नियामक आयोग को बिना किसी दबाव के करना होगा निर्णय
लखनऊ,29 जून 2019: बिजली कंपनियां कब कहाँ कितना बड़ा खेल कर दें इसका कोई भरोसा नहीं! एक ऐसा ही मामला सामने आया है जहाँ प्रदेश की बिजली कंपनियों द्वारा वर्ष 2019-20 का वार्षिक राजस्व आवश्यकता (एआरआर) वर्ष 2017-18 का ट्रूअप व वर्ष 2018-19 का वार्षिक परफारमेंन्स रिव्यू जहाॅं गुपचुप तरीके से कल देर शाम बदल दिया गया पहली बार ऐसा हुआ है, जब बिजली कंपनियों ने अपना पूरा वार्षिक राजस्व आवश्यकता ही बदल दी पहले जो एआरआर 76495 करोड की थे अब उसमे कमी करके उसे 75201 करोड कर दिया गया।
अब देखना यह है कि नियामक आयोग आगे क्या निर्णय लेता है? उपभोक्ता परिषद ने कहा कि अब सवाल उठना लाजमी है कि पहले बढ़ाकर एआरआर किस आधार पर दी गयी। विगत दिनों जिस प्रकार नियामक आयोग ने बिजली कम्पनियो को दो टूक कह दिया था आकड़े फर्जी हुए तो उनके खिलाफ एफआईआर भी हो सकती है। बिजली कम्पनियो ने एआरआर के सभी आकड़ो में बदलाव से यह सिद्ध हो गया की पहले मनगढंत आकड़ो पर आधारित एआरआर थे इस बार नियामक आयोग को कोई जल्दबाजी न करके सभी आकड़ो का मिलान कराना जरूरी है।
नियामक आयोग को बिना किसी दबाव के करना होगा निर्णय: उपभोक्ता परिषद
उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा इस बार बिजली कम्पनियों की तरफ से जो वर्ष 2019-20 का कुल एआरआर दाखिल किया गया है वह लगभग 76522 करोड था उसमे लगभग 1321 करोड़ की कमी हो गयी है तो आगे कैसे विश्वास किया जाय की अब एआरआर सही है नियामक आयोग को बहुत ही गम्भीरता से सभी आंकड़े देखना चाहिए। उसके बाद ही उसे स्वीकार करना चाहिए।
बिजली कम्पनिया लगातार जोर देगी की उसका जल्द एआरआर स्वीकार हो लेकिन नियामक आयोग को बिना किसी दबाव के पारदर्शी तरीके से निर्णय करना होगा पहले जो कुल गैप 18091 करोड अब उसमे कमी करके उसे 17421 करोड कर दिया गया लगभग 670 करोड़ की कमी । कुल मिलाकर बिजली कम्पनियों द्वारा जो बडा गैप दिखाया गया है उससे यह पूरी तरह सिद्ध हो रहा है कि इस बार बिजली कम्पनियाॅं बडे पैमाने पर बिजली दरों में बढोत्तरी कराने पर जुटी हैं।







