मुंबई, 07 जून 2019: रिजर्व बैंक ने डिजिटल लेनदेन को मजबूत बनाने के इरादे से बृहस्पतिवार को आरटीजीएस और एन के जरिये धन अंतरण के लिए बैंकों पर लगने वाले शुल्क समाप्त करने की घोषणा की। साथ ही बैंकों को इसका लाभ ग्राहकों को देने को कहा। अभी दो लाख रपए से अधिक की राशि तत्काल दूसरे के खाते में भेजने के लिए रीयल टाइम ग्रास सेटिलमेंट (आरटीजीएस) का उपयोग किया जाता है। दो लाख रुपये तक की राशि भेजने के लिए नेशनल इलेक्ट्रानिक फंड्स ट्रांसफर (एनईएफटी) प्रणाली बनी है।
मौद्रिक नीति समिति की बैठक के बाद विकासात्मक और नियामकीय नीतियों पर अपने बयान में आरबीआई ने कहा कि वह आरटीजीएस और एनईएफटी प्रणाली के जरिए लेनदेन को लेकर बैंकों पर न्यूनतम शुल्क लगाता है तथा बैंक भी इसके बदले अपने ग्राहकों पर शुल्क लगाते हैं। केंद्रीय बैंक ने कहा, ‘बैंकों को भी इसका लाभ अपने ग्राहकों को देना होगा। इस बारे में बैंकों को एक सप्ताह के भीतर दिशानिर्देश जारी किया जाएगा।’
एटीएम शुल्क की समीक्षा:
आरबीआई ने एटीएम के उपयोग पर लगाए गए शुल्क की समीक्षा को लेकर समिति गठित करने का निर्णय किया। इसका कारण एटीएम उपयोग करने वालों की संख्या उल्लेखनीय रूप से बढ़ रही है। आरबीआई ने कहा, ‘‘हालांकि एटीएम शुल्क और दरों में बदलाव का निरंतर मांग की जा रही है।’ इसके लिए एक समिति गठित करने का निर्णय किया गया है।
क्या है व्यवस्था:
आरबीआई आरटीजीएस और एनईएफटी प्रणाली के जरिए लेनदेन को लेकर बैंकों पर न्यूनतम शुल्क लगाता है। इसके बदले में बैंक भी अपने ग्राहकों पर शुल्क लगाते हैं। एसबीआई एनईएफटी के जरिए धन अंतरण के लिए ग्राहक से एक रपए से लेकर पांच रपए तक का शुल्क लेता है। वहीं आरटीजीएस के मामले में यह शुल्क पांच रपए से 50 रपए के बीच है। इस पर 18 फीसद की दर से जीएसटी लागू होता है। अन्य बैंक भी इसी तरह से शुल्क वसूलते हैं।







