नई दिल्ली, 17 जून 2025: ईरान पर इजरायल के हालिया सैन्य हमलों ने पड़ोसी देश पाकिस्तान में खलबली मचा दी है। पाकिस्तानी नेताओं ने आशंका जताई है कि इजरायल, भारत के साथ मिलकर, ईरान के बाद अब पाकिस्तान को निशाना बना सकता है। इस डर की पृष्ठभूमि में इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का वह बयान है, जिसमें उन्होंने कथित तौर पर पाकिस्तान को “कट्टर इस्लामिक देश” करार दिया था। इस बयान ने पाकिस्तानी संसद में तीखी प्रतिक्रियाओं को जन्म दिया है, जहां नेताओं ने इजरायल और भारत की कथित साझेदारी को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है।
पाकिस्तानी संसद में गूंजा खतरे का अलार्म
पाकिस्तान की नेशनल असेंबली में पूर्व स्पीकर और प्रमुख नेता असद क़ैसर ने एक जोरदार भाषण में कहा, “इजरायल ने ईरान पर हमला कर अपनी मंशा साफ कर दी है। इस साल भारत के ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में इजरायल ने ड्रोन और हथियारों की आपूर्ति कर भारत की मदद की। अब ईरान के बाद इजरायल का अगला निशाना पाकिस्तान हो सकता है, क्योंकि हमारी सीमा ईरान से 1200 किलोमीटर तक सटी है।” क़ैसर ने चेतावनी दी कि इजरायल और भारत की बढ़ती सैन्य साझेदारी पाकिस्तान के लिए “वैश्विक खतरा” बन सकती है।
पाकिस्तान की चिंता और इजरायल-भारत गठजोड़
पाकिस्तानी नेताओं का डर इस तथ्य से और गहरा गया है कि भारत ने हाल के वर्षों में इजरायल के साथ अपनी रक्षा और तकनीकी साझेदारी को मजबूत किया है। मई 2025 में भारत द्वारा पाकिस्तान के खिलाफ कथित तौर पर किए गए ड्रोन हमलों में इजरायल निर्मित हारोप ड्रोन का उपयोग किया गया था, जिसे पाकिस्तान ने अपनी हवाई सीमा में मार गिराने का दावा किया था। असद क़ैसर ने संसद में कहा, “इजरायल और भारत का यह गठजोड़ केवल ईरान तक सीमित नहीं है। अगर हम एकजुट नहीं हुए, तो मुस्लिम देशों का एक-एक कर नंबर आएगा।”
पाकिस्तान का ईरान के प्रति समर्थन
पाकिस्तान ने ईरान के साथ अपनी एकजुटता को बार-बार दोहराया है। प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ ने ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियान से फोन पर बात कर इजरायल के हमलों की निंदा की और क्षेत्रीय शांति के लिए संयुक्त राष्ट्र से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की। रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने भी संसद में कहा, “इजरायल न केवल ईरान, बल्कि यमन और फिलिस्तीन को भी निशाना बना रहा है। अगर मुस्लिम देश एकजुट नहीं हुए, तो कोई भी सुरक्षित नहीं रहेगा।”
परमाणु खतरे की आशंका
ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के वरिष्ठ अधिकारी मोहसन रज़ाई के एक बयान ने पाकिस्तान में तनाव को और बढ़ा दिया है। रज़ाई ने दावा किया कि अगर इजरायल ने ईरान पर परमाणु हमला किया, तो पाकिस्तान अपनी शाहीन-3 मिसाइलों के जरिए इजरायल पर परमाणु जवाबी हमला करेगा। हालांकि, पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने इस दावे का खंडन करते हुए कहा कि पाकिस्तान परमाणु हथियारों का उपयोग केवल अपनी रक्षा और जनता के कल्याण के लिए करेगा।
वैश्विक और क्षेत्रीय प्रतिक्रिया
पाकिस्तान की विदेश नीति में इजरायल को मान्यता न देने की लंबी परंपरा रही है, और वह फिलिस्तीन के समर्थन में खड़ा रहा है। इस बीच, इजरायली प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने 2017 में भारत दौरे के दौरान कहा था, “हम (इजरायल) पाकिस्तान के दुश्मन नहीं हैं, और पाकिस्तान को भी हमारा दुश्मन नहीं होना चाहिए।” फिर भी, हाल के घटनाक्रमों ने पाकिस्तान में यह धारणा मजबूत की है कि इजरायल और भारत मिलकर क्षेत्रीय मुस्लिम देशों को कमजोर करने की रणनीति पर काम कर रहे हैं।
आपातकालीन बैठक बुलाने की मांग
पाकिस्तान ने इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) से आपातकालीन बैठक बुलाने की मांग की है ताकि इजरायल के खिलाफ एकजुट रणनीति बनाई जा सके। साथ ही, पाकिस्तान ने अपने नागरिकों को ईरान की यात्रा न करने की सलाह दी है। विश्लेषकों का मानना है कि इजरायल और ईरान के बीच बढ़ता संघर्ष क्षेत्रीय अस्थिरता को और गहरा सकता है, और पाकिस्तान की चिंताएं इस डर को दर्शाती हैं कि वह इस युद्ध की चपेट में आ सकता है।
पाकिस्तानी जनता और नेताओं में यह डर गहरा रहा है कि अगर इजरायल और भारत के बीच सैन्य सहयोग और गहरा हुआ, तो यह न केवल ईरान बल्कि पाकिस्तान के लिए भी गंभीर खतरा बन सकता है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए, वैश्विक समुदाय से शांति और कूटनीतिक समाधान की मांग तेज हो रही है।







