ईरान-अमेरिका तनाव चरम पर: परमाणु ठिकानों पर हमले के बाद बदले की धमकी
नई दिल्ली, 23 जून 2025 : ईरान और अमेरिका के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया है, जब अमेरिका ने “ऑपरेशन मिडनाइट हैमर” के तहत ईरान के तीन प्रमुख परमाणु ठिकानों—फोर्डो, नतांज़, और इस्फहान—पर हवाई हमले किए। इन हमलों में B-2 स्टेल्थ बॉम्बर्स और बंकर-बस्टर बमों का इस्तेमाल किया गया, जिससे फोर्डो परमाणु केंद्र को भारी नुकसान पहुंचा, जैसा कि सैटेलाइट तस्वीरों से पता चलता है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि हमले पूरी तरह सफल रहे और ईरान की परमाणु क्षमता को “खत्म” कर दिया गया। हालांकि, ईरान की परमाणु ऊर्जा संस्था (AEOI) ने कहा कि इन ठिकानों पर कोई रेडिएशन लीक नहीं हुआ और सुविधाओं की सुरक्षा स्थिर है।
ईरान की प्रतिक्रिया: गंभीर नतीजे भुगतने होंगे
ईरान ने इन हमलों को “अंतरराष्ट्रीय कानून, संयुक्त राष्ट्र चार्टर, और परमाणु अप्रसार संधि (NPT)” का उल्लंघन बताते हुए कड़ी निंदा की। विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने चेतावनी दी कि अमेरिका को इसके “गंभीर परिणाम” भुगतने होंगे। ईरान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से कार्रवाई की मांग की और दावा किया कि उसके परमाणु ठिकाने IAEA की निगरानी में थे। ईरान ने जवाबी कार्रवाई की धमकी दी है, जिसमें अमेरिकी सैन्य ठिकानों या क्षेत्रीय हितों को निशाना बनाना शामिल हो सकता है। कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान होर्मुज़ जलडमरूमध्य को बंद करने पर विचार कर रहा है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई देशों ने गहरी चिंता जताई :
- सऊदी अरब: सऊदी अरब ने अमेरिकी हमलों पर “गहरी चिंता” जताई और ईरान की संप्रभुता के उल्लंघन की निंदा की। साथ ही, सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की।
- कतर और ओमान: दोनों देशों ने हमलों की निंदा की और तनाव कम करने की मांग की।
- चीन और रूस: इन देशों ने अमेरिकी कार्रवाई को “अस्थिर करने वाला” बताया और क्षेत्रीय शांति के लिए बातचीत का आह्वान किया।
- ब्रिटेन: ब्रिटेन ने हमलों पर प्रत्यक्ष टिप्पणी से बचते हुए तनाव कम करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
- अन्य देशों जैसे क्यूबा, चिली, और मैक्सिको ने भी हमलों को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया।
- संयुक्त राष्ट्र: महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने हमलों पर चिंता जताई और कहा कि यह क्षेत्रीय अस्थिरता को बढ़ा सकता है। उन्होंने बातचीत के जरिए समाधान की अपील की।
- ईरान की होर्मुज़ जलडमरूमध्य को बंद करने की धमकी:
यमन ने घोषणा की : हम आधिकारिक तौर पर युद्ध में प्रवेश कर रहे हैं
“हम आधिकारिक तौर पर युद्ध में प्रवेश कर रहे हैं। अपने जहाजों को हमारे पानी से बाहर रखें – या परिणामों का सामना करें।” लाल सागर बस गर्म हो गया।
ईरान की होर्मुज़ जलडमरूमध्य को बंद करने की धमकी
तेल आपूर्ति: ईरान की होर्मुज़ जलडमरूमध्य को बंद करने की धमकी से तेल की कीमतें बढ़ने की आशंका है। भारत, जो अपनी 40% तेल और 50% गैस आपूर्ति के लिए इस मार्ग पर निर्भर है, पर इसका बड़ा आर्थिक प्रभाव पड़ सकता है।
भारत ने की तनाव कम करने की अपील : भारत ने तनाव कम करने की अपील की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियान से बात कर शांति का आह्वान किया। भारत अपने नागरिकों को ईरान से निकालने और वैकल्पिक तेल स्रोतों की तलाश में जुटा है।
हो सकते हैं प्रॉक्सी हमले: ईरान अपने सहयोगियों जैसे हिज़बुल्लाह, हूती विद्रोहियों, या हमास के जरिए अमेरिका या इज़रायल पर अप्रत्यक्ष हमले कर सकता है।
तनाव और बढ़ गया :
ईरान ने इज़रायल पर मिसाइल हमले तेज कर दिए हैं, जिससे तनाव और बढ़ गया है। अमेरिका ने अपने क्षेत्रीय सैन्य ठिकानों पर सुरक्षा बढ़ा दी है। विश्लेषकों का मानना है कि यह संघर्ष वैश्विक स्तर पर फैल सकता है, खासकर अगर ईरान तेल मार्गों को निशाना बनाता है। ट्रंप के इस कदम की अमेरिका में भी आलोचना हो रही है, जहां विपक्षी दल इसे “युद्ध भड़काने वाला” बता रहे हैं।
बता दें कि इन देशों के लिए यह स्थिति अत्यंत नाजुक है, और अगले कुछ दिन महत्वपूर्ण होंगे। ईरान की जवाबी कार्रवाई और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की मध्यस्थता इस संघर्ष के भविष्य को तय करेगी। भारत सहित कई देश क्षेत्रीय स्थिरता और अपनी आर्थिक सुरक्षा के लिए सतर्क हैं।








