उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्यालय लखनऊ पर आयोजित पत्रकार वार्ता में आज प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रहे आरपीएन सिंह के बीजेपी में शामिल होने पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा वे राजा-महाराजा हैं, उनका मेरे जैसे छोटी बिरादरी के ग़रीब आदमी का कांग्रेस का प्रदेश अध्यक्ष बनना रास नहीं आ रहा था इसलिए उन्होंने पार्टी छोड़ दी।
उन्होंने कहा कि ये नयी कांग्रेस है जिसमें संघर्ष करने वाले ही रह सकते हैं। उत्तर प्रदेश के जमीनी मुद्दों पर श्री राहुल गांधी और श्रीमती प्रियंका गांधी के साथ हजारों कार्यकर्ता जुटे रहे, लाठियां खाई, जेल गए, मुकदमें झेले। वे खुद कई बार जेल गये, लेकिन आरपीएन सिंह कभी सड़क पर नहीं दिखे।
बयान से दिया अपना सर्टिफ़िकेट:
उन्होंने कहा कि अब ये अफवाह फैलायी जा रही है कि कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष भी जा रहे हैं लेकिन उनके ख़ून के हर क़तरे पर कांग्रेस पार्टी का अहसान है जिसने एक ग़रीब घर के बेटे को प्रदेश अध्यक्ष बनाया। वे मरते दम तक राहुल गांधी के सिपाही बने रहेंगे।
आरपीएन सिंह मुझ पर लगातार दबाव बनाते रहे:
आरपीएन सिंह पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि अति पिछड़े, गरीब, किसान, मजदूर के बेटे को कांग्रेस ने प्रदेश अध्यक्ष बनाया, इसलिए उन्होंने कांग्रेस पार्टी से इस्तीफ़ा दे दिया ? वर्ष 2013 में जब वह केंद्रीय गृह राज्यमंत्री थे, एक गरीब कांग्रेस कार्यकर्त्ता को तमकुही राज में पुलिस ने बुरी तरह मार-पीटा। जब मैंने इस घटना के विरोधस्वरूप आंदोलन शुरू किया, तो आरपीएन सिंह मुझ पर लगातार दबाव बनाते रहे कि आप लड़ाई मत लड़ो, संघर्ष मत करो, लेकिन मैंने लड़ाई लड़ी। 2015 में समाजवादी पार्टी की सरकार में गन्ना किसानों के मुद्दे पर आंदोलन को लेकर जेल गया। कांग्रेस पार्टी ने आरपीएन सिंह को बहुत कुछ दिया, मंत्री बनाया, सम्मान दिया, लेकिन बतौर पार्टी नेता, वह न तो वह मुझसे मिलने जेल में आए, न कोई आंदोलन किया और न ही कोई प्रेस विज्ञप्ति जारी की।
कभी भी कार्यकर्ताओं के सुख, दुःख में खड़े नहीं हुए:
श्री अजय ने कहा कि जब मैं उत्तर प्रदेश में सदन में कांग्रेस विधानमंडल दल का नेता था तो खनन माफिया के खिलाफ धरना दिया था। 6 महीने तक आंदोलन किया। सरकार ने मुझे देवरिया जेल भेज दिया, तब भी माफियाओं के समर्थन में आरपीएन सिंह ने मुझ पर अनेक दबाव बनाए। लेकिन खनन के पट्टे की मैंने लड़ाई लड़ी और उसे निरस्त कराया। इस पूरे मुद्दे पर आरपीएन सिंह गायब थे। कभी भी कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ताओं के सुख, दुःख में खड़े नहीं हुए। कभी भी कांग्रेस पार्टी के नेता बतौर जनता के मुद्दों पर लड़ाई नहीं लड़ी।







