- बिजली दर व्यापक बढ़ोत्तरी प्रस्ताव में नया पेंच, मामला उलझा।
- बिजली कम्पनियों के कुल ए0आर0आर0 70461 करोड़ में कमी कर उसे किया 66078 करोड़।
- राजस्व गैप में 3359 करोड़ की कमी औसत विद्युत आपूर्ति लागत में भी लगभग 17 पैसे की कमी।
- पहले कुल बिजली खरीद की लागत रू0 4.11 प्रति यूनिट अब वह पहुंची रू0 3.90 प्रति यूनिट।
- उपभोक्ता परिषद ने उठायी मांग रिटेल टैरिफ प्रस्ताव में हो बदलाव, ग्रामीण व किसानों की व्यापक बिजली दर बढ़ोत्तरी प्रस्ताव हो वापस।
लखनऊ 17 सितम्बर। बिजली कम्पनियों द्वारा दाखिल मल्टी इयर टैरिफ (एमवाईटी) एआरआर व व्यापक बिजली दर बढ़ोत्तरी प्रस्ताव पर उपभोक्त परिषद अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा की लड़ाई रंग लायी। बिजली कम्पनियों को महंगी बिजली ओएण्डएम अधिक एआरआर रिलायन्स सहित अन्य उत्पादन गृहों की फिक्स कास्ट को कम करने के मुद्दे पर झुकना ही पड़ा। अंततः पावर कार्पोरेशन को अपने पूरे एआरआर को संशोधित करना पड़ा दो दिन पहले वर्ष 2017-18 के लिये बिजली कम्पनियों ने पूर्व में नियामक आयोग में दाखिल कुल एआरआर 70461 करोड़ में रू0 4383 करोड़ कम करके अब रू0 66078 करोड़ कर दिया गया है।
बिजली कम्पनियों द्वारा पहले वर्ष 2017-18 के लिये राजस्व गैप 19616 करोड़ दिखाया गया था, अब उसमें 3359 करोड़ की कमी करके 16257 करोड़ कर दिया गया है। बिजली कम्पनियों द्वारा पूर्व में उपभोक्ता छोर पर निकाली गयी औसत विद्युत आपूर्ति कास्ट जो पहले रू0 7.14 प्रति यूनिट प्रस्तावित किया गया था, उसमें बदलाव कर अब उसे रू0 6.97 प्रति यूनिट कर दिया गया है। इसी प्रकार बिजली कम्पनियों द्वारा पहले जो वर्ष 2017-18 के लिये कुल बिजली खरीद की कुल आवश्यकता 128908 करोड़ मिलियन यूनिट व उसकी कुल लागत रू0 52919 करोड़ व औसत कास्ट रू0 4.11 प्रति यूनिट प्रस्तावित की गयी। अब उसे बदलकर कुल बिजली की आवश्यकता 123808 मिलियन यूनिट व कुल लागत 48269 करोड़ प्रस्तावित की गयी है और औसत लागत रू0 3.90 प्रति यूनिट अर्थात लगभग 21 पैसे प्रति यूनिट की कमी की गयी। जो यह सिद्ध करता है पूर्व में बिजली कम्पनियों ने मनमाने तरीके से एआरआर में आंकड़े बढ़ाकर ग्रामीण व किसानों की दरों में अधिकतम 350 प्रतिशत की वृद्धि प्रस्तावित की गयी है। उपभोक्ता परिषद ने प्रदेश के मुख्यमंत्री महोदय से मांग की है कि अब यह सिद्ध हो गया है कि आंकड़े मनगढ़ंत थे जिसे उपभोक्ता परिषद के व्यापक विरोध के बाद बदलना पड़ा। ऐसे में उपभोक्ताओं पर साजिश करने वाले पावर कार्पोरेशन के उच्चाधिकारियों के खिलाफ सरकार को कठोर कदम उठाते हुए बढ़ोत्तरी प्रस्ताव पर पुनर्विचार करना चाहिए।
उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि बिजली कम्पनियों द्वारा 2 दिन पहले संशोधित एआरआर में पहले जो कुल बिजली बेची जानी थी, उसे 98694 मिलियन यूनिट प्रस्तावित किया गया था। अब उसे घटाकर 94795 मिलियन यूनिट कर दिया गया है। पावर कार्पोरेशन का मानना है कि वर्ष 2017-18 में लगभग 6 माह बीत गया है। इसलिये जो नये उपभोक्ताओं को जोड़ने का लक्ष्य 1 करोड़ 23 लाख रखा गया था, उसे घटाकर 50 लाख कर दिया गया है। पावर कार्पोरेशन ने अपने ओएण्डएम खर्च 76222 करोड़ में 203 करोड़ की कटौती करते हुए उसे अब 7419 करोड़ प्रस्तावित किया गया है। जो यह सिद्ध करता है कि पावर कार्पोरेशन को उपभोक्ता परिषद के विरोध के आगे पूरे एआरआर को बदलना पड़ा ।
उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने कहा कि औसत विद्युत आपूर्ति कास्ट में कमी व राजस्व गैप में 3359 करोड़ की कमी से यह सिद्ध हो गया है कि अब पावर कार्पोरेशन को अपने पूरे रिटेल टैरिफ प्रस्ताव को पुनः संशोधित करते हुए ग्रामीण व किसानों की व्यापक बिजली वृद्धि को वापस लेना चाहिए। अभी भी बिजली कम्पनियों द्वारा दाखिल संशोधित एआरआर में अनेकों आंकड़े मनगढ़ंत है। बिजली कम्पनियों द्वारा आरओई के रूप में जो लगभग 1628 करोड़ का फायदा मांगा गया है, उसे शून्य करना चाहिए और साथ ही ओएण्डएम खर्च में अभी भी लगभग 3 हजार करोड़ अधिक दिखाये गये हैं। उसका मुख्य कारण गलत तरीके से प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं की बिजली दरों में बढ़ोत्तरी कराना एक मात्र लक्ष्य है।







