उपभोक्ता परिषद ने उठाया सवाल: 10 प्रतिशत हो सकती थी दरों में कमी ऐसे में आयोग में दाखिल होगी पुनर्विचार याचिका
प्रदेश में निजीक्षेत्र की पहली कंपनी नोएडा पावर कंपनी द्वारा आयोग में दाखिल बिजलीदर व ट्रूप सम्बन्धी टैरिफ याचिका 2020-21 ट्रू-अप 2018-19 व वर्ष 2019-20 के एपीआर पर विद्युत नियामक आयोग ने अपना बड़ा फैसला सुनाते हुए एनपीसीएल क्षेत्र के उपभोक्तओ की बिजली दरों में भी कोई इजाफा नहीं किया है जो दर पूरे प्रदेश की दूसरी बिजली कम्पनियो में यथावत लागू है वही यहाँ भी यथावत लागू रहेगी। एक बात तो तय हो गयी की निजी क्षेत्र की कंपनी पर उत्तर प्रदेश में पहली बार उपभोक्ताओ का सैकड़ो करोड़ निकला फिर भी बिजली दरो में कमी नहीं हुई ऐसे में निजीकरण की बात करना बड़ा धोखा है इसलिए सरकार अब निजीकरण की बात बंद करे।
उपभोक्ता परिषद की लम्बी लड़ाई काम आयी:
एनपीसीएल के वित्तीय मानको में विद्युत नियामक आयोग की पूर्ण पीठ चेयरमैन आरपी सिंह सदस्य के के शर्मा व बी के श्रीवास्तव ने बड़ी कटौती करते हुए एनपीसीएल को बड़ा झटका दिया है। पहली बार निजी क्षेत्र की कंपनी पर नोएडा के उपभोक्ताओ को 148 करोड़ रुपया नोएडा पावर कंपनी पर निकला है । इस मामले में अगर आयोग चाहता तो अबिलम्ब वहा 10 प्रतिशत बिजली दरों में कमी हो जाती वैसे उपभोक्ता परिषद की विधिक आपतियो के सामने एनपीसीएल की बोलती बंद हो गयी।
मालूम हो कि वैसे वर्ष 2020 -21 में एनपीसीएल के ऊपर उपभोक्ताओ का कुल 407 करोड़ निकला था, लेकिन विद्युत नियामक आयोग ने नोएडा पावर कंपनी के उस बिजली खरीद याचिका धारीवाल के मामले मे प्रोविसनली रुपया 258 करोड़ पहले ही मान लिया है कि एनपीसीएएल को बिजली खरीद पर देना होगा इसलिए उसको घटाने के बाद भी उपभोक्ता का कुल 148 करोड़ नोएडा पावर कंपनी पर निकल रहा यह पहला मामला है जहा निजी क्षेत्र की कंपनी जिसने 13 करोड़ का गैप दिखाया था उल्टे उस पर ही उपभोक्ता परिषद् की लम्बी लड़ाई से सैकड़ो करोड़ निकल आया।
उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा चुकी नोएडा पावर कंपनी निजी कंपनी है उपभोक्ताओ का उस पर जो 148 करोड़ रुपया निकला रहा है उसके अनुपात में बिजली दर में 10 प्रतिशत की कमी करके एक सन्देश नियामक आयोग को देना चाहिए था जहा नोएडा पावर कंपनी ने कुल साल भर में 1437 करोड़ का राजस्व माँगा था वही बिना बिजली दर बढ़ाये उस को 1639 करोड़ राजस्व मिलेगा ऐसे में बिजली दरों में कमी करना बहुत जरूरी था जल्द ही उपभोक्ता परिषद् नियामक आयोग में एक पुनर्विचार याचिका दाखिल कर 10 प्रतिशत बिजली दरों में कमी की मांग उठएगा।








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