बहना उठा ले तलवार तू आज,
वरना दुष्टों के बीच नहीं बचेगी लाज।
बहना उठा ले तलवार तू आज।
अब ना छोड़ कोई कसर यहां तू,
बन जा दूर्गा, बन जा काली।
तोड़ दो इन जहरीले कांटों को,
सू-संकृति के फूलों की सजा दो थाली।।
देख रही हो, निर्भया को अभी नहीं मिला न्याय,
तब तक उन्नाव की बहना ने तोड़ दिया दम।
यहां अपने-अपने घरों में रो रहे सभी,
मगर क्या इससे परिवार का दुख होगा कम।।
आखिर तू ही तो मां हो, तू ही हो सास,
फिर आज क्यों हो गई निराश।
तोड़ दे बेड़ियां तू, कर दे नई संस्कृति का आगाज।
बहना उठा ले तलवार तू आज।।
जो कलाई ना बचा सकी राखी की लाज।
बहना, काट दे उसके गर्दन को तू आज।
बहना उठा ले तलवार तू आज।
तू जागेगी तो दुनिया जग जाएगी।
यहां समाज में तू ही अमन लाएगी।।
मन की तलवार से खत्म कर दुष्टों का राज।
समय आ गया है,
बहना उठा ले तलवार तू आज।
बहना उठा ले तलवार तू आज
. उपेंद्र नाथ राय ‘घुमंतू’







