करप्शन रोकने वाले ही करप्ट होंगे, तो करप्शन रूकेगा कैसे, एएसपी शर्मा जैसे और भी कई अफसर होंगे
ओम माथुर
अब आपकी भी समझ में आ गया होगा कि राजस्थान में भ्रष्टाचार क्यों बढ़ रहा है? क्यों यह कहा जाने लगा है कि राजस्थान में हर विभाग में भ्रष्टाचार है? क्यों यह जनधारणा बन गई है कि किसी भी पार्टी की सरकार हो,कोई भी काम हो,बिना कुछ दिए नहीं होगा। जाहिर है जब भ्रष्टाचार को रोकने वाले एंटी करप्शन विभाग के अधिकारी ही करप्शन करने में जुटे हो,तो हो तो भ्रष्टाचार मिटेगा भी कैसे?
एंटी करप्शन ब्यूरो के एएसपी सुरेंद्र कुमार शर्मा खुद फिल्मों की तरह वसूली के लिए अपना गिरोह चला रहे थे। बाकायदा विभागवार दलाल बना रखे थे। उन पर हैड दलाल भी था। जो अधिकारी-कर्मचारी पैसा नहीं देता था, उसे खुद फोन कर सर्जिकल स्ट्राइक की यानी रेड- गिरफ्तारी की धमकी देते थे। हर विभाग के लिए अलग-अलग दलाल काम कर रहे थे। हर विभाग को देने वाली धमकी भी अलग-अलग थी। सुरेंद्र कुमार शर्मा तो चपेट में आ गए। लेकिन जनता में हमेशा से यह आम धारणा है कि भ्रष्टाचार रोकने का जिम्मेदार विभाग खुद ही बुरी तरह से भ्रष्ट है। इसके अधिकारी और उनके गुर्गे दूसरे विभाग के अफसरों और कर्मचारियों को ब्लैकमेल कर उनसे वसूली करते हैं और यह सिलसिला आज से नहीं सालों से चल रहा है। लेकिन जो पकड़ा गया वो ही चोर के कारण सुरेंद्र सिंह सुर्खियों में है।
ये आरोप लगते रहे हैं कि एंटी करप्शन ब्यूरो के कई अधिकारी किसी विभाग के अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ शिकायत मिलने पर ( अगर मोटी रकम मिलने की उम्मीद हो तो) पहले संबंधित अधिकारी या कर्मचारी तक अपने दलालों के जरिए यह संदेश पहुंचाते हैं कि उनके खिलाफ करप्शन की शिकायत मिल रही है। समझदार भ्रष्टाचारी ऐसे में कार्रवाई से बचने के लिए कीमत चुकाने को तैयार हो जाते हैं। इसके बाद उन्हें बचने और सतर्क रहने की कोचिंग खुद एसीबी के भ्रष्ट अफसरों से मिल जाती है। फिर चैन से हराम की कमाओ और एक हिस्सा एसीबी तक पहुंचा कर ईमानदार भी बने रहो। ऐसा नहीं है कि एंटी करप्शन ब्यूरो के सभी अधिकारी भ्रष्ट हैं। लेकिन जिस तरह एक मछली सारे तालाब को गंदा कर देती है, उसी तरह शर्मा जैसे अधिकारी पूरे महकमे की बदनामी पर सच्चाई की मुहर तो लगा ही देते हैं।
सवाल ये भी है कि जिन विभागों के अधिकारी आसानी से सुरेंद्र सिंह जैसे एसीबी के करप्ट अधिकारियों को पैसा दे देते हैं,वह खुद भी कितने बड़े रिश्वतखोर होंगे। जाहिर है अपने विभागों में जी भरकर भ्रष्टाचार कर रहे होंगे, इसलिए डर रहे होंगे। इस मामले में करीब 50 से अधिक सरकारी अधिकारी और कर्मचारियों को चिन्हित किया गया है, जिन्होंने सुरेंद्र सिंह शर्मा को उसके दलालों के मार्फत पैसा पहुंचाया है। शर्मा प्रकरण का सबसे महत्वपूर्ण बिंदु यह है कि जिन विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों से धमकाकर वसूली की जा रही थी, वो महकमे अवैध खनन धंधे से जुड़े हैं। जैसे वन विभाग के अधिकारियों को कहा जाता था कि उनके क्षेत्र में बहुत अवैध खनन हो रहा है और इसके लिए वसूली चल रही है। परिवहन विभाग के अधिकारियों को खनन के ओवरलोड वाहनों को पैसे लेकर पास कराने का धमकी दी जाती थी। पुलिस वालों पर भी अवैध खनन में शामिल लोगों और वाहनों को संरक्षण देने का धमकी दी जाती थी। इससे यह तो अंदाजा लग जाता है कि राजस्थान में अवैध खनन कई विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों औय नेताओं के लिए मोटी कमाई का जरिया है। जब इसमें पुलिस और एंटी करप्शन के अफसर भी शामिल हो जाएं, तो मामला सैयां भए कोतवाल अब डर काहे जैसी हो जाता है।
शायद इसीलिए सरकार की तमाम कोशिशों ( दिखावटी ज्यादा लगती है) के बावजूद राजस्थान में अवैध खनन नहीं रूक पाता है। कुछ दिन अभियान चलाकर सरकार भी खामोश हो जाती है। आप सिर्फ तीन उदाहरण से इसे समझ सकते हैं कि राजस्थान में खनन माफिया कितना प्रभावशाली है और नोटों और दादागिरी दोनों से सभी को जेब में रखता है।
- पहला-राजस्थान हाईकोर्ट में जब सीबीआई को राजस्थान में अवैध खनन और परिवहन की जांच के आदेश दिया था, तो सीबीआई ने यह कहकर इंकार कर दिया कि जांच में राज्य सरकार सहयोग नहीं कर रही है।
- दूसरा-भाजपा के विधायक अजय किलक ने विधानसभा में डेगाना विधानसभा क्षेत्र में अवैध बजरी खनन की शिकायत की और एसपी पर आरोप लगाया।
- तीसरा- मंत्री किरोड़ी लाल मीणा ने बीसलपुर से रोजाना 7 करोड़ रुपए की बजरी के अवैध खनन होने का आरोप लगाया। इसीलिए सुरेंद्र कुमार शर्मा ने भी ऐसे विभागों का अवैध वसूली के लिए चयन किया, जिसके अधिकारी और कर्मचारी खुद अवैध खनन से अपनी जेबें भरते थे। यूं बाकी विभागों नगरीय, स्वायत्त शासन, चिकित्सा, आबकारी, पीएचईडी,पीडबल्यूडी आदि में भी भ्रष्टाचार है। लेकिन वहां निरंतरता इतनी नहीं है,जितनी खनन विभाग में है। बहरहाल, 30 जून को होने वाला शर्मा का रिटायरमेंट अब बिगड़ गया है। लेकिन सवाल यही है कि जब तक ऐसे करप्ट अफसरों को पकड़ने के लिए निरंतर कार्रवाई नहीं होगी, तब तक करप्शन रुकने वाला नहीं है। क्योंकि जब बाड़ ही खेत को खाने लग जाएगी, तो उसकी रखवाली कौन करेगा।







