- उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने ऊर्जा मंत्री से की मुलाकात और प्रदेश के घरेलु किसानो व छोटे दुकानदारों की बिजली दरों में कमी कराने को लेकर सौपा प्रस्ताव
लखनऊ, 29 जुलाई, 2020: विद्युत नियामक आयोग द्वारा प्रदेश की बिजली कम्पनियों की तरफ से दाखिल वर्ष 2020-21 की वार्षिक राजस्व आवश्यकता (एआरआर) स्वीकार करने और बिजली दर बढ़ोतरी पर बिजली कम्पनियो की गुपचुप चालबाजी पर विराम लगाने और एआरआर पर ही सुनवाई की बात कही है अब वही दूसरी ओर उपभोक्ता परिषद् ने प्रदेश के घरेलु किसानो व छोटे दुकानदारों की बिजली दरों में कमी करने को लेकर अभियान छेड दिया है ।

आज उसी क्रम में उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने प्रदेष के ऊर्जा मंत्री श्रीकान्त शर्मा से शक्ति भवन में मुलाकात कर एक जनहित लोक महत्व प्रस्ताव सौपते हुए यह मुदा उठाया की देश के अनेको राज्यों जहा पर कोरोना माहमारी के बीच अप्रैल 2020 से लेकर आज तक बिजली दरे घोषित हुई वह पर उपभोक्ताओ को बड़ी राहत दी गयी जवकि वहा के राज्यों में वहा के उपभोक्ताओ का कोई पैसा बिजली कम्पनियो पर नहीं निकल रहा था लेकिन उत्तर प्रदेश जहा पर प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओ का प्रदेश की बिजली कम्पनियो पर रुपया 13337 करोड निकल रहा ऐसे में प्रदेश सरकार कोरोना माहमारी में उपभोक्ताओ की बिजली दरों में कमी कराए ।
राज्य – घरेलु की दरों में कमी वर्ष 2020-21
उत्तराखंड -18 से 20 पैसा प्रति यूनिट कमी
हरियाणा -छोटे उपभोक्ता की रुपया 2 प्रति यूनिट और 42 पैसे
महाराष्ट्र -औसत 8 प्रतिशत कमी
पंजाब -25 पैसे से 50 पैसा कमी
बिहार -10 पैसा यूनिट सभी कैटेगरी में
गुजरात -दरों में कोई बढ़ोतरी नहीं
दिल्ली -पहले से ही कम
उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेष कुमार वर्मा ने कहा बिजली उपभोक्ताओं का उदय व ट्रूअप में वर्ष 2017-18 तक कुल लगभग रुपया 13337 करोड़ बिजली कम्पनियो पर निकल रहा है जिसे आगे उपभोक्तओ को पाश किया जायेगा आयोग ने कहा था । जो अब कैरिंग कॉस्ट 13 प्रतिशत जोड़ कर लगभग रुपया 14782 करोड़ हो गया है जिसको पूरा उपभोक्तओ को यदि आयोग पास आन करे तो लगभग 25 प्रतिशत बिजली दरों में कमी होगी वही बिजली कम्पनियो के 4500 करोड़ के गैप को घटा दिया जाय फिर भी बिजली दरों में 16 प्रतिशत की कमी होनी चाहिए।







