किसानों के हित के लिए सदन से सड़क तक लड़ाई लड़कर इस काले कानून का अंत करायेगी कांग्रेस, 25 सितम्बर से 31 अक्टूबर तक प्रदेशव्यापी आन्दोलन
कांग्रेस का आरोप : संसद में बगैर बहस कराये, बिना मत विभाजन को स्वीकार किये तानाशाहीपूर्ण तरीके से किसान विरोधी पारित किये गये तीन कृषि कानून 1.कृषि उपज, व्यापार और वाणिज्य विधेयक 2.मूल्य आश्वासन एवं कृषि सेवाओं पर किसान समझौता 3. आवश्यक वस्तुु संशोधन विधेयक(अनाज, दालें, खाद्य तेल, आलू, प्याज यह अनिवार्य वस्तु नहीं मानी जाएगी।) सब बाजार के हवाले करना किसानों के हितों के खिलाफ सबसे बड़ा विश्वासघात है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू ने प्रेसवार्ता में कहा कि उपरोक्त तीनों नये कृषि कानूनों में एमएससी का जिक्र न किये जाने से -सरकारी अनाज मंडिया सब्जी तथा फल मंडिया समाप्त हो जायेंगीं जिसकी वजह से किसान पूंजीपतियों द्वारा तय किये गये मूल्य पर अपने उत्पादित फसल को बेंचने के लिए बाध्य हो जाएगा। अनाज मण्डी, सब्जी व फल मण्डी खत्म करने से कृषि उपज व्यवस्था पूरी तरीके से नष्ट हो जाएगी और पूंजीपतियों को फायदा हेागा। क्योंकि मण्डियां किसान की फसल के सही वजन और सही मूल्य पर बिक्री की गारंटी होती है।
कांग्रेस पार्टी की मांग है कि एक देश-एक समर्थन मूल्य के तहत पूरे प्रदेश में सारी फसलों अनाज, फल, सब्जी तीनों चीजों के पूरे देश में न्यूनतम समर्थन मूल्य तय होना चाहिए तथा नये कानून में एमएसपी का जिक्र किया जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि नये कानून के तहत किसान के किसी भी उपज की खरीद एमएसपी से नीचे नहीं होनी चाहिए।

नये कानून में कृषि उत्पाद का न्यूनतम समर्थन मूल्य तय करने का जिक्र न होना इस बात की तरफ इशारा करता है कि सरकार ने कृषि व्यवस्था को पूरी तरह से कार्पोरेट और पूंजीपतियों के हवाले कर दिया है। इससे देश की कृषि व्यवस्था जिसमें 86.4 प्रतिशत किसान जिसकी जोत 2 एकड़ से कम है वह नई प्रतिस्पर्धात्मक व्यवस्था से बाहर हो जायेगा और किसान अधिकार विहीन हो जाएगा उसकी हैसियत मात्र एक मजदूर की हो जाएगी।(केवल मेहनत और उत्पादन करे)
आवश्यक वस्तु अधिनियम की सूची से अनाज, दालें, खाद्य तेल, आलू, प्याज आदि बुनियादी चीजों को बाहर करने से कारोबारी जमा खोरी करना शुरू कर देंगे, कीमतों में अस्थिरता आ जायेगी और देश में कालाबाजारी बढ़ जाएगी जिसका खामियाजा देश की बेहाल परेशान जनता को भुगतना पड़ेगा।
प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि केन्द्र सरकार द्वारा बनाये गये इस काले कानून से जहां एक तरफ हमारे देश और प्रदेश के किसान अधिकारविहीन और बेचारा बनकर रह जायेंगे वहीं एक बहुत बड़ा विभाग मंडी परिषद जिसमें लाखों लोग नौकरी से जुड़े हैं और उनके परिवार का भरण पोषण हो रहा है मंडी परिषद और विपणन समितियों का समापन हो जाएगा जिसमें सेवा दे रहे लाखों लाख कर्मचारियों को नौकरी से हाथ धोना पड़ेगा। मंडी परिषद की आय से ग्राम स्तर तक जो विकास कार्य हो रहे हैं वह बन्द हो जायेंगे।
अजय कुमार लल्लू ने कहा कि केन्द्र और प्रदेश की सरकार तथा भाजपा के नेता यह दुष्प्रचार कर रहे हैं कि नये कानून की तमाम बातें कांग्रेस के घोषणा पत्र में शामिल थीं यह पूरी तरह से मिथ्या, भ्रामक और झूठ है।
सरकार द्वारा हड़बड़ी में एक महीना पूर्व रवी फसल की घोषित की गयी नई एमएसपी में इतिहास की सबसे कम बढ़ोत्तरी की गयी है। जो मात्र 2.6 प्रतिशत है जबकि इस दौरान उर्वरक, डीजल और जरूरी चीजों के दाम 60 प्रतिशत से ज्यादा बेतहाशा बढ़े हैं।
प्रेसवार्ता में प्रदेश अध्यक्ष ने इस नये काले कानून के खिलाफ कल 25 सितम्बर से 31 अक्टूबर तक व्यापक जनान्दोलन चलाने की घोषणा की। उन्होने कहा कि आज पूरे प्रदेश में इस काले कानून के खिलाफ प्रेसवार्ता की जा रही है।







