Close Menu
Shagun News India
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Saturday, October 31
    Shagun News IndiaShagun News India
    Subscribe
    • होम
    • इंडिया
    • उत्तर प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • राजस्थान
    • खेल
    • मनोरंजन
    • ब्लॉग
    • साहित्य
    • पिक्चर गैलरी
    • करियर
    • बिजनेस
    • बचपन
    • वीडियो
    • NewsVoir
    Shagun News India
    Home»Featured

    मृत्यु जब होती है तो शरीर के किन- किन अंगों से प्राण निकलते हैं !

    ShagunBy ShagunJanuary 7, 2025Updated:January 7, 2025 Featured No Comments7 Mins Read
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp
    Post Views: 1,101

    गरुड़ पुराण के अनुसार, शरीर के नौ अंगों से प्राणों का निकलना होता है, पापी मनुष्य कैसे त्याग करता है प्राण –

    गरुड़ पुराण में बताया गया है कि शरीर के नौ द्वार होते हैं जिससे शरीर से प्राण बाहर निकलता है
    यह व्यक्ति के स्वभाव और कर्मों पर निर्भर करता है कि उसकी आत्मा किस अंग से निकलती है। जानिए, किस स्वभाव के व्यक्ति के किस अंग से प्राण निकलते हैं!

    गरुड़ पुराण: हिंदू धर्म में अनेक महत्त्वपूर्ण पुराण हैं, जो विभिन्न विषयों की व्याख्या करते हैं। गरुड़ पुराण मृत्यु और आत्मा से जुड़े गूढ़ रहस्यों को उजागर करता है। इसमें भगवान विष्णु और उनके भक्त गरुड़ के बीच संवाद का वर्णन है। इसी संवाद में यह बताया गया है कि जब किसी व्यक्ति की मृत्यु होती है, तो उसके प्राण शरीर के किस अंग से निकलते हैं और वह अंग उस व्यक्ति के स्वभाव के अनुसार कैसे निर्धारित होता है।

    किसी मनुष्य का प्राण किस द्वार से बाहर निकलता है?

    • गरुड़ पुराण में बताया गया है कि शरीर के नौ द्वार होते हैं जिससे शरीर से प्राण बाहर निकलता है
    • नाक से प्राण निकालना बहुत ही शुभ माना जाता है
    • किस व्यक्ति की मरते वक्त आंखें खुली रहती हैं या उलट जाती हैं?

    पापी व्यक्ति एवं दुराचारी इस तरह त्यागते हैं प्राण

    आपने अक्सर देखा होगा कि किसी व्यक्ति की मृत्यु के समय उसका मुख या आंखें खुली रह जाती हैं। इसका कारण यह है कि उसके प्राण मुख या आंखों के माध्यम से निकले होते हैं। लेकिन हिंदू धर्म के अनुसार, प्राण निकलने का मार्ग केवल मुख ही नहीं है। शरीर के कई अन्य अंग या द्वार भी प्राणों के निकलने के मार्ग हो सकते हैं। यह मार्ग व्यक्ति के स्वभाव और उसके कर्मों के आधार पर निर्धारित होता है।

    गरुड़ पुराण में बताया गया है कि शरीर के नौ द्वार होते हैं जिससे शरीर से प्राण बाहर निकलता है। ये द्वार हैं – दोनों आंखें, दोनों कान, मुख, दोनों नासिकाएं और शरीर के दोनों उत्सर्जन अंग। इनमें से किसी एक द्वारा से ही मृत्यु के दौरान व्यक्ति के प्राण निकलते हैं।

    किस प्रकार के व्यक्ति के प्राण किस अंग से निकलते हैं?

    गरुड़ पुराण में इस विषय की भी व्याख्या की गई है कि किस स्वभाव या परिस्थिति के अनुसार व्यक्ति के प्राण किस अंग से बाहर निकलते हैं। इस पुराण के अनुसार, जो व्यक्ति अपने जीवन को पूरी निष्ठा से कर्तव्यों का पालन करते हुए या भगवान की भक्ति में लीन होकर व्यतीत करता है, उसके प्राण नाक के माध्यम से निकलते हैं। नाक से प्राणों का निकलना अत्यंत शुभ माना जाता है, क्योंकि यह केवल सदाचारी और पुण्यात्मा व्यक्तियों के साथ ही होता है। वहीं, जो व्यक्ति अपने पूरे जीवन को धर्म के मार्ग पर चलकर व्यतीत करता है, उसके प्राण मुख से निकलते हैं। मुख से प्राणों का निकलना भी एक शुभ और उत्तम आत्मा का प्रतीक माना जाता है।

    किस व्यक्ति की मृत्यु के समय आंखें खुली रहती हैं या उलट जाती हैं?

    जो व्यक्ति जीवन के प्रति अत्यधिक मोहग्रस्त हो, जिसे जीने की प्रबल इच्छा हो, और जिसे अपने परिवार से गहरा लगाव हो, ऐसे व्यक्ति के प्राण आंखों के माध्यम से निकलते हैं। यही कारण है कि ऐसे लोगों की मृत्यु के समय उनकी आंखें खुली रह जाती हैं। ऐसे लोग मोह के कारण अपने प्राण त्यागना नहीं चाहते, लेकिन यमराज बलपूर्वक उनके प्राण हर लेते हैं। इसी वजह से कई बार इन व्यक्तियों की आंखें उलट जाती हैं।

    पापी व्यक्ति और दुराचारी इस प्रकार त्यागते हैं प्राण

    जो व्यक्ति स्वार्थी हो, जिसने जीवनभर केवल अपने और अपने परिवार के हित के बारे में ही सोचा हो, अपना अधिकांश समय धन-संपत्ति कमाने में लगाया हो, जनकल्याण के कार्यों से दूर रहा हो और जिसने अपने जीवन में कामवासना को प्राथमिकता दी हो, ऐसे लोग मृत्यु के समय यमदूतों को देखकर भयभीत हो जाते हैं। इस घबराहट के कारण उनके प्राण नीचे की ओर सरक जाते हैं। इसी कारण उनके प्राण शरीर के निचले उत्सर्जन अंगों, अर्थात मल द्वार और मूत्र द्वार से निकलते हैं। ऐसे लोग मृत्यु के समय मल-मूत्र का त्याग भी कर देते हैं। गरुड़ पुराण के अनुसार, यमदूत ऐसे पापी व्यक्तियों की आत्माओं के गले में पाश बांधकर उन्हें यमलोक ले जाते हैं।

    जानिए आपके प्राण कहाँ से निकलेंगे…

    प्रत्येक व्यक्ति अलग इंद्रिय से मरता है। किसी की मौत आंख से होती है, तो आंख खुली रह जाती है—हंस आंख से उड़ा। किसी की मृत्यु कान से होती है। किसी की मृत्यु मुंह से होती है, तो मुंह खुला रह जाता है।

    अधिक लोगों की मृत्यु जननेंद्रिय से होती है, क्योंकि अधिक लोग जीवन में जननेंद्रिय के आसपास ही भटकते रहते हैं, उसके ऊपर नहीं जा पाते।

    आपकी जिंदगी जिस इंद्रिय के पास जीयी गई है, उसी इंद्रिय से मौत होगी। औपचारिक रूप से हम मृतक को जब मरघट ले जाते हैं तो उसकी कपाल—क्रिया करते हैं, उसका सिर तोड़ते हैं। वह सिर्फ प्रतीक है। पर समाधिस्थ व्यक्ति की मृत्यु उस तरह होती है। समाधिस्थ व्यक्ति की मृत्यु सहस्रार से होती है।

    जननेंद्रिय सबसे नीचा द्वार है। जैसे कोई अपने घर की नाली में से प्रवेश करके बाहर निकले। सहस्रार, जो तुम्हारे मस्तिष्क में है द्वार, वह श्रेष्ठतम द्वार है।

    जननेंद्रिय पृथ्वी से जोड़ती है, सहस्रार आकाश से। जननेंद्रिय देह से जोड़ती है, सहस्रार आत्मा से। जो लोग समाधिस्थ हो गए हैं, जिन्होंने ध्यान को अनुभव किया है, जो बुद्धत्व को उपलब्ध हुए हैं, उनकी मृत्यु सहस्रार से होती है। उस प्रतीक में हम अभी भी कपाल क्रिया करते हैं।

    यह दरवाजा मरने के बाद नहीं खोला जाता, यह दरवाजा जिंदगी में खोलना पड़ता है। इसी दरवाजे की तलाश में सारे योग, तंत्र की विद्याओं का जन्म हुआ। इसी दरवाजे को खोलने की कुंजियां हैं योग में, तंत्र में।

    इसी दरवाजे को जिसने खोल लिया, वह परमात्मा को जानकर मरता है। उसकी मृत्यु समाधि हो जाती है।

    प्रत्येक व्यक्ति उस इंद्रिय से मरता है, जिस इंद्रिय के पास जीया। जो लोग रूप के दीवाने हैं, वे आंख से मरेंगे; इसलिए चित्रकार, मूर्तिकार आंख से मरते हैं। उनकी आंख खुली रह जाती है। जिंदगी—भर उन्होंने रूप और रंग में ही अपने को तलाशा, अपनी खोज की। संगीतज्ञ कान से मरते हैं, उसके बाद दृष्टि और फिर श्रवण इन्द्रिय मन में विलीन हो जाती हैं । उस समय वह न देख पाता है, न बोल पाता है और न ही सुन पाता है ।

    उसके बाद मन इन इंद्रियों के साथ प्राण में विलीन हो जाता है उस समय सोचने समझने की शक्ति समाप्त हो जाती है, केवल श्वास-प्रश्वास चलती रहती है ।

    इसके बाद सबके साथ प्राण सूक्ष्म शरीर मे प्रवेश करता है । फिर जीव सूक्ष्म रूप से पृथ्वी, अग्नि, जल, वायु और आकाश (पञ्च तन्मात्राओं) का आश्रय लेकर हृदय देश से निकलने वाली 101 नाड़ियों में से किसी एक में प्रवेश करता है ।

    हृदय देश से जो 101 नाड़ियां निकली हुई है, मृत्यु के समय जीव इन्हीं में से किसी एक नाड़ी में प्रवेश कर देह-त्याग करता है । मोक्ष प्राप्त करने वाला जीव जिस नाड़ी में प्रवेश करता है, वह नाड़ी हृदय से मस्तिष्क तक फैली हुई है । जो मृत्यु के समय आवागमन से मुक्त नहीं हो रहे होते वे जीव किसी दूसरी नाड़ी में प्रवेश करते हैं ।

    जीव जब तक नाड़ी में प्रवेश नही करता तब तक ज्ञानी और मूर्ख दोनों की एक गति एक ही तरह की होती है । नाड़ी में प्रवेश करने के बाद जीवन की अलग अलग गतियां होती हैं।

    श्री आदि शंकराचार्य जी का कथन है कि ‘जो लोग ब्रह्मविद्या की प्राप्ति करते हैं वो मृत्यु के बाद देह ग्रहण नही करते, बल्कि मृत्यु के बाद उनको मोक्ष प्राप्त हो जाता है’ । श्री रामानुज स्वामी का कहना है ‘ब्रह्मविद्या प्राप्त होने के बाद भी जीव जीव देवयान पथ पर गमन करने के बाद ब्रह्म को प्राप्त हो जाता है, उसके बाद मुक्त हो जाता है।

    • तहक्षी से साभार

    Shagun

    Keep Reading

    गजब हो गया : दूसरों का भविष्य बताने वाले ज्योतिषाचार्य की पत्नी चुनाव हारीं, 300 वोट भी नहीं मिले!

    यूपी में श्रमिकों की बढ़ी मजदूरी, महंगाई सूचकांक के आधार पर तय हुई दरें

    नीले ड्रम’ हत्याकांड पर आया फैसला : जैसी करनी, वैसी भरनी

    Two RPF Sub-Inspectors honoured for saving the lives of a mother and child on the platform.

    प्लेटफॉर्म पर मां-बच्ची की जान बचाने वाले दो RPF उपनिरीक्षक सम्मानित

    अकीदा बनाम अंधविश्वास: पक्के विश्वास और भटकती भीड़ की दास्तान

    Three-day-old baby elephant swept away by the waves; mother left writhing in distress on the shore; emotional reunion follows rescue.

    लहरों में बह गया तीन दिन का नन्हा हाथी, किनारे तड़पती रही मां; रेस्क्यू के बाद हुआ भावुक मिलन

    Leave A Reply Cancel Reply

    Advertisment
    Google AD
    We Are Here –
    • Facebook
    • Twitter
    • YouTube
    • LinkedIn

    EMAIL SUBSCRIPTIONS

    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading
    About



    ShagunNewsIndia.com is your all in one News website offering the latest happenings in UP.

    Editors: Upendra Rai & Neetu Singh

    Contact us: editshagun@gmail.com

    Facebook X (Twitter) LinkedIn WhatsApp
    Popular Posts

    गजब हो गया : दूसरों का भविष्य बताने वाले ज्योतिषाचार्य की पत्नी चुनाव हारीं, 300 वोट भी नहीं मिले!

    October 29, 2026
    Anuradha Paudwal: Reached great heights, yet also endured the pain of profound loneliness.

    अनुराधा पौडवाल : बुलंदियों को भी छुआ और गहरे अकेलेपन का दर्द भी झेला

    October 28, 2026

    यूपी में श्रमिकों की बढ़ी मजदूरी, महंगाई सूचकांक के आधार पर तय हुई दरें

    October 28, 2026
    Neeru Sharma Explores Parenting, Social Conditioning and Unspoken Wounds as the Trailer of Sonali Kulkarni’s ‘Like Maa’ Is Released

    माँ की परवरिश में छिपे बचपन के जख्मों की कहानी कहेगी ‘लाइक माँ’

    October 28, 2026
    U&i launches new gadgets: now listen to music and make calls for up to 50 hours—all through your glasses.

    U&i के नए गैजेट्स लॉन्च, अब चश्मे से सुनें म्यूजिक और 50 घंटे तक करें कॉलिंग

    October 28, 2026

    Subscribe Newsletter

    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading
    Privacy Policy | About Us | Contact Us | Terms & Conditions | Disclaimer

    © 2026 ShagunNewsIndia.com | Designed & Developed by Krishna Maurya

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.

    Newsletter
    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading