उपभोक्ता परिषद ने खोला मोर्चा, आयोग चेयरमैन ने कहा पूरे मामले पर आयोग की नजर कानून से ऊपर कोई नहीं
लखनऊ, 21 दिसंबर, 2020: मध्यांचल विद्युत वितरण निगम अंतर्गत बदायू में 2 दिन पूर्व हजारो किसानों के निजी नलकूप के 5 व 7.5 हार्सपावर विद्युत भार को सीधे 10 हार्स पावर बढ़ाने के मामले पर उपभोक्ता परिषद की शिकायत पर प्रबंध निदेशक मध्यांचल विद्युत वितरण निगम ने उठाया तो आदेश तत्काल प्रभाव से निरस्त किया गया।
परिषद् ने कहा कि पूरा मामला ऊर्जा मंत्री रखा गया है ऊर्जा मंत्री ने कहा इस पूरे मामले की मैं स्वयं समीक्षा काऊंगा और कोई भी दोषी बक्सा नहीं जायेगा यह बहुत ही गंभीर मामला है।
पूरे प्रदेश में लम्बे समय से गुपचुप किसानो के निजी नलकूप के विद्युत भार को सामूहिक तरीके से 5 व 7.5 हार्सपावर से सीधे 10 हार्स पावर करके उनके विद्युत बिल को दोगाना किए जाने के मामले को उपभोक्ता परिषद ने गम्भीरता से लेते हुए पूरे मामले की जानकारी विद्युत नियामक आयोग चेयरमैन आरपी सिंह से मुलाकात कर उन्हे अवगत कराया और अनुरोध किया कि विद्युत वितरण संहिता 2005 की धारा 6.9 का लगातार उलघन पर आयोग बिजली कम्पनियो के खिलाफ सख्त कदम उठाये।
नियामक आयोग चेयरमैन ने परिषद अध्यक्ष को अस्वाशन दिया किसी भी कंपनी में नियम विरुद्ध आदेश लागू नहीं होने पायेगा, आयोग पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है नियमो से ऊपर कोई नहीं ।
वही दूसरी ओर हजारो किसानो के निजी नलकूप के विद्युत भार को बदायू जनपद में एक सामूहिक आर्डर कर बिना विद्युत वितरण संहिता का पालन किए बिना 5 व 7.5 हार्सपावर से सीधे 10 हार्स पावर बढ़ा दिया गया था जिसको लेकर उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने मध्यांचल विद्युत वितरण निगम के प्रबंध निदेशक से मुलाकात कर पूरे मामले की जानकारी देते हुए साक्ष्यों सहित एक पत्र सौपा और तुरंत नियम विरुद्ध आदेश निरस्त करने की मांग उठाई और कहा इस प्रकार के आदेश सरकार की छवि को धूमिल करने वाला है और कुछ अभियंता निरंकुश होकर वितरण संहिता का उल्लघन कर रहे हैं। ऐसे में ऐसे अभियंताओ के खिलाफ कठोर कदम उठाया जाय।
प्रकरण को संज्ञान में लेते हुए प्रबंध निदेशक मध्यांचल सूर्य कुमार गंगवार ने बदायू के अधीक्षण अभियंता को निर्देश भेजकर नियम विरुद्ध आदेश को तत्काल प्रभाव से निरस्त कराया और उसकी एक कॉपी उपभोक्ता परिषद को सौपा और सभी अपने क्षेत्रीय अभियंताओ को निर्देश दिया कि इस प्रकार की कोई नियम विरुद्ध कार्यवाही आगे बिलकुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी। विद्युत वितरण संहिता के तहत ही आगे कोई भी कार्यवाही की जानी चाहिए।
उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा पूरे प्रदेश में किसानो को कृषि फीडर पर करके उनकी विद्युत आपूर्ति 10 घंटे कर दी गयी जो पहले 16 से 18 घंटे थीे और उनसे बिजली का बिल वही वसूल किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जब पूरे देश में किसान आंदोलित है तो सरकार की छवि धूमिल करने के लिए कुछ अभियंता मनमानी तरीके से उनके ट्वेबल के विद्युत भार को विद्युत वितरण संहिता 2005 के प्राविधानों का उल्लघन कर बढ़ावा रहे हैं जिससे उनकी बिजली बिल ढेड़ से दोगुना तुरंत हो गया। उन्होंने कहा कि इस कोरोना कल में इस प्रकार की अमानवीय किसान विरोधी कार्यवाही बहुत ही निंदनीय है इसके पहले दक्षिणांचल में अभी कुछ माह पहले ऐसे ही हुवा जिस पर माननीय ऊर्जामंत्री से शिकायत के बाद मामला शांत हुआ था।







