पढ़ने की ललक मनुष्य की एक जरूरत है। जरूरत इसलिए भी कि जीवन जीने में इसकी अहम भूमिका है। जीवन को सफल करने के लिए हम पढ़-लिखकर कामयाब इंसान बनते हैं। लेकिन क्या आपने कभी अपने हृदय की किताब पढ़ी ? इस किताब के हर पन्ने में स्पष्ट लिखा है कि ‘‘आप बड़े धन्य है’’, जब कि सांसारिक किताबों में लिखा है कि आपके पास क्या-क्या नहीं है। हृदय की किताब में लिखा है कि ‘‘आपके पास क्या-क्या है! आपके पास यह स्वांस है, यह जीवन है और आप धन्य हैं! आपको मनुष्य शरीर मिला है।’’इस किताब में अच्छे-बुरे की व्याख्या नहीं की गयी है, बल्कि कहा गया है कि ‘‘जिस चीज की आपको सचमुच जरूरत है, वह पहले से ही आपके अन्दर है।’’ यदि इसे आप बाहर खोजेंगे तो वह वहां नहीं मिलेगी। इस हृदय की किताब को पढ़ने के लिए आपको पढ़ा-लिखा होना जरूरी नहीं है। एक अनपढ़ मनुष्य भी इस किताब को पढ़ सकता है, क्योंकि इसके अक्षर कुछ अजीब किस्म के हैं, जो हमारी भावनाओं से ताल्लुक रखते हैं, विचारो से नहीं। 
इस हृदय की किताब के पन्नों पर मूल रूप से यही लिखा है कि ‘‘इस जिन्दगी को उस आनन्द में बिताना है, शांति में बिताना है। अगर आप अपना जीवन आनन्द और शांति में बिताना शुरू कर देंगे तो आपको डरने की जरूरत नहीं पड़ेगी, जीवन में भटकने की जरूरत नहीं पड़ेगी। जीवन को धन्य बनाने का तरीका यही है कि आपके जीवन में ऐसा प्रकाश आये, जिसके आने से अंधेरे का नाश हो। हर एक व्यक्ति के लिए सबसे बड़ी खुशखबरी यही है कि ‘जिस चीज की उसको तलाश है, वह उससे दूर नहीं है, बल्कि उसके बहुत करीब है। ’’वह असली शांति आपके हृदय में मौजूद है। इस संभावना को पहचानिये। आप उस शांति और आनंद का अनुभव करके अपने जीवन को सफल बना सकते हैं। केवल शांति-शांति रटने से शांति का अनुभव नहीं होगा। शांति का अनुभव अपनी जिन्दगी में होना बहुत जरूरी है। इसलिए हर एक व्यक्ति को अपने जीवन को सचेत रहकर जीना चाहिए। हृदय की किताब को भूल नहीं जाना है। यहां तो सिर्फ एक-दोपन्ने की थोड़ी-सी पंक्तियों की चर्चा हुई है। इसमें तो हर एक चीज के बारे में लिखा है- आनन्द के बारे में लिखा है, शांति के बारे में लिखा है और इस जीवन को सफल करने के बारे में लिखा है। जिस दिन आप इस सच्चाई को जान जायेंगे कि आप सचमुच में कितने धनी हैं तो आप अपने आपको धन्य पायेंगे और आपका जीवन खुशहाल हो जायेगा। यह कहना है शांति के विषय में चर्चा करने वाले अंतर्राष्ट्रीय वक्ता प्रेम रावत का। उन्हें इस महानतम कार्य के लिए कई सरकारी एवं शैक्षणिक संस्थानों द्वारा ‘शांतिदूत’ की उपाधि भी प्रदान की गई है। अपने संदेश की चर्चा के अलावा वे लोगों को सम्मान, शांति और समृद्धि के साथ जीवन यापन करने में मदद करने के लिए एक परोपकारी संस्था ‘‘द प्रेम रावत फाउण्डेशन’’ का भी संचालन करते हैं। इस संस्था के अनेक प्रोजेक्टों में से एक है- ‘‘जनभोजन योजना’’, जिसके तहत जरूरतमंद लोगों एवं बच्चों को रोजाना पोषक भोजन एवं साफ पीने का पानी उपलब्ध कराया जाता है। प्रेम रावत फाउण्डेशन अन्य बड़ी परोपकारी संस्थाओं के साथ मिलकर विश्वभर में प्राकृतिक आपदाओं के लिए राहत कार्यों मे भी सहयोग करती है। प्रेम रावत जी का संदेश बेवसाइट www.timelesstoday.com और www.rajvidyakender.org पर उपलब्ध है।







