लखनऊ, 30 जून 2025: उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ ने आज प्रदेश के सभी विकास खंडों में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की, जिसमें 50 से कम छात्र संख्या वाले प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों को अन्य स्कूलों में मर्ज करने के सरकारी निर्णय का पुरजोर विरोध किया गया। बैठक में ब्लॉक अध्यक्ष, मंत्रियों, विद्यालय प्रबंध समिति के सदस्यों और प्रभावित स्कूलों के ग्राम प्रधानों ने हिस्सा लिया।

शिक्षक संघ ने इस मर्जर नीति को निशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 (RTE Act) के खिलाफ बताया। उनका कहना है कि यह नीति ग्रामीण और गरीब बच्चों की शिक्षा तक पहुंच को सीमित करेगी, खासकर उन छात्राओं के लिए जो दूर-दराज के स्कूलों तक जाने में असमर्थ हैं। बैठक में इस बात पर रोष व्यक्त किया गया कि खंड शिक्षा अधिकारियों द्वारा शिक्षकों, स्कूल प्रबंध समिति के अध्यक्षों और ग्राम प्रधानों पर अनुचित दबाव डालकर सहमति पत्र हासिल किए जा रहे हैं, जो नियम-विरुद्ध है।

उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष सुनील कुमार पांडे ने कहा, “यह मर्जर न केवल शिक्षा के अधिकार का हनन है, बल्कि यह ग्रामीण बच्चों और शिक्षकों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। सरकार की नीतियों के कारण ही स्कूलों में छात्र संख्या घटी है, और अब इसे आधार बनाकर स्कूल बंद करना अन्यायपूर्ण है।”
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि यदि सरकार ने यह आदेश वापस नहीं लिया, तो शिक्षक संगठन प्रदेशव्यापी आंदोलन शुरू करेंगे। 5 जुलाई से धरना-प्रदर्शन और ब्लैक बैज आंदोलन की शुरुआत की जाएगी, साथ ही विधानसभा सत्र के दौरान लखनऊ में एक विशाल रैली का आयोजन किया जाएगा।
शिक्षक संघ ने समाज के सभी वर्गों से अपील की है कि वे इस जनविरोधी नीति के खिलाफ एकजुट हों और ग्रामीण बच्चों के शिक्षा के अधिकार की रक्षा करें। संघ ने कहा शिक्षा को आंकड़ों में नहीं तौला जा सकता; यह हर बच्चे का मौलिक अधिकार है।







