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    कवि, दार्शनिक और भारतीय साहित्य के नोबल पुरस्कार विजेता रवींद्रनाथ टैगोर

    ShagunBy ShagunMay 7, 2021Updated:May 8, 2021 Featured No Comments4 Mins Read
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    रवींद्रनाथ टैगोर जयंती विशेष:

    जब से पश्चिम बंगाल राज्य में विधान सभा चुनाव हुये हैं, तब से रवींद्रनाथ टैगोर की यादें ताजा हो गयी है। प्रतिवर्ष 7 मई के दिन देश के पश्चिम बंगाल राज्य के अतिरिक्त सम्पूर्ण विश्व में रवींद्रनाथ टैगोर जयंती मनाये जाने की परम्परा आज तक कायम है। देश में आज 7 मई वर्ष 2021 के दिन रवींद्रनाथ टैगोर की 159 वीं जयंती मनाई जा रही है।

    रवींद्रनाथ टैगोर जयंती हमारे देश में ही नही बल्कि सम्पूर्ण विश्व मे मनाया जाता है। जहां तक उनके जन्म दिन को मनाये जाने की बात करें तो रवींद्र नाथ जयंती के नाम से विशेषतः देश के पश्चिम बंगाल राज्य में एक सांस्कृतिक उत्सव के रूप में मनाये जाने की परम्परा आज भी कायम है।

    रवींद्र जयंती बांग्ला कैलेंडर के अनुसार प्रतिवर्ष बैशाख महीने के 25 वें दिन मनाई जाती है। रवींद्रनाथ टैगोर का जन्म 7 मई वर्ष1861 को कोलकाता के जोड़ासाँको ठाकुरबाड़ी में हुआ था। उनके पिता का नाम देवेन्द्रनाथ टैगोर और माता शारदा देवी थीं। उनकी आरम्भिक शिक्षा कलकत्ता के एक प्रतिष्ठित स्कूल “सेंट जेवियर” स्कूल में हुई थी। बचपन से ही उनमें बैरिस्टर बनने की इच्छा प्रबल थी। वर्ष 1878 में इंग्लैंड के ब्रिजटोन में पब्लिक स्कूल में उन्होने अपना नाम लिखाया फिर लन्दन विश्वविद्यालय में कानून का अध्ययन किया लेकिन वर्ष 1880 में बिना डिग्री प्राप्त किए ही वे पुनः स्वदेश लौट आये और फिर सन् 1883 में मृणालिनी देवी के साथ उनका विवाह सम्पन्न हुआ।

    टैगोर की माता का देहांत उनके बचपन में ही हो गया था और उनके पिता व्यापक रूप से एक यात्रा करने वाले व्यक्ति हुआ करते थे, इसलिये उनका पालन-पोषण घर के नौकरों द्वारा ही हुआ। टैगोर परिवार बंगाल पुनर्जागरण के समय उसमे अग्रणी था उन्होंने साहित्यिक पत्र पत्रिकाओं का प्रकाशन भी किया; उनके द्वारा बंगाली एवं पश्चिमी शास्त्रीय संगीत रंगमंच और पटकथाएं नियमित रूप से प्रदर्शित होती रही। रविन्द्र नाथ टैगोर के पिता ने उस समय के कई पेशेवर ध्रुपद संगीतकारों को अपने घर के बच्चों को भारतीय शास्त्रीय संगीत की शिक्षा देने के लिए उन्हें आमंत्रित कर उन्हें तालीम दिलवाया, टैगोर के दूसरे भाई सत्येंद्रनाथ पूर्व में सभी यूरोपीय सिविल सेवा के लिए नियुक्ती पाने वाले पहले भारतीय व्यक्ति थे।

    रवींद्रनाथ टैगोर को हम रवींद्रनाथ ठाकुर के नाम से भी जानते है। रवींद्रनाथ टैगोर एक विश्वविख्यात कवि, साहित्यकार, दार्शनिक और भारतीय साहित्य के नोबल पुरस्कार विजेता थे। उन्हें गुरुदेव के नाम से भी जाना जाता है इनके अतिरिक्त उन्हें कबीगुरू, गुरुदेव एवं बिस्वाबकी के नाम से भी जाना जाता है।

    बांग्ला साहित्य एवं देशवासियों के मध्य बंगला भाषा के माध्यम से भारतीय सांस्कृतिक में चेतना लाने और उनमे नयी स्फुर्ती प्रदान करने वाले एक युगदृष्टा के रूप में जाने जाते हैं। वे एशिया के प्रथम नोबेल पुरस्कार से भी सम्मानित किये गये प्रथम भारतीय व्यक्ति थे। वे एकमात्र ऐसे भारतीय कवि हैं जिसकी दो रचनाएँ दो देशों के राष्ट्रीय गान स्वरूप अपनाया गया जिनमे से पहला देश भारत के राष्ट्र-गान ‘जन गण मन’ और बाँग्लादेश के राष्ट्रीय गान ‘आमार सोनार बाँग्ला’ गुरुदेव रविन्द्रनाथ टैगोर की ही रचनाएँ हैं।

    कविता, गीत, कहानी, और नाटक के वे सिद्धहस्त कलमकर थे। रविन्द्र नाथ टैगोर के लेखन में भारत के जन साधारण लोगों के जीवन, साहित्यिक आलोचना, दर्शन एवं सामाजिक मुद्दों के चित्रण बखूबी देखने को मिलता हैं। उनके अधिकांश लेखन बांग्ला भाषा में होने के कारण बाद में उनके लेखन व साहित्यिक सामग्रियों को विश्व व्यापी लोगों के लिए उपलब्ध करने के दृष्टिकोण से उसका अंग्रेजी में अनुवाद किया गया है।

    रविन्द्र नाथ टैगोर के 150 वीं जयंती के दौरान उनके समस्त रचनावलियों का एक (कालनुक्रोमिक रविन्द्र रचनावली) नामक एक संकलन बंगला भाषा कालानुक्रमिक क्रम में प्रकाशित किया गया है। हार्वर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस ने विश्व-भारती विश्वविद्यालय के साथ अंग्रेजी में उपलब्ध टैगोर की रचनावलियों की बृहद संकलन “द एसेंटियल टैगोर”, को प्रकाशित करने के लिए सहयोग किया है यह फकराल आलम और राधा चक्रवर्ती द्वारा संपादित किया गया था जो टैगोर के जन्म की 150 वीं वर्षगांठ की निशानी धरोहर स्वरूप हैं। – प्रस्तुति: जी के चक्रवर्ती

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