दोस्तों, शगुन न्यूज़ इंडिया डॉट कॉम के रीडर्स को नमस्कार, प्रणाम। यह कहानी एक मेंढक पर आधारित है जो परिवार या स्कूल में बच्चों को सुनकर उनका आत्मविश्वास बढ़ा सकते हैं।
एक जंगल में दो मेंढक रहते थे। दोनों में बहुत गहरी दोस्ती थी। दोनों हमेशा एक साथ रहते तथा एक साथ खेलते कूदते । एक बार दोनों खेलते-खेलते एक गहरे गड्ढे में गिर गए। गड्ढा इतना गहरा था कि दोनों उसमें से नहीं निकल पा रहे थे, निकल न पाने के कारण जोर-जोर से चिल्ला भी रहे थे। उन दोनों मेंढकों की आवाज सुनकर आसपास के कुछ और मेंढक गड्ढे के पास एकठ्ठा हो गए।

उन दोनों को देख सभी मेंढक बोलने लगे, तुम दोनों अब इस गड्ढे से कभी बाहर नहीं निकल सकते क्योंकि गड्ढा बहुत गहरा हैं, इसलिए तुम दोनों निकलने का प्रयास भी मत करो। हम लोग आपकों ऊपर से ही कुछ खाने- पीने के लिए दे दिया करेंगे। सभी मेढकों की बातें सुन पहले वाला मेंढक यह सोचने लगा कि मेरा अंतिम समय आ गया हैं। अब हम यहाँ से नहीं निकल सकते तथा यहाँ से अब हमें निकलने का प्रयास भी नहीं करना चाहिए। जबकि, दूसरा मेंढक प्रतिदिन उस गड्डे से ऊपर चढ़ने की कोशिश करता और गिर जाता, ऐसा वह हमेशा करता था। लेकिन, पहला वाला मेंढक उसे ऐसा करने से मना भी कर रहा था।
फिर भी, वह दिन प्रतिदिन थोड़ी-थोड़ी और ऊचाइयों पर चढ़ता जा रहा था। जबकि, पहले वाला मेंढक दिए जाने वाले खाने पर आश्रित रहता और हमेशा चिंता में डूबा रहता। जिसके कारण सोच-सोच कर अब वह बहुत कमजोर हो चुका था। इस कारण से, एक दिन उस मेंढक की मृत्यु हो जाती हैं। उसे देख दूसरे मेंढक ने सोचा कि अब मुझे अपने संघर्ष में कोई कमी नहीं छोड़नी चाहिए और मुझे यहाँ से किसी भी हाल में निकलना ही होगा। इस बार उसने अपनी पूरी ताकत गड्ढे से निकलने में लगा दी। अंततः वह मेंढक उस गड़े से बाहर निकल गया।
जब वह बाहर आया तो एक मेंढक ने उसे इशारों से पूँछा कि आप गड्ढे से बाहर कैसे निकले। जबकि, हम लोग ऊपर से यह बोल रहे थे कि तुम कभी भी इस गड्ढे से बाहर नहीं निकल सकते। उस मेंढक ने इशारों से समझाते हुए कहा कि आप लोग जब हमें ऊपर से बता रहे थे। तब मुझे लगा कि आप लोग गड्ढे से निकलने के लिए हमें प्रोत्साहित कर रहे हैं। क्योंकि, मुझे सुनाई नहीं देता हैं।
इस कहानी से हमें यह नैतिक सीख मिलती है कि हमें अपने आप पर हमेशा भरोसा रखना चाहिए, दूसरों की नकारात्मक बातों पर ध्यान नहीं देना चाहिए, इसके अलावा किसी के कहने के आधार पर कोई निर्णय नहीं लेना चाहिए।








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