स्मार्ट मीटर प्रकरण में एसटीएफ रिपोर्ट पर आगामी 21 दिसम्बर को शासन में होने वाली है उच्चस्तरीय मीटिंग
जहा प्रदेश में जन्मास्टमी के दिन लाखो स्मार्ट मीटर विद्युत उपभोक्ताओ की बत्तीगुल की जाँच एसटीएफ द्वारा सरकार को सौपे जाने के बाद 21 दिसम्बर को मुख्यसचिव की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय मीटिंग होने जा रही है वही दूसरी ओर आज तक चाहे स्मार्ट मीटर भार जंपिंग का मामला हो चाहे केंद्रीय लेबोटरी की जाँच रिपोर्ट दबाने का मामला हो या फिर पुरानी तकनीकी आधारित मीटर खरीद का मामला हो या फिर बिना सफलता पूर्वक यूजर एक्सेप्टेंस टेस्ट यूएटी टेस्ट किए बिना स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओ के घर लगाने का मामला हो आज तक किसी भी दोषी के खिलाफ कार्यवाही नहीं की गयी उल्टे अभियंताओ की एक लाबी स्मार्ट मीटर को सफल बताकर पुनः उपभोक्ताओ के यहाँ लगवाने की तैयारी में जुटी है सबसे बड़ा सवाल यह है कौन सी ऐसी ताकत है जिसके दबाव में आज तक स्मार्ट मीटर प्रकरण में किसी के ऊपर कोई कार्यवाही नहीं हुई प्रदेश का उपभोक्ता प्रदेश सरकार से इस पर स्वेत पत्र चाहता है
उपभोक्ता परिषद ने कहा कि उपभोक्ताओ के घर में लगने वाला मीटर रूपी तराजू की विस्वसनीयता जानने का हर उपभोक्ता को पूरा अधिकार है उपभोक्ता परिषद माननीय मुख्यमंत्री जी से मांग करता है इस पूरे मामले पर हस्तक्षेप करते हुए दोषियों के खिलाफ कठोर कार्यवाही कराए और शासन में होने वाली मीटिंग में किसी भी बिजली विभाग के उच्चाधिकारी को न शामिल किया जाय जिससे पारदर्शिता बनी रहे क्यों की पावर कार्पोरेशन की एक लाबी मीटरनिर्माता कम्पनियो व ईईएसएल के सपोर्ट में खड़ी है जिनको उपभोक्ताओ से कोई सरोकार नहीं।
उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा नेे कहा स्मार्ट मीटर बत्ती गुल होने के बाद आनन-फानन में पावर कार्पोरेशन ने एक 10 सदस्यीय टीम बनाई और कहा की टीम 3 महीने में स्मार्ट मीटर सिस्टम की यूजर एक्सेप्टेंस टेस्ट यूएटी कराकर रिपोर्ट प्रस्तुत करे लेकिन यह बहुत ही चौकाने वाला मामला है की बिजली विभाग के अभियंता और ईईएसएल के अधिकारी 5 माह से लगे है कि टेस्ट की तैयारी करने में भाई अगर अभी भी टेस्ट की तैयारी हो रही है तो 12 लाख स्मार्ट मीटर जल्दबाजी में लगवाने के पीछे किसका दबाव था इसका भी खुलाशा होना बहुत जरूरी है।
माननीय ऊर्जामंत्री जी द्वारा अनेको बार प्रबंधन को दोषियों के खिलाफ कठोर कार्यवाही का निर्देश दिया है सबसे बड़ा सवाल यह है जब नियामक आयोग ने भी स्मार्ट मीटर पर होने वाले खर्च को टैरिफ से अलग रखते हुए खारिज कर दिया और कहा की रोेल आउट प्लान के मुताबिक यह आत्मनिर्भर ओपेक्स मॉडल था। फिर भी परियोजना फैल होने को है और कुछ अभियंता व उच्चाधिकारी इस जुगत में लगे है की कब पुनः स्मार्ट मीटर लग्न सुरु हो सब मिलाकर इसमे जो भी उच्चाधिकारी व अभियंता शामिल है माननीय मुख्यमंत्री जी को कठोर कार्यवाही करके एक कड़ा सन्देश देना बहुत जरूरी हो गया है ।







