गौतम चक्रवर्ती

आज केवल हमारे देश में ही नही बल्कि सम्पूर्ण भूमंडल के जलवायु में घोर परिवर्तन हो चुका है और ऐसे में लग रहा है कि आगे आने वाले समय में और भी अत्याधिक परिवर्तन देखने को मिले तो कोई आश्चर्य की बात नहीं है। मानसून पूर्व वर्षा का जो माहौल मार्च, अप्रैल और मई के महीने देखने को मिला करती थी, आज बिल्कुल उसके विपरीत सभी बातें हो रही हैं।
हमारे देश में अभी तक दक्षिण पश्चिम मानसून सामान्यत 1 जून तक केरल में पहुंच जाया करता था और 10 जून तक सम्पूर्ण दक्षिण भारत को भिगो कर सराबोर कर देता था और फिर 15 जून तक यह रायपुर तथा पटना तक पहुंच जाया करता था और फिर लगभग 1 जुलाई से 15 जुलाई के मध्य तक सम्पूर्ण भारत को मानसूनी वर्षा जल से सराबोर कर देता है। यह मानसून के बरसने की समयावधि मौसम विभाग की दीर्घकालीन औसत पर आधारित है। लेकिन आज प्रति वर्ष मानसून इन सामान्य तिथियों तक देश के सभी हिस्सों में नहीं पहुंच पाता है।
जलवायु संकट इतनी तेजी के साथ बदल रहा है कि उसका अनुमान लगाना संभव नहीं है। ऐसी स्थिति में यदि हम अब भी नहीं संभले तो अनहोनी को कोई नहीं ताल सकता। न जीवन बचेगा, न आजीविका और नही प्रकृति ही बचेगी। ऐसा केवल हमारा ही मानना नही है बल्कि यह चेतावनी पर्यावरण विशेषज्ञों ने पूरी दुनिया के लिए व्यक्त किया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन लगातार जारी रहेगा ऐसे में हम और आप में से कोई भी सुरक्षित नहीं है। आईपीसीसी की एक ताजा रिपोर्ट में भारत के साथ -साथ सम्पूर्ण दुनिया को चेतावनी दी गयी है कि हिंद महासागर, दूसरे महासागरों की अपेक्षा तेजी से गर्म होता चला जा रहा है। इसके साथ ही यह भी चेतावनी दी गई है कि सम्पूर्ण विश्व में जलवायु परिवर्तन के कारण भारत को लू और बाढ़ जैसे खतरों से सामना करना पड़ेगा। विश्व वातावरण के तापमान में दो डिग्री तक की बढ़ोत्तरी से भारत, चीन और रूस में गर्मी का प्रकोप अत्यंत बढ़ जाएगा और जहां की धरती बर्फ से ढकी रहती हैं वहां की बर्फ वातावरण के तापमान से पिघलना शुरू कर देगा बल्कि शुरू हो भी चुकी है।
भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (आईआईटीएम) के वैज्ञानिकों की एक रिपोर्ट में इस बात का उल्लेख किया गया है कि तापमान में बढ़ोत्तरी के कारण आगे आने वाले वर्षो में समुद्र के जलस्तर में 40 से 50 फीसदी तक की वृद्धि देखने को मिलेगी। आज से पहले समुद्र के जलस्तर में बढ़ोतरी की घटनाएं 100 वर्षों के अंतराल में एक बार देखने को मिलती थीं लेकिन इस सदी के अंत तक यह प्रति वर्ष ही देखने को मिलेगी।
भूमंडलीय गर्मी बढ़ने से पृथ्वी पर भारी वर्षा से लेकर बाढ़ के प्रकोप से शहरों से लेकर गावों तक में अपना कहर बरपाने की आशंकाये बन जाती है साथ ही सूखे की स्थिति का भी सामना करना पड़ रहा है। एक रिपोर्ट के अनुसार अगले 20-30 वर्षो में हमारे देश में उत्पन्न आंतरिक मौसमी बदलावो के कारण वर्षा अधिक नहीं होगी, लेकिन इस सदी के अंत तक ग्रीष्मकालीन मॉनसून में बदलाव से अति वृष्टि देखने को मिलेगी।







