लखनऊ, 7 अगस्त 2020: कहीं राम जन्म का उछाह झलक रहा था तो कहीं भक्ति-प्रेम के रससिक्त षबरी प्रसंग की मार्मिक आभा झलक रही थी ओर कहीं अनुनय-विनय, करुणा, आह्लाद, भक्ति की भावना स्वरों में गूँज रही थी।
राममय वातावरण में उत्तर प्रदेष संगीत नाटक अकादमी की ओर से आज अपराह्न वाल्मीकि रंगषाला अकादमी भवन गोमतीनगर में आयोजित ‘घट-घट में राम’ शिर्शित आनलाइन भजन संध्या में आज कमलाकांत मौर्य और साथियों ने सुधी संगीतप्रेमियों को कुछ ऐसे ही भक्ति रस में डुबोया।
स्वाति श्रीवास्तव के संचालन में प्रारम्भ हुए कार्यक्रम में कलाकारों का स्वागत अकादमी के सचिव तरुण राज ने किया। उन्होंने बताया कि कोविड-19 काल में अकादमी के आनलाइन कार्यक्रमों की शृंखला की एक और कड़ी है और ऐसे ही विविध कार्यक्रमों की कड़ी अकादमी संचालित करता रहेगा।
गुरु कृष्णकुमार कपूर और रंगसंगीत के सिद्धहस्त संगीतकार रवि नागर के षिष्य कमलाकांत ने भजन संध्या का प्रारम्भ पद्मश्री डा.योगेष प्रवीन के गीत- जैसे आभा नील रतन में, जैसे मधु-मकरंद पवन में…. से की। राग चारूकेषी में निबद्ध इस रचना में राम की मानसिक स्तुति करने की अभिलाषा छिपी थी। राग पहाड़ी में बंधी उदयभान पाण्डेय के बधाई गीत- रामलला घर आए बधावन बाजन लागे….. में अयोध्या नगरी और रामभक्तों में छाया उत्साह मुखरित हुआ। यहां दादरा ताल के रंग दिखाने के साथ पूरे कार्यक्रम में कुषल युवा तबलानवाज राजीव षुक्ल ने अपनी कला का भी भरपूर आनंद श्रोताओं को परोसा।
कमलाकांत मे स्वरों में आस्था के प्रति भक्तों के विश्वास को दर्शाती अगली रचना गोस्वामी तुलसीदास की- जानकीनाथ सहाय करे तब कौन बिगाड़ करे….. शुद्ध बिलावल और कहरवा ताल में थी। इसी क्रम में राग आसावरी में प्रस्तुत उदयभान की भगन रचना- दिन रात भजो राम को…… में करुणा का भाव भी उद्घाटित हुआ तो योगेश प्रवीन की भैरवी में प्रस्तुत अगली रचना- राम राम कहते रहो भइया….. में भक्त का आराध्य के प्रति एक आह्वान सा दिखाई दिया। इसी तरह गायन के संग हारमोरियम में स्वर दे रहे कमलाकांत ने-राम नाम अति मीठा है….. जैसे भजन सुनाए। उनके संग तबले पर राजीव षुक्ल के अलावा बांसुरी पर दीपेन्द्र कुंवर और आक्टोपैड पर दीपक कुमार ने अपनी प्रतिभा दर्षाई। आॅनलाइन कार्यक्रम को बड़ी संख्या में श्रोताओं ने सराहा।







