कविता : 16 मई के बाद
आज नहीं,
बहुत पहले कहा था
एक महात्मा ने नहीं
एक मनुष्य ने
कि नींद की अवधि कम होनी चाहिए।
आज नहीं,
बहुत पहले बताया था
एक डॉक्टर ने नहीं
एक पीड़ित ने
कि अत्याचारियों को एक दिन में इक्कीस घंटे सोना चाहिए।
आज नहीं,
बहुत पहले लिखी थीं
महाकवियों ने नहीं
कवियों ने वे कविताएँ
जो आज काम आती हैं।
- अविनाश मिश्र







