साल उसी के नाम!
जिसकी गोटी लाल है, जिसका मोटा पर्स।
उसकी किस्मत में लिखा, नये वर्ष का हर्ष ॥
नये वर्ष का हर्ष, नये फूटेंगे कल्ले,
नाचेगी हर खुशी, झमाझम बल्ले-बल्ले,
पूरे थर्टी फर्स्ट, चलेगी रम या ह्विस्की।
साल उसी के नाम, लाल है गोटी जिसकी॥

डूबा यूं हुड़दंग में, नये वर्ष का हर्ष।
तन मानो अंगरेज है, पर मन भारतवर्ष ।
पर मन भारतवर्ष, जोश की बहती गंगा,
बच्चे-बूढ़े-युवा, हुआ सबका मन चंगा,
रहा न कोई शेष, फला सबका मनसूबा।
फिर आया नववर्ष, हर्ष में भारत डूबा ॥
– सी. एम. त्रिपाठी







