कहा 6 दलित और 1 पिछड़े वर्ग के अभियंता को साजिश कर हटाया, आरक्षण समर्थक उपमुख्यमंत्री से मिलकर करेंगे इसका विरोध और पुनर्विचार की करेंगे मांग
प्रदेश के लोकनिर्माण विभाग में 2 दिन पहले 7 अधिशाषी अभियंता को सेवा से जबरिया सेवानिवृति दी गयी जिसमे 6 दलित अधिशाषी अभियंता और 1 पिछड़े वर्ग का अधिशाषी अभियंता है जिसको लेकर आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति ने आज पूरे प्रदेश के अपने सभी विभागों के जिला संयोजको से बात की पूरे प्रदेश में आरक्षण समर्थक कार्मिको में इस बात को लेकर बड़ी नाराजगी और गुसा है कि सपा सरकार में दलित कार्मिको को रिवर्ट कर अपमानित किया गया और अब बीजेपी सरकार में भी दलित अभियंताओ और पिछड़े अभियंता को जबरिया सेवानिर्वत्त किया गया।
आरक्षण समर्थकों ने एक प्रेसनोट जारी कर कहा कि इस मामले को लेकर पूरे प्रदेश के दलित व पिछड़े अभियंताओ कार्मिको में उबाल है ऐसे में प्रदेश सरकार पूरे मामले पर हस्तक्षेप कर सभी अभियंताओ को पुनः सेवा का अवसर दे।
संघर्ष समिति ने कहा कि कोई भी नीति पारदर्शी नहीं होगी तो निश्चित रूप में सबसे ज्यादा उसका नुकसान दलित व पिछड़े वर्ग के अभियंताओ और कार्मिको का होगा बहुत जल्द ही संघर्ष समिति प्रदेश के उपमुख्यमंत्री श्री केशव प्रसाद मौर्य से मिलकर इसका विरोध करेगा और इस निर्णय पर पुनर्विचार की मांग करेगा ।
आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति ने कहा कि प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री से हम यह मांग करते हैं कि पिछले पांच वर्षो में सभी विभागों के कार्मिको को जो दंड किसी भी मामले पर मिला उस पर स्वेत पत्र जारी करा दें इससे स्वता पता चल जायेगा की उसमे दलित व पिछड़े वर्ग के कितने कार्मिक और अभियंता है।
इस मामले पर आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति,उप्र के संयोजकों अवधेश कुमार वर्मा, के बी राम डा रामशब्द जैसवारा, आरपी केन, एसपी सिंह अनिल कुमार पीएम प्रभाकर, अजय कुमार ने कहा अनेकों नजीर है इस प्रकार की कार्यवाही के कि दलित व पिछड़े वर्ग के अभियंताओ के साथ विद्देशपूर्ण भाव से कार्यवाही की जाती है। उन्होंने कहा कि एक बार अनेकों दलित अभियंताओ को विजली विभाग में जबरिया सेवानिर्वत्त दी गयी थी, जिसमे एक दलित अधिशाषी अभियंता ने लम्बी लड़ाई लड़ी और अंतता उस दलित अधिशाषी अभियंता को सुप्रीम कोर्ट से जीत मिली और यह सिद्ध हुआ कि दलित अभियंता के साथ भेदभाव पूर्ण कार्यवाही की गयी थी जानबूझ कर पहले भी दलित व पिछड़े वर्ग के अभियंताओ को दंड दिया जाता है और फिर उसी आधार पर उनके खिलाफ कार्यवाही की जाती है।







