लखनऊ। उत्तर प्रदेश के पूर्व कैबिनेट मंत्री और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव आजम खान और उनके बेटे व पत्नी को इलाहाबाद हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिल गई है। हाई कोर्ट ने आजम खान के बेटे अब्दुल्लाह आजम के दो फर्जी बर्थ सर्टिफिकेट केस में राहत दी है। रामपुर कोर्ट द्वारा सुनाई गई सात साल की कैद की सजा पर हाई कोर्ट ने रोक लगा दी है। इंसाफ की इस जीत पर समाजिक कार्यकर्ता साहिल रज़ा से सीनियर कॉपी एडीटर राहुल गुप्ता की बात हुई।
जिस पर साहिल रज़ा ने बताया कि आजम खां साहब व उनके बेटे पर कुछ और झूठे आरोप लगाये गये हैं जिनसे जल्द ही पर्दा उठेगा। उम्मीद है कि सच और न्याय की जीत होगी। इस न्याय के इंतजार में अवाम की दुआएं लगातार आजम साहब के साथ रहीं।
उच्च न्यायालय से मिले इंसाफ के कारण आज हर समाज के लोगों (कुछ लोगों को छोड़कर) में बहुत ही खुशी है। उन्होंने आगे कहा कि राजनीतिक विद्वेषता देश में अमन और चैन की सबसे बड़ी दुश्मन बनती जा रही है। सत्ता के दुरुपयोग से बेगुनाह को गुनाहगार बनाने का खेल सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश की राजनीति पर भी ग्रहण लगाने का कार्य कर रहा है। इसे हर हाल में रुकना चाहिए।

उन्होंने आगे बताया कि सपा के कद्दावर नेता आजम साहब को भले ही हाईकोर्ट से जमानत मिल गई हो, लेकिन बावजूद इसके वह जेल की सलाखों से बाहर नहीं आ सकेंगे। क्योंकि एक अन्य प्रकरण, डूंगरपुर प्रकरण में उन्हें 7 साल की सजा मार्च 2024 में रामपुर कोर्ट द्वारा सुनाई गई थी। इसके अलावा अब्दुल्ला आजम भी फिलहाल जेल में ही रहेंगे उनके विरूद्ध सफाई मशीन चोरी का मामला भी दर्ज है, जिसमें जमानत होना बाकी है। आने वाले कुछ दिनों में हाईकोर्ट में इस मामले में भी सुनवाई होनी है। हाई कोर्ट का फैसला आने तक अब्दुल्ला आजम जेल में ही बंद रहेंगे। जानकारों का मानना है कि आजम खान की पत्नी डॉ. तजीन फातिमा जेल से जल्द बाहर आ सकती हैं।
आजम साहब इन दिनों सीतापुर जेल में बंद हैं, जबकि उनकी पत्नी डॉ. तजीन फातिमा रामपुर जेल और छोटा बेटा अब्दुल्ला आजम हरदोई जेल में बंद हैं। तीनों को अब्दुल्ला आजम के दो-दो जन्म प्रमाण पत्र बनवाने के मामले में रामपुर कोर्ट ने सात-सात साल की सजा सुनाई थी। इसके बाद आजम साहब ने रामपुर कोर्ट के फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। जिस पर हाई कोर्ट ने सात साल की सजा पर रोक लगाते हुए जमानत दे दी है।
साहिल रज़ा ने आगे बताया कि इंसाफ की जीत का सिलिसला शुरू हुआ है और आगे भी माननीय न्यायालय पर पूरा भरोसा है कि आजम साहब व अब्दुल्लाह पर लगे अन्य फर्जी प्रकरणों से भी पर्दा उठा कर राहत और न्याय देने का कार्य करेंगे।
उन्होंने बताया कि आजम साहब के खिलाफ 2019 में डूंगरपुर बस्ती में रहने वाले लोगों ने जगह को खाली कराने के नाम पर लूटपाट, चोरी, मारपीट समेत अन्य धाराओं में रामपुर के गंज थाने में 12 मुकदमे दर्ज कराए थे। इनमें तीन मुकदमों में अभी तक फैसला आ चुका है। दो मामलों में आजम बरी हो चुके हैं। एक केस में सात साल की कैद की सजा हो चुकी है। रामपुर कोर्ट ने बचाव पक्ष के वकीलों को 28 मई तक बहस पूरी करने की मोहलत दी है। हो सकता है 29 मई तक तीसरे केस को लेकर फैसला आ जाए। उन्होंने देश के नामी गिरामी वकील कपिल सिब्बल और इमरानुल्ला का भी तहेदिल से शुक्रिया अदा किया है।







