टोक्यो ओलिम्पिक में वैसे तो भारत के खिलाड़ियों ने अच्छा प्रदर्शन किया है लेकिन एक गोल्ड भारत की झोली में भी आया, जिसे किसान पुत्र नीरज चोपड़ा भाला फेंक प्रतियोगिता में दिलाया। मालूम हो कि टोक्यो ऑलम्पिक में मीराबाई चानू,पी वी सिंधु, लवलीना बोरगोहेन, रविकुमार दहिया, बजरंग पुनिया सहित सभी विजयी खिलाड़ियों का कार्य बेहद सराहनीय रहा है। आज इस ख़ुशी के मौके पर प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने नीरज चोपड़ा को फ़ोन पर बधाई दी।

इस टोक्यो ओलंपिक में भारत ने असाधारण प्रतिभा का प्रदर्शन करते हुए हॉकी में कांस्य पदक हासिल करने में सफलता प्राप्त की है। इस जीत के साथ ही भारतीय टीम का नाम इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया है। हालांकि एक दौर में विश्व हॉकी में भारत ने अपने जीवट से अपनी बादशाहत कायम की थी, और वह लंबे समय तक चली थी लेकिन करीब चार दशक पहले मॉस्को ओलंपिक के बाद देश ने इस खेल में किसी बड़ी कामयाबी की तलाश में ही अपना वक्त गुजारा।
अब टोक्यो ओलंपिक में भारतीय टीम ने एक बार फिर जिस दमखम का प्रदर्शन किया, उसने इकतालीस साल के दौरान इस खेल में देश के सपनों और उम्मीदों को न सिर्फ लगभग पूरा किया बल्कि एक नई उड़ान दे दी। हमारी टीम ने जर्मनी के साथ मैदान में जिस स्तर के खेल और संघर्ष का प्रदर्शन किया, उसे अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि माना जाना चाहिए। इस मैच की एक खास बात यह रही कि किसी भी टीम के पक्ष में खेल एकतरफा नहीं हुआ और जीत के लिए जोरदार जद्दोजहद हुई।

एक समय इस खेल में हमारे देश का डंका बजता था लेकिन लंबे समय से हर बार पदकों की दौड़ तक से बाहर होते रहने के कारण आम लोगों की उम्मीदें धुंधली होने लगी थीं। इसका एक कारण यह भी है कि लगातार ठोस नतीजे हासिल न होना दिलचस्पी कम कर देता है। किंतु इसकी भी वजहें रहीं।
एक ही समय में क्रिकेट को पर्याप्त बढ़ावा मिला और हॉकी या फुटबॉल जैसे खेलों को अपने भरोसे छोड़ दिया गया। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इस साल ओलंपिक तय होने के बावजूद खेलों के लिए दी जाने वाली राशि में दो से तीन करोड़ रुपए की कटौती कर दी गई। जबकि इन खेलों में देश के आम लोगों तक की स्वाभाविक दिलचस्पी रही है। इसके बावजूद सफलता प्राप्त करने का मतलब यह है कि देश में प्रतिभाओं की कमी नहीं है। जरूरत है तो केवल इस बात की कि उनको पर्याप्त प्रशिक्षण और प्रोत्साहन मिले। ऐसा होने पर हमारे खिलाड़ी इन खेलों में सबसे बड़े मुकाम तक पहुंच सकते हैं।
- जी के चक्रवर्ती







