गरीब, बीपीएल व किसानों के साथ नहीं होगा कोई अन्याय, अन्य मामलों पर गंभीरता से होगा विचार: ऊर्जा मंत्री
लखनऊ,18 जून 2019: उप्र पावर कार्पोरेशन व बिजली कम्पनियों द्वारा प्रदेश के ग्रामीण, घरेलू, शहरी, किसानों की बिजली दरों में व्यापक बढ़ोत्तरी कराने के लिए विद्युत नियामक आयोग में दाखिल प्रस्ताव के विरोध में आज उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने प्रदेश के ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा से सचिवालय स्थित उनके कार्यालय में मुलाकात कर विस्तार से चर्चा करते हुए पावर कार्पोरेशन की मनमानी की शिकायत दर्ज करायी।
उपभोक्ता परिषद ने माननीय ऊर्जा मंत्री को एक लोक महत्व विषयक ज्ञापन भी सौंपा और विस्तार से बताया कि जिस प्रकार से पावर कार्पोरेशन ने गरीब, बीपीएल शहरी किसानों की दरों में व्यापक बढ़ोत्तरी का प्रस्ताव दिया, उससे कहीं न कहीं सरकार की छवि धूमिल हुई है जो उच्चस्तरीय जाँच का मामला है। एक तरफ पावर कार्पोरेशन सुधार के बड़े-बड़े दावे करता है, लाइन हानियों में कमी, उत्पादन लागत में कमी, सुधार के नाम पर इनाम बाँटने की प्रक्रिया चालू करना और वहीं दूसरी ओर आर्थिक स्थिति का रोना रोकर बिजली दरों में व्यापक बढ़ोत्तरी का प्रस्ताव देना पावर कार्पोरेशन प्रबन्धन की अक्षमता को जाहिर करता है।
उपभोक्ता परिषद ने ऊर्जा मंत्री के सामने 1 किलोवाट 100 यूनिट पर देश के अनेकों राज्यों का घरेलू उपभोक्ताओं का फिक्स चार्ज व एनर्जी चार्ज को जोड़कर एक तुलनात्मक आँकड़ा पेश करते हुए ऊर्जा मंत्री को दिखाया कि उत्तर प्रदेश में जो प्रस्तावित दरें हैं यदि वह लागू हो जायें तो प्रदेश सबसे ज्यादा बिजली दर बढ़ाने वाला प्रदेश साबित होगा।
राज्य वर्तमान में राज्यों में 1 किलोवाट 100 यूनिट पर कुल चार्ज
दिल्ली रू0 125 (सरकारी सब्सिडी के बाद)
गुजरात रू0 343
उत्तर प्रदेश रू0 730 (प्रस्तावित दर 2019-20 के आधार पर)
मुम्बई टाटा रू0 493
महाराष्ट्र (एम.एस.ई.डी.सी.एल.) रू0 510
मध्य प्रदेश रू0 518
कर्नाटक रू0 502
पंजाब रू0 534
बिहार रू0 512 (सरकारी सब्सिडी के बाद)
राजस्थान रू0 698
छत्तीसगढ़ रू0 376
हरियाणा रू0 365
ऊर्जा मंत्री ने वार्ता के बाद उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष को आश्वासन दिया कि पुरानी सरकारों के भ्रष्टाचार की वजह से बिजली कम्पनियों की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है, जिसमें धीरे-धीरे अब मेरी सरकार सुधार कर रही है। यह बात सत्य है, लेकिन गरीब, बीपीएल व किसानों के साथ कोई भी अन्याय मेरी सरकार में नहीं होने पायेगा। जहाँ तक सवाल है उपभोक्ता परिषद द्वारा उठाये गये शहरी, घरेलू व ग्रामीणो की बिजली दरों में बढ़ोत्तरी प्रस्ताव का तो उस पर सरकार गम्भीरता से विचार करेगी। उसी क्षण उपभोक्ता परिषद के लोक महत्व विषयक ज्ञापन पर ऊर्जा मंत्री द्वारा चेयरमैन, पावर कार्पोरेशन को पूरे मामले पर परीक्षण कर कार्यवाही का निर्देश भी जारी किया है।
उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने कहा कि आज जब पावर कार्पोरेशन के टैरिफ प्रस्ताव को गंभीरता से उपभोक्ता परिषद ने अध्ययन किया तो एक चैंकाने वाला मामला सामने आया जिसमें बीपीएल, शहरी के मामले में यह प्रस्ताव दिया गया है कि 1 किलोवाट 50 यूनिट दोनों में कोई भी क्राइटेरिया बदलने पर बीपीएल समाप्त हो जायेगा, यानी कि उपभोक्ता यदि 1 किलोवाट पर 100 यूनिट वर्तमान की भाँति आगे खर्च करेगा तो उसे रू0 350 की जगह रू0 730 देना पड़ेगा, जो इस श्रेणी में लगभग 109 प्रतिशत की वृद्धि है और जो पावर कार्पोरेशन की गरीब विरोधी नीति का खुलासा करता है।







