भीड़ में
भीड़ बहुत है
भीड़ में हारे और जीते हुए
लोग शामिल हैं
एक हारा आदमी
दूसरे जीते आदमी को चीन्ह लेता है
खुद थोड़ा हटकर
उसे रास्ता दे देता है
भीड़ में
बहुत अहंकार है
एक अहंकार की गाड़ी को
दूसरा अहंकार की गाड़ी
पीछे से ठोक देती है
दोनों अहंकार एक -दूसरे को देखते हैं
शक्ति प्रदर्शन होता है, तभी भीड़ से एक टूटा आदमी
निकलता है और दोनों अहंकारों के बीच खड़ा हो जाता है
दोनों अहंकार उसके चिथड़े अस्तित्व को देख शांत हो जाते हैं
और रास्ता खुल जाता है
भीड़ में
हर कोई मंजिल पाने के लिए
बदहवास भाग रहा है
इसमें किसी को मंजिल मिल जाती है
जिसे मंजिल नहीं मिल पाती वह भीड़ में
फिर खो जाता है और
दूसरे भाग रहे लोगों को रास्ता दे देता है
भीड़ में
एसी कार में बैठी युवती झुंझलाती है
उसके माथे पर तिरस्कार का पसीना छलछलाने लगता है
उसकी कार का शीशा पोंछती मरगिल्ली लड़की
बिलावजह खिलखिलाती है
उसकी निर्दोष खिलखिलाहट
दूर तक उस कार के लिए रास्ता बना देती है
भीड़ तो है ही
पर इसमें हारे-टूटे बेदम लोग ही
दूसरों के लिए आगे निकलने का रास्ता
बना ही देते हैं
- आनंद अभिषेक







