तबादला बना सिरदर्द, आरटीओ कार्यालयों का कामकाज चौपट
लखनऊ। राजधानी समेत प्रदेश भर में परिवहन विभाग में तबादलों के चक्कर में आरटीओ कार्यालयों का कामकाज चौपट हो गया है। प्रशासनिक अधिकारियों के ट्रांसफर के चलते जहां कार्यालय के प्रशासनिक कार्य पूर्व की तरह सम्पन्न नहीं हो पाए, वहीं प्रवर्तन से जुड़े अधिकारियों के तबादलों के फेर में सड़क पर चेकिंग अभियान भी पहले की तरह नहीं चल सका। लिहाजा दोनों ही तरह से परिवहन विभाग को राजस्व की अच्छी खासी चपत लगी। परिवहन विभाग के अधिकारी भी मानते हैं कि इससे पहले कभी भी अधिकारियों के तबादलों में ऐसी अनिश्चितताएं नहीं रहीं जैसी इस बार हुईं। अधिकारियों को यह तक पता नहीं चल पाया कि उनकी तैनाती है तो है कहां। तबादला भी कर दिया और रिलीव भी नहीं किया गया ऐसे में जिस अधिकारी को जहां ज्वाइन करना था वहां का काम प्रभावित हुआ और कार्यमुक्त न होने के कारण यहां पर भी अधिकारी ने काम को गंभीरता से नहीं लिया। दोनों तरह से नुकसान परिवहन विभाग को ही हुआ।
उत्तर प्रदेश शासन ने करीब एक महीने पहले 27 एआरटीओ के तबादले किए, इसके बाद 10 आरटीओ और अब दर्जनों की संख्या में आरआई, पीटीओ व अन्य कर्मचारियों के तबादले कर दिए। इनमें प्रशासन और प्रवर्तन से जुड़े अधिकारी शामिल हैं। 27 एआरटीओ के तबादलों को तो एक महीने के करीब का समय बीत गया लेकिन इनमें से कुछ अधिकारियों को अब तक यह नहीं मालूम है कि तबादले के बाद उनकी नवीन तैनाती कहां हुई है। 27 में से कई ऐसे भी अधिकारी हैं जिनका तबादला हुआ लेकिन नई जगह पर तैनाती के आदेश नहीं मिले। अधिकारियों को मालूम है कि उनका तबादला हो गया तो ऐसे में वे अधिकारी पहले की तरह कुर्सी पर रहकर सही से काम को अंजाम नहीं दे पा रहे हैं। उन्हें लगता है कि अब जब यहां से जाना ही है तो यहां पर काम क्यों किया जाए नवीन तैनाती स्थल पर ही काम किया जाएगा। इस वजह से द तर के अंदर और बाहर दोनों ही जगह के काम चौपट हो गए। प्रशासनिक अधिकारियों ने जहां टैक्स बकाएदारों से टैक्स की वसूली नहीं कराई वहीं चेकिंग अभियान से जुड़े अधिकारियों ने सडक पर अभियान चलाने में कोई दिलचस्पी नहीं ली। जिसका खामियाजा परिवहन विभाग को करोड़ों के राजस्व हानि के रूप में भुगतना पड़ा। आरटीओ, आरआई, पीटीओ, सिपाही, ड्राइवर व चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों के तबादलों के बाद अब राजस्व वसूली का हिसाब किताब और भी गड़बड़ा गया है। वसं







