Close Menu
Shagun News India
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Thursday, April 30
    Shagun News IndiaShagun News India
    Subscribe
    • होम
    • इंडिया
    • उत्तर प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • राजस्थान
    • खेल
    • मनोरंजन
    • ब्लॉग
    • साहित्य
    • पिक्चर गैलरी
    • करियर
    • बिजनेस
    • बचपन
    • वीडियो
    • NewsVoir
    Shagun News India
    Home»ब्लॉग»Current Issues

    सिक्के के दो पहलू

    ShagunBy ShagunSeptember 1, 2020 Current Issues No Comments5 Mins Read
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp
    Post Views: 554

    जी के चक्रवर्ती

    देखा जाये तो पूरी दुनिया मे ही नही विशेषतः हमारे भारत देश में होने वाली हिंसा का सबसे अधिक मामले लड़कियों एवं महिलाओं से जुड़े होते हैं इनके प्रति होने वाली हिंसा का रूप किसी भी तरह का हो सकता है।

    वैसे तो हमारा देश का सामाजिक ताना-बाना पुरूष प्रधान होने के बावजूद हम लोगों ने सदैव नारी को देवी स्वरूप दर्जा वैदिक काल से देते चले आ रहें हैं, लेकिन सिक्के का दूसरा भी पहलू भी है कि एक तरफ तो हम समाज मे महिलाओं को देवी का दर्जा देते हैं तो दूसरी तरफ समाज की महिलाओं पर अत्याचार, शारीरिक हिंसा से लेकर उनको देह व्यापार जैसे अनाधिकृत घिनौनी कार्यो की ओर धकेल देते हैं। यह काम समाज के उन्ही पुरुष वर्ग के लोगों द्वारा ही सम्पन्न किया जाता है।

    आज की महिला समाज पहले की सपेक्षा इस विषय मे जागृत होने के साथ ही साथ जिन क्षेत्रों में पहले पुरुष वर्गों का आधिपत्य हुआ करता था आज उन क्षेत्रों में देश की महिलाये आगे आयीं हैं अब उनको पुरुषों से कमतर नही आंका जासकता है। कभी समाज के अधिकतर लोग उसे अशक्त, असहाय एवं अबला समझ कर उनको दोयम दर्जे पर रख कर जानवरों सादृश्य क्रूर व्यवहार करने से नही चुकते थे इसके साथ ही स्त्री के सदैव कमजोर निकृष्ट असहाय बार-बार कह कर या समझा कर उसे और भी यह अहसास करने पर हम मजबूर कर देते हैं जिसके कारण एक समय वह वास्तव में और भी कमजोर होती चली गयी और एक समय ऐसा भी आया कि हमारे पुरुषवादी समाज ने घर की बहू-बेटी को उनके पैतृक संपत्ति से भी वंचित रखा जाने लगा, खैर यह बात अलग है कि आज देश के नियम-कानून ने उनके प्रति ईमानदारी बरतते हुए उनको उनका हक दिलाने में कामियाब जरूर हुई लेकिन आज भी उनके प्रति हमार पुरुष वर्ग शायद उतना सहज नही हो पाया है।

    आज भी उनका मुकाम पुरूषों से नीचे और पुरुषों के अधीनस्थ ही माना जाता है शायद इसका बहुत बड़ा कारण स्त्री और पुरुष के मध्य शारीरिक से लेकर मानसिक स्वभाव और गुण-धर्म का अलग होना हो सकता है लेकिन इस स्थिति के लिये शायद कहीं न कहीं वे खुद भी जिम्मेदार हैं, क्योंकि स्वमं वे अपने आप को पुरुषों के अधिनस्त समझने और अपने आप को घर-द्वार से बाहर न निकलने वाली एक पर्दा नसीन बन कर राहने में ही अपनी भलाई और मान मर्यादा कियूं समझती हैं?

    दूसरी तरफ स्वास्थ्य की दृष्टि से देखा जाय तो भारत में मातृ मृत्यु दर के हिसाब हम दुनिया में दूसरे नम्बर पर है। जो इस बात को दर्शाता है कि आज भी भारतीय समाज में महिलाओं को परिवार के अन्दर खान-पान पोषण संबंधी भेदभाव जैसे परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। यह बहुत अफ़सोस कि बात है कि ज़्यादातर महिलाएं बेटी शिशु के जन्म का सोच कर तनाव में आ जाती है क्योंकि आज भी हम इक्कसवीं शदी में जीने की दवा जरूर करते हैं लेकिन हमारे घरों की जो महिलाएं बेटे को जन्म देती हैं उन्हें बेटी जन्म देने वाली माताओं के अपेक्षा अधिक सम्मान या उन्हें हाथों हाथ लिया जाता है। आज भी समाज के सोचने की यह स्थिति बेटे और बेटी के प्रति संकीर्ण मानसिकता को दर्शाता है। यहां एक बात कहने की बड़ी उत्सुकता हो रही है कि शायद इस तरह की सोच एवं व्यवहार के वे घर की महिलायें ही जिम्मेदार हैं और यह कहने में भी संकोच नही होता कि औरतें ही औरतों की दुश्मन होती हैं।

    यदि हम गौर करें तो आज से पहले हमारे समाज मे अक्सर यह देखने को मिलता था कि लड़कियों के शिक्षित होने के साथ ही साथ उसके स्वमं उनके द्वारा लिये जाने वाला निर्णय या निर्णय लेने की क्षमता का समाज में कोई स्थान नहीं हुआ करता था। यह अलग बात है कि पहले से आज की इस्थिति में बहुत अन्तर अवश्य हुआ है लेकिन फिर भी देश के बहुसंख़्यक आवादी में आज भी उनका सम्मान किसी के लिए कोई अहमियत नहीं रखता है। तो फिर यहां यह सवाल यह उठता है कि महिलाओं के प्रति हमारे समाज की सोच नकारात्मक क्यों है?

    आज देश मे पैदा होने वाले नवजातों में 97 प्रतिशत लड़कियां कचरे के ढ़ेर में फेंके क्यों दी जाती हैं? बहुत सारे नियम कानूनों में संशोधन आज के दौर में हो रहे हैं या हुये हैं तो फिर इसके लिये भी कोई कानून अवश्य बनाया जाना चाहिये अलबत्ता तो कोई भी लिंग का अनचाहा शिशु पैदा ही न हो और यदि हो भी जाता है तो उसे इस कदर कचरे के ढ़ेर में न फेंक दिया जाये। यदि ऐसे नवजात शिशु कचरे के ढ़ेर में मिले भी तो उस शिशु के जन्म के ज़िम्मेदार व्यक्ति को वही साज मिलना चाहिये जो एक व्यक्ति द्वारा दूसरे व्यक्ति के हत्या किये जाने पर दिया जाता है और शायद इसके लिये प्रथम जिम्मेदार हमारे समाज के पुरुष वर्ग के लोग ही हैं।

    Shagun

    Keep Reading

    भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन: स्वच्छ भविष्य की ओर एक ठोस कदम

    In Paris, fragrance is bottled; in Banaras, the fragrance is in the very air—and that is a truly wonderful feeling.

    पेरिस में खुशबू बोतल में होती है, और बनारस में खुशबू हवा में है यह बहुत अच्छा अहसास है

    Parents have been subjected to such manipulation for a very long time—it is simply that awareness has increased now.

    खेल तो पेरेंट्स के साथ बहुत पहले से होता आया है -जागरूकता अब बढ़ी

    The residents of Banda are filled with pride upon seeing Banda's name ranked among the very best in the world!

    विश्व में बांदा का अव्वल दर्जे में नाम देख गर्व में बांदावासी!

    A Growing Crisis on the Path to Peace: Uncertainty Over Iran Ceasefire Amid Washington's Attacks on Trump

    शांति की राह में बढ़ता संकट: ट्रंप पर वाशिंगटन हमले के बीच ईरान युद्ध-विराम की अनिश्चितता

    This remarkable figure single-handedly dug 16 ponds and planted over 2,000 banyan trees.

    प्रकृति प्रेमी इस महान शख्सियत ने अकेले खोदे 16 तालाब, लगाए 2000 से ज्यादा बरगद के पेड़

    Add A Comment
    Leave A Reply Cancel Reply

    Advertisment
    Google AD
    We Are Here –
    • Facebook
    • Twitter
    • YouTube
    • LinkedIn

    EMAIL SUBSCRIPTIONS

    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading
    About



    ShagunNewsIndia.com is your all in one News website offering the latest happenings in UP.

    Editors: Upendra Rai & Neetu Singh

    Contact us: editshagun@gmail.com

    Facebook X (Twitter) LinkedIn WhatsApp
    Popular Posts
    Joke of the Day: Trump's Mess

    जोक ऑफ़ द डे : ट्रम्प का रायता

    April 30, 2026

    भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन: स्वच्छ भविष्य की ओर एक ठोस कदम

    April 30, 2026
    In Paris, fragrance is bottled; in Banaras, the fragrance is in the very air—and that is a truly wonderful feeling.

    पेरिस में खुशबू बोतल में होती है, और बनारस में खुशबू हवा में है यह बहुत अच्छा अहसास है

    April 30, 2026
    Deepika Padukone in Action Mode Even During Pregnancy, Set to Shine in ‘Raaka’

    ‘राका’ में दीपिका पादुकोण को मिला पावरफुल रोल

    April 29, 2026
    936 Youths Receive Appointment Letters in UP Police; Declare: "Yogi Has Broken the Back of Corruption!"

    यूपी पुलिस में 936 युवाओं को मिले नियुक्ति पत्र, बोले- योगी ने तोड़ी भ्रष्टाचार की कमर!

    April 29, 2026

    Subscribe Newsletter

    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading
    Privacy Policy | About Us | Contact Us | Terms & Conditions | Disclaimer

    © 2026 ShagunNewsIndia.com | Designed & Developed by Krishna Maurya

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.

    Newsletter
    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading