- बीपीएल, ग्रामीण किसान तक को प्रस्तावित वृद्धि में शामिल, उपभोक्ता परिषद ने कहा घरेलू विद्युत उपभोक्ताओं की दरें फैक्ट्री के बराबर प्रस्तावित, यह जनता के साथ बड़ा धोखा
लखनऊ,15 जून 2019: यूपी में एक बार फिर बिजली मंहगी होने जा रही है। मिली जानकारी के अनुसार उप्र पावर कार्पोरेशन द्वारा एक दिन पहले देर शाम गुप-चुप तरीके से वर्ष 2019-20 के लिए उप्र विद्युत नियामक आयोग में अब तक के इतिहास की सबसे बड़ी बिजली दर बढ़ोत्तरी प्रस्तावित कर दाखिल कर दिया है।
यूपी में एक बार फिर बिजली मंहगी होने जा रही है। मिली जानकारी के अनुसार उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि जैसे आम जनता, किसान, ग्रामीण, शहरी घरेलू की दरों में व्यापक वृद्धि प्रस्तावित होने की भनक लगी, उसी क्षण एलान कर दिया कि प्रदेश में बड़ा आन्दोलन करेंगे, लेकिन सरकार के इशारे पर इस बढ़ोत्तरी को आम जनता पर नहीं लागू होने देंगे। अभी आयोग जब तक इसे स्वीकार कर बिजली दर की सुनवाई शुरू करेगा, तब तक पूरे प्रदेश में बड़े आन्दोलन की भूमिका उपभोक्ता परिषद तैयार कर चुका होगा।
बता दें कि गुपचुप तरीके से आयोग में प्रस्तावित बिजली दरों में सबसे ज्यादा वृद्धि घरेलू विद्युत उपभोक्ताओं की प्रस्तावित है। उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने कहा कि उस वृद्धि को देखकर कोई भी यह कह सकता है कि क्या उत्तर प्रदेश में घरेलू विद्युत उपभोक्ता अपने घर में फैक्ट्री लगा लिए हैं, जो इतनी बड़ी वृद्धि प्रस्तावित की गयी है। पावर कार्पोरेशन की ओर से बिजली कम्पनियों द्वारा जो वृद्धि प्रस्तावित की गयी है, उसमें लगभग सभी श्रेणी के विद्युत उपभोक्ताओं वाणिज्यिक, उद्योग व अन्य श्रेणियों में जहाँ 10 से 15 प्रतिशत की वृद्धि प्रस्तावित है वहीं घरेलू विद्युत उपभोक्ताओं की अब तक की सबसे बड़ी वृद्धि जो प्रस्तावित है वह निम्नवत् है।
उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने कहा कि बिजली कम्पनियों द्वारा जो प्रस्ताव दिया गया है उसमें घरेलू शहरी 1 किलोवाट पर फिक्स चार्ज जहाँ पहले रू0 100/- प्रति किलोवाट था, उसे रू0 110/- प्रति किलोवाट प्रस्तावित किया गया। वहीं बीपीएल घरेलू उपभोक्ता जो अभी रू0 50/- प्रति किलोवाट फिक्स चार्ज देते हैं उसे अब रू0 75/- प्रति किलोवाट प्रतिमाह प्रस्तावित किया गया है।
यूनिट वर्तमान रेट (घरेलू, शहरी) प्रस्तावित रेट 2019-20
0-150 रू0 4.90 प्रति यूनिट रू0 6.20 प्रति यूनिट
151-300 रू0 5.40 प्रति यूनिट रू0 6.50 प्रति यूनिट
301-500 रू0 6.20 प्रति यूनिट रू0 7.00 प्रति यूनिट
500 के ऊपर रू0 6.50 प्रति यूनिट रू0 7.50 प्रति यूनिट
घरेलू बी0पी0एल0 रू0 3.00 (100 यूनिट तक) रू0 3.00 (50 यूनिट तक)
घरेलू ग्रामीण अनमीटर्ड रू0 400 प्रति किलोवाट/माह रू0 500 प्रति किलोवाट/माह
जहाँ पहले अनमीटर्ड किसानों को रू0 150/- प्रति बीएचपी प्रतिमाह देना पड़ता था, अब वहीं रू0 170/- प्रति बीएचपी प्रतिमाह प्रस्तावित किया गया है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि बिजली कम्पनियों ने इस बार घरेलू, ग्रामीण आम जनता के साथ ऐसा क्यों किया और सरकार की यदि इसमें सहमति है तो अपने आपमें सबसे बड़ा चैंकाने वाला सवाल है।
उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने कहा कि एक तरफ बिजली कम्पनियाँ फिजूलखर्ची में जुटी हैं, इनाम बाँट रही हैं, स्टोर का सामान बिक रहा है। 100 करोड़ से ज्यादा के कन्सलटेंट रखे गये हैं और अब उसकी भरपाई आम जनता से करने के लिए उन पर बड़ी वृद्धि प्रस्तावित की गयी है, इसका हर स्तर पर विरोध होगा। पहले विद्युत नियामक आयोग की सुनवाई में विरोध किया जायेगा। इसके बाद भी बात नहीं बनी तो पूरे प्रदेश में व्यापक आन्दोलन छेड़ा जायेगा, लेकिन किसी भी हालत में बिजली दरों में बढ़ोत्तरी नहीं होने दी जायेगी।
उपभोक्ता परिषद ने प्रदेश के मुख्यमंत्री और ऊर्जा मंत्री से माँग की है कि वह पूरे मामले पर हस्तक्षेप कर प्रस्तावित वृद्धि को वापस करायें, अन्यथा की स्थिति में पूरे प्रदेश में टकराव की स्थिति उत्पन्न होगी और आम जनता, ग्रामीण, किसान सभी आन्दोलन के रास्ते पर जायेंगे। सबसे बड़ा चौकाने वाला मामला तो यह है कि प्रदेश की बिजली कम्पनियों ने बीपीएल गरीब विद्युत उपभोक्ताओं, जिन्हें पहले 100 यूनिट तक सीमित किया गया था, अब उन्हें मात्र 50 यूनिट पर सीमित करने का मतलब उनके हकों के साथ कुठाराघात है।







