भारत के लिपुलेख और कालापानी पर जताया दावा
चीन को गोद में बैठकर नेपाल ने एक बार फिर भारत के साथ धोखा किया। बता दें कि नेपाल की संसद ने शनिवार को देश के राजनीतिक नक्शे को संशोधित करने से संबंधित महत्वपूर्ण विधेयक को पास कर दिया। इस नए नक्शे में भारतीय सीमा से लगे लिपुलेख, कालापानी और लिंपियाधुरा जैसे रणनीतिक क्षेत्र पर दावा किया गया है। निचले सदन से पारित होने के बाद अब विधेयक को नेशनल असेंबली में भेजा जाएगा, जहां उसे एक बार फिर इसी प्रक्रिया से होकर गुजरना होगा।

मीडिया ख़बरों के अनुसार नेशनल असेंबली से विधेयक के पारित होने के बाद इसे राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा, जिसके बाद इसे संविधान में शामिल किया जाएगा। संसद ने 9 जून को आम सहमति से इस विधेयक के प्रस्ताव पर विचार करने पर सहमति जताई थी जिससे नए नक्शे को मंजूर किए जाने का रास्ता साफ हुआ।
मीडिया सूत्रों के अनुसार बताया जाता है क़ि सरकार ने बुधवार (10 जून) को विशेषज्ञों की एक नौ सदस्यीय समिति बनाई थी जो इलाके से संबंधित ऐतिहासिक तथ्य और साक्ष्यों को जुटाएगी। भारत और नेपाल के बीच रिश्तों में उस वक्त तनाव दिखा जब रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने आठ मई को उत्तराखंड में लिपलेख दर्रे को धारचुला से जोड़ने वाली रणनीतिक रूप से 80 किमी लम्बी सड़क का उद्द्घाटन किया था, नेपाल ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए दावा किया क़ि ये सड़क नेपाली इलाके के रास्ते से होकर गुजरती है। भारत ने उसके दावों को ख़ारिज करते हुए कहा क़ि यह सड़क उसके भूभाग में स्थित है इस पर नेपाल ने अपना रंग दिखाना शुरू कर दिया है जिसका ये परिणाम है।







