बुंदेलखंड में ज़ुबां पे छाया सिंगर सीपी दा का नाम, विदेशों में भी किया जा रहा है पसंद
- राहुल गुप्ता
21वीं सदी के दूसरे दशक का आगाज एक ऐसा वर्ष रहा जिसमें लगभग सात माह समूचे विश्व में भयाक्रांत अंधेरा रहा। सूरज निकलता जरूर था पर उम्मीदों की किरण धरा तक पहुंच ही नहीं पाती थीं।
सात माह से अधिक लंबा तिमिर, जहां सबके आशा रूपी उजाले को अपने आगोश में सुलाने को आतुर था वहीं वीर भूमि बुंदेलखंड की धरा बांदा पर एक छिपी विलक्षण प्रतिभा का सितारा दुनिया को नजर आने लगा।
सोशल मीडिया में बांदा जिले के अलावा देश व विदेश में इस सितारे के लिए लाइक और कमेंट की बौछारें होने लगीं।
इस लंबे तिमिर के दरमियान यह सितारा लोगों के आनंद का स्रोत बन गया। जब पूरी धरा पे उम्मीद की किरणें सोयी हुई थीं उस वक्त कुछ नया कर गुजरने की प्रेरणा बन गया। एक सहृदय समाजसेवी कब आम से खास हो गया उसे पता ही नहीं चला। रातों-रात लोग उनकी आनन्द भरी कला के दीवाने हो गये।
उस हस्ती का नाम अब यहां के बच्चों-बच्चों की ज़ुबां पर है। राह चलते किसी की भी नज़र जब बुंदेलखंड के चहेते इस नवोदित सितारे पर पड़ती है तो लोग सेल्फी लेकर उसे अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर जरूर अटैच कर खुद को गौरवान्वित करते हुए अपने इस चहेते सितारे को सम्मान देते नज़र आते हैं। जिले का छात्रसंघ, नेतागण, व्यापारी और समाजसेवी सभी इस सहृदय नवोदित सितारे के समर्थन में हैं। तमाम राजनीतिक कार्यक्रमों में इनके शामिल हो जाने मात्र से भीड़ अपने आप एकत्रित होते देखी गयी है। बांदा की स्थानीय मीडिया में भी बांदा के अनमोल रत्नों में एक सीपी दा भी छाये हुए हैं।
पेशे से सरकारी अध्यापक ( प्रधानाचार्य) हैं सीपी दा
बहुत व्यस्तता होने के कारण वो अपने अंदर छिपी एक अन्य प्रतिभा को पहचान न सकें। कोरोना काल ने उन्हें अपने अंदर छिपी संगीत और गायन की प्रतिभा को निखारने का मौका दिया बस था कि इनके फैन्स और फालोवर्स की संख्या में लगातार इजाफा होता चला गया। सबसे विलक्षण बात यह है कि संगीत और गायन की अलग से कभी कोई शिक्षा नहीं ली यहां तक की बाथरूम सिंगर भी नहीं थे बस अचानक ही इस क्षेत्र में आकर लोगों को आनंदित कर रहे हैं। अपने माता-पिता श्रीमती पार्वती-श्री सियाराम जी का मान बढ़ाने के साथ- साथ अपनी जन्मस्थली का भी नाम रोशन कर रहे हैं।
अन्य देशों में भी पसंद किए जा रहे हैं वीडियो
शुरूआती दौर पे यही 4 अगस्त 2020 को जब इन्होंने पहला गाना ” फूलों का तारों का सबका कहना है” गाया तो इनकी धर्मपत्नी श्रीमती गीता गुप्ता जो कि बांदा जिले की अतर्रा तहसील से हैं, उन्होंने विश्व मंच ( सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म) में गाने के लिए प्रेरित किया। लेकिन शुरूआती दौर पर नये काम पे परेशानियां भी आती हैं। आस पास के लोग ताना मारते, कभी हंसते कभी चिढ़ाते। इन सबकी परवाह किए बगैर सीपी गुप्ता अपनी नयी दुनिया की धुन में रमे हुए आगे बढ़ते रहे। और बांदा की जनता धीरे-धीरे उन्हें प्यार से सीपी दा बुलाने लगी।
कोरोना काल से पहले वो जहां व्यस्तता की जाल में उलझे थे, दुनिया को दु:ख देने वाले उस काल ने इन्हें सुलझना सिखा दिया। ईश्वर की दी हूई उपहार स्वरूप मानव जिंदगी को खुशमिजाजी से रहना सिखा दिया।गायन के साथ इनकी खुशमिजाजी भी लोगों को बहुत रास आ रही है।








4 Comments
This article related to CP Da is really enjoyable. It is definitely a matter of pride for Bundelkhand and Banda. We too are residents of Bundelkhand, so this news gave us many times of happiness.
Badhai ho sir apko ap to chha rhe h God se hmari yhi prathna h ki ap aise ak sitare ki trh sare sansar me aise chamke👏🏻
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