हमारे भारतीय परिवेश में प्रत्येक हिन्दू देवी देवताओं की पूजा अर्चना करने का एक निश्चित समय व दिन होता है उस दिन देवताओं के पूजे जाने से विशेष फल की प्राप्ति होती है ऐसी मान्यता हमारे धर्म ग्रन्थो में उल्लेख से मिलती है।
हिन्दू धर्म शास्त्रों के मतानुसार किसी भी देवी देवताओं के पूजा करने से पहले सर्व प्रथम श्री गणेश जी पूजा अर्चना किये जाने का विधान है। अब ऐसा क्यों है ? इस प्रश्न के उत्तर में उनके जन्म काल से जुड़ी एक कहानी प्रसिद्व है कि जब गणेश जी का जन्म हुआ उस समय उनका शरीर सामान्य था।
माता पार्वती ने पुत्र की प्राप्ति के लिए पुण्यक नामक एक उपवास किया जिसके प्रताप से उन्हें एक पुत्र उत्पन्न हुआ उस पुत्र को समस्त देवी देवता देखने आये और उन्हें देख कर आशीर्वाद दे रहे थे लेकिन शनिदेव अपना सिर झुकाए खड़े थे। तब माता पार्वती ने शनि से इसका कारण पूछा तो उन्होंने बताया कि उनकी दृष्टि गणेशजी के लिए शुभ नही होगी।
परंतु माता पार्वती के कहने पर उन्होंने गणेशजी को देखा और देखते ही उनका शिर धड़ से अलग हो गया इस पर माता पार्वती रोने लगी कि अब क्या होगा? वहां सभी देवी देवताओं में उपस्थित नारद मुनि ने माता पार्वती से कहा कि संसार मे इस समय जो प्राणी उत्तर की तरफ मुँह करके सो रहा हो उसका सिर काटकर यदि इस शिशु के गर्दन में लगा दिया जाये तो यह शिशु पुनर्जीवित हो उठेगा।
इस बात पर यह तय हुआ की सबसे तेज विचरण करने वाले कार्तिके को यह कार्य सौंपा गया कि जाओ समपूर्ण दुनिया के इस समय जो भी प्राणी उत्तर की ओर मुहँ करके सोता मिले उसका सिर काट कर ले आओ। कार्तिके के सम्पूर्ण दुनिया के चक्कर लगाने के बाद बड़े दुखी मन से वापस लौटने लगें क्यूंकि उन्हें मनुष्य से लेकर की संसार का कोई भी प्राणी उत्तर मुहँ कर सोता हुआ नही मिला अचानक रास्ते मे उनकी दृष्टि एक गज पर पड़ी को उत्तर की तरफ मुहँ करके सो रहा था।
कार्तिके ने झट से उस हाथी का सिर काट लिया और सिर को ले जाकर गणेश के धड़ में लगा दिया धड़ लगते ही भगवन गणेश जीवित हो गये। गणेश जीवित तो हो गये लेकिन अब उनका मुहँ हाथी जैसा हो गया। इस तरह के मुहँ वाले भगवान को संसार में सम्मान की दृष्टि से भला कौन देखेगा और पूजनीय कैसे होगा यह सोच माता पार्वती बहुत चिंतित हुई लेकिन जीवित हो कर जब गणेश ने अपने माता पिता से आशीर्वाद लेने उनके चरण छुये तो भगवान शंकर ने उन्हें आशीर्वाद देते हुये यह वरदान दिया कि आज से संसार मे समस्त देवी देवताओं के पूजा अर्चना से पूर्व तुम्हारा पूजा अर्चना किया जाएगा।
तभी से किसी भी धार्मिक कर्म कांड से पहले गणेश जी की स्थापना उनका पूजा- पाठ करना अनिवार्य कर दिया गया। इसके अतिरिक्त प्रति वर्ष गणेश चथुर्थी के दिन उनका विशेष पूजा अर्चना करने का दिन है।







