- केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान के निदेशक ने दी सलाह, एक सप्ताह में हो जाता है तैयार
- बच्चों के लिए सीखने के अतिरिक्त रोचकता भी, सुपर फूड है माइक्रोग्रीन्स
कोरोना लॉकडाउन के दौरान, माइक्रोग्रींस आपके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य दोनों के लिए उपयोगी है। माइक्रोग्रींस उगाना आसान है, इन्हें लगाने से काटने तक एक से दो सप्ताह का समय चाहिए और इस बीच में हम लॉकडाउन की अवधि पूरी कर सकते हैं।
माइक्रोग्रींस आपके भोजन को स्वादिष्ट और पौष्टिक बना सकते हैं। इन्हें स्वयं उगाना रोमांचक और खासकर बच्चों के लिए सीखने के अतिरिक्त एक रोचक खेल भी है।
इस संबंध में केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान, लखनऊ के निदेशक शैलेन्द्र राजन ने बताया कि माइक्रोग्रींस उगाना मजेदार और कम मेहनत का काम है। कम ही दिन में फसल तैयार हो जाती है। थोड़े दिन के अंतराल पर कई बार उगाया जा सकता है। दिलचस्प बात यह है कि आपके किचन में पूरे साल माइक्रोग्रीन्स का उत्पादन किया जा सकता है, बशर्ते वहाँ सूर्य की रोशनी आती हो। विटामिन, पोषक तत्वों और बायोएक्टिव कंपाउंड्स के खजाने के रूप मे जाना जाता है। इस कारण माइक्रोग्रीन्स को सुपर फूड कहना अतिशयोक्ति ना होगा।
माइक्रोग्रीन्स को विकास के लिए जरूरी है सूर्य का प्रकाश
उन्होंने कहा कि भारतीय परिवेश में चना मूंग मसूर को अंकुरित करके खाना एक आम बात है। ज्यादातर इस कार्य के लिए दालों वाली फसलों का प्रयोग किया जाता है और इन्हें अंकुरित बीज या स्प्राउट भी कहते हैं। माइक्रोग्रीन्स इनसे कुछ अलग है, क्योंकि अंकुरित बीजों या स्प्राउट्स में हम जड़, तना एवं बीज-पत्र को खाने में प्रयोग में लाते हैं, लेकिन माइक्रोग्रीन्स में तने, पत्तियों एवं बीज-पत्र का उपयोग किया जाता है और जड़ों को नहीं खाते हैं। आमतौर पर माइक्रोग्रीन्स को मिट्टी या उससे मिलते जुलते तत्व पर उगाया जाता है। माइक्रोग्रीन्स को विकास के लिए सूर्य के प्रकाश की आवश्यकता होती है।
मूली, सरसों जैसी सामान्य सब्जियों के बीच का कर सकते हैं उपयोग
मूली और सरसों जैसी सामान्य सब्जियों के बीज का उपयोग इसके लिए किया जाता है। कोरोना लॉक डाउन के दौरान माइक्रोग्रीन्स के लिए प्रसिद्ध पौधों के बीज मिलने आसान नहीं है, परंतु घर में उपलब्ध मेथी, मटर, मसूर दाल, मसूर, मूंग, चने की दाल को स्प्राउट्स के जगह माइक्रोग्रीन्स से रूप में उगा कर भोजन को पौष्टिक और स्वादिष्ट बनाया जा सकता है।
माइक्रोग्रीन्स के लिए करे ट्रे का प्रयोग, दो से तीन बार पानी का छिड़काव
शैलेन्द्र राजन ने बताया कि कोरोना लॉक डाउन के दौरान घर में ही उपलब्ध सामग्री का प्रयोग करके माइक्रोग्रीन्स को उगाना संभव है। इसके लिए 3 से 4 इंच मिट्टी की परत वाले किसी भी डब्बे को लिया जा सकता है और यदि ट्रे उपलब्ध है तो और अच्छा है। मिट्टी की सतह पर बीज को फैला दिया जाता है और उसके ऊपर मिट्टी की एक पतली परत डालकर धीरे-धीरे थपथपा कर यह सुनिश्चित कर लिया जाता है कि मिट्टी कंटेनर में अच्छी तरह से बैठ गई है। मिट्टी के ऊपर सावधानीपूर्वक पानी डालकर नमी बनाकर रखने से दो से तीन दिन में ही बीज अंकुरित हो जाते हैं। इन अंकुरित बीजों को थोड़ी धूप वाली जगह में रखकर उन पर दिन में दो से तीन बार पानी का छिड़काव किया जाता है।
सलाद में भी कर सकते हैं उपयोग
निदेशक के अनुसार एक हफ्ते के भीतर ही माइक्रोग्रीन्स तैयार हो जाते हैं। यदि आप चाहें तो इन्हें 2 से 3 इंच से अधिक उचाई तक बढ़ने दे सकते हैं। इन्हें उगाना आसान है और यह विभिन्न व्यंजनों के अलावा सलाद एवं सैंडविच में भी उपयोग में लाए जा सकते हैं। इनकी कटाई केंची के द्वारा आसानी से की जाती है। फसल काटने के बाद मिट्टी को गर्मी के दिनों में धूप में फैला कर रखने से उसमें पाए जाने वाले रोग जनक सूक्ष्म जीव मर जाते हैं। माइक्रोग्रीन्स को बिना मिट्टी के भी उगाया जा सकता है। कई लोग इन्हें पानी में ही उगाया करते हैं लेकिन पोषक तत्वों के घोल का उपयोग करके अच्छे क्वालिटी के माइक्रोग्रीन्स का उत्पादन किया जा सकता है।
प्रतिदिन तीन से चार घंटे मिले सूर्य की रोशनी
उन्होंने बताया कि माइक्रोग्रीन्स के लिए प्रतिदिन 3 से 4 घंटे की सूर्य की रोशनी पर्याप्त है। घर के अंदर ही यदि आपके पास इस प्रकार की जगह उपलब्ध है तो आसानी से उसका उपयोग किया जा सकता है। ऐसी जगह उपलब्ध ना होने पर लोग फ्लोरोसेंट लाइट का भी उपयोग करके सफलतापूर्वक उत्पादन कर लेते हैं। घर के बाहर इन्हें उगाने में कोई परेशानी नहीं होती है लेकिन कभी-कभी चिलचिलाती धूप में इनकी सुरक्षा करना आवश्यक हो जाता है। माइक्रोग्रीन्स को कैंची से काट कर धोने के बाद प्रयोग में लाया जा सकता है। अधिक मात्रा में उपलब्ध होने के पर इन्हें फ्रिज में रखने से लगभग 10 दिन तक इसका उपयोग किया जा सकता है।







