धता अपनी 31 अंतर्राष्ट्रीय समितियों के माध्यम से मानव जाति के कल्याण के लिए समर्पित हैं। अंतर्राष्ट्रीय समितियाँ अपने सम्बन्धित क्षेत्रों में संग्रहालय समुदाय के लाभ के लिए उन्नत शोध करते हैं तथा प्राचीन सांस्कृतिक धरोहरों की अंतर्राष्ट्रीय स्तर की अवैध तस्करी से लड़ने, आपातकालीन स्थितियों में संग्रहालयों की सहायता करने और अन्य कार्यकलापों में भी व्यापक रूप से शामिल हैं। संगठन द्वारा विश्व स्तर पर यह निर्णय लिया गया कि वह प्रत्येक वर्ष एक नए मुख्य विषय का चयन करेंगे जिससे आम जनता को संग्रहालय विशेषज्ञों से मिलने के लिए प्रेरित किया जायेगा ताकि आम जनता भी संग्रहालयों की चुनौतियों तथा महत्व को गहराई से समझकर लाभान्वित हो सके।

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    इस महान दिवस को मनाने का उद्देश्य गुफाओं से प्रारम्भ हुई मानव सभ्यता काल से वर्तमान डिजीटल युग तक की यात्रा के चिन्हों को एक स्थान पर संग्रहित करना और लोगों में संग्रहालयों के प्रति जागरूकता फैलाना और उन्हें संग्रहालयों में जाकर अपने इतिहास को जानने के प्रति जागरूक बनाना है। वर्तमान वैज्ञानिक उपलब्धियों विशेषकर कम्प्यूटर तथा इण्टरनेट क्रान्ति ने संग्रहालयों को और अधिक सर्वसुलभ, अधिक आकर्षक, अधिक अनुभववर्धक तथा

    अधिक ज्ञानवर्धक बना दिया है। संसार के किसी भी कोने से हम विश्व के प्रसिद्ध तथा उच्च कोटि के संग्रहालयों से ऑन लाइन बड़ी ही आसानी से जुड़कर उपयोगी आदान-प्रदान कर सकते हैं।

    संग्रहालय में ऐसी विभिन्न कृतियाँ एवं वस्तुओं को संग्रहित कर सुरक्षित रखा जाता है जोकि मानव सभ्यता की विकास यात्रा को दर्शाते हैं। संग्रहालय में रखी दुर्लभ वस्तुएें मानव समाज की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर तथा प्रकृति को प्रदर्शित करती है। वर्तमान युग में ओझल होती सांस्कृतिक परम्पराओं तथा सभ्यताओं को जानने का सबसे अच्छा एवं एकमात्र स्रोत संग्रहालय ही हैं जहाँ पारम्परिक और सांस्कृतिक दुर्लभ वस्तुओं को बड़ी ही सुरक्षा एवं सावधानी से संभाल के रखा जाता है। साथ ही संग्रहालयों में किताबें, पाण्डुलिपियाँ, रत्न, चित्र,शिलाचित्र और अन्य महत्वपूर्ण सांस्कृतिक धरोहरों को टूटने-फूटने तथा नष्ट होने से बचाने के लिए रसायनों तथा विशेष सुरक्षित तापमान का प्रबन्ध किया जाता है।

    विश्व के विभिन्न देश संग्रहालय की पारम्परिक और सांस्कृतिक दुर्लभ वस्तुओं को मानव जाति की अनमोल धरोहर की तरह सजाकर रखते हैं। यह सत्य है कि विश्व के प्रत्येक जीव को तथा किसी भी महान व्यक्ति को एक न एक दिन संसार से शरीर छोड़कर जाना पड़ता है, लेकिन वे शिलालेखों, पुस्तकों आदि में लिपिबद्ध विचारों के माध्यम से समाज में आदर्श जीवन की प्रेरणा के रूप में सदैव जीवित रहते हैं। विश्व की अनेक महान हस्तियों के विचारों ने व्यापक विचारधारा का रूप धारण करके मानव जाति को लोकतंत्र का सर्वहितकारी उपहार दिया है। लोकतंत्र का यह उपहार मानव जाति को सारे विश्व को लोकतांत्रिक ढंग से चलाने के लिए एक न्यायपूर्ण विश्व व्यवस्था बनाने के लिए प्रेरित करता है।

    हम अपने महान पूर्वजों के सदैव ऋणी रहेंगे जिन्होंने अपने-अपने युग की दुर्लभ वस्तुओं को बड़े ही सुन्दर तरीके से संजोकर रखा, जिससे कि हम भी उनके बारे में जानकर मानव सभ्यता को अन्तिम मंजिल विश्व एकता तथा विश्व शान्ति की ओर आगे बढ़ा सकें। ऐसी कई अनमोल चीजें हैं,जो हमारे पूर्वज तो हमारे लिए छोड़कर गए, लेकिन उसे नुकसान ना पहुंचे, इसके लिए संग्रहालयों के निर्माण की आवश्कता का जन्म हुआ। विभिन्न देशों ने अपनी समर्थ के अनुसार अनेक संग्रहालयों का निर्माण कर लिया, जो हमें विभिन्न संस्कृतियों, सभ्यताओं एव परम्पराओं और ज्ञान-विज्ञान की जानकारियों को एक स्थान पर उपलब्ध कराते हैं।

    संग्रहालय किसी राष्ट्र की गौरव एवं स्वाभिमान को भी प्रदर्शित करता है। जब हम किसी संग्रहालय की रचना करते हैं तो उसके पीछे का महान उद्देश्य यह होता है कि लोगों को उस युग में ले जाओ जहां से उन्हें इतिहास का व्यापक रूप से दर्शन हो सके। संग्रहालय हमें तब के मानव समाज के विविध पक्षों जैसे विज्ञान, धर्म-अध्यात्म, समाज, रहन-सहन, खान-पान, भाषा, कला, साहित्य, राजनीति, अर्थ, विज्ञान आदि से परिचय कराता है। संग्रहालय विश्वव्यापी, कलात्मक तथा वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने में भी सहायक हैं।

    वर्तमान वैज्ञानिक उपलब्धियों विशेषकर कम्प्यूटर तथा इण्टरनेट क्रान्ति के पूर्व तक विश्व भर के संग्रहालय मात्र एक पुस्तकालय की भूमिका निभाने तक सीमित थे जिसमें सिर्फ कुछ पांडुलिपियां, शिलालेख थे जिसे इंसान देखते और पढ़ते थे। आज विश्व के अनेक प्रसिद्ध संग्रहालय अन्तर्राष्ट्रीय रंगमंच के रूप में विकसित हो गए हैं, जहां लोग स्थिर चीजों को सिर्फ देखते ही नहीं उन्हें अनुभव करके जीते भी हैं। विश्व के आधुनिक संग्रहालय दुर्लभ पुस्तकों, सूचनाओं, चित्रों, वीडियो तथा जानकारियों को डाउनलोड करने की सुविधायें भी उपलब्ध कराते हैं। विश्व में अमेरिका, यूरोपियन और पूर्वी एशियाई देश जैसे चीन, जापान और उत्तर कोरिया आदि संग्रहालयों को सुरक्षित रखने में एक बड़ी धनराशि का निवेश करते हैं ताकि उनके प्रत्येक देशवासी अपने महान पूर्वजों के उपलब्धियों के बारे में जानकर गर्व तथा स्वाभिमान महसूस कर सकें। साथ ही उनके द्वारा खोजी गई उपलब्धियों से सारगर्भित अनुभव लेकर जीवन की उज्जवल राह पर आगे और आगे बढ़ सके।

    भारत में भी संग्रहालयों के संरक्षण तथा महत्व को जन सामान्य में उजागर करने के लिए विभिन्न प्रकार के ज्ञानवर्धक तथा प्रेरणादायी कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इन कार्यक्रमों का मुख्य उद्देश्य आम जनता, छात्रों एवं शोधार्थियों को विभिन्न संग्रहालयों में उपलब्ध समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की जानकारी देना है। ‘भारत सरकार’ द्वारा 18 मई के दिन देश भर के सभी संग्रहालयों में सभी देशवासियों के लिए प्रवेश निःशुल्क कर दिया जाता है। ‘भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग’ के अन्तर्गत देश भर में लगभग 40 से अधिक संग्रहालय हैं। भारतीय संग्रहालय भारत का सर्वश्रेष्ठ संग्रहालय है। इसमें प्राचीन वस्तुओं, युद्धसामग्री, गहने, कंकाल, ममी, जीवाश्म, तथा मुगल चित्र आदि का दुर्लभ संग्रह है। यह एशिया का सबसे पुराना और भारत का सबसे बड़ा संग्रहालय है।

    भारत की संस्कृति बहुआयामी है। भारत के रीति-रिवाज, भाषाएँ, प्रथाएँ और परम्पराएँ इसके एक-दूसरे से परस्पर संबंधों में महान विविधताओं का एक अद्वितीय उदाहरण देती हैं। हमें विश्व के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश होने का गौरव प्राप्त है। 26 जनवरी, 1950 भारतीय इतिहास में इसलिये महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि विश्व का सबसे अनूठा भारत का संविधान, इसी दिन अस्तित्व में आया और भारत एक संप्रभु देश बना।

    मुगलों तथा अंग्रेजों ने अनेक वर्षों हमारे देश पर चालाकी तथा क्रूरता से राज किया। मातृभूमि के सम्मान एवं उसकी आजादी के लिये असंख्य वीरों ने अपने जीवन की आहुति दी थी। देशभक्तों की गाथाओं से भारतीय इतिहास के पन्ने भरे हुए हैं। आज युवा सोच का विकास हो रहा है। गुणात्मक शिक्षा को सर्वसुलभ बनाने की ओर ध्यान दिया जा रहा है। अति आधुनिक टेक्नोलॉजी से लैश युवकों की संख्या तेजी से बढ़ती जा रही है। वर्तमान में भारत विश्व का सबसे बड़ा युवा देश है। भारत की बहुआयामी संस्कृति को हमारे संग्रहालय जन सामान्य तक पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं।

    संसार के महान विचारक विक्टर ह्यूगो ने कहा था ‘इस संसार में जितनी भी सैन्यशक्ति है उससे भी अधिक शक्तिशाली एक और चीज है और वह है एक विचार जिसका कि समय आ गया है।’ संसार में वह विचार जिसका समय आ चुका है केवल भारत के पास है और वह विचार है- ‘उदार चरितानामतु वसुधैव कुटुम्बकम्’ अर्थात उदार चरित्र वालों के लिए सम्पूर्ण वसुधा अपना स्वयं का ही परिवार है। हम सभी संसारवासी एक ही परमात्मा की संतानें होने के नाते सारा संसार हमारा अपना ही परिवार है। हमें संग्रहालयों में संग्रहित अपने महान पूर्वजों की विरासत से 21वीं सदी के अनुकूल समाज के निर्माण की नई प्रेरणा तथा विश्वव्यापी दृष्टि विकसित करनी चाहिए। विश्व में शान्तिपूर्ण एवं न्यायपूर्ण व्यवस्था  बनाने में यथा शक्ति योगदान देने के लिए संकल्पित होना चाहिए।

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